Published : Oct 04, 2020, 06:32 PM ISTUpdated : Oct 04, 2020, 06:55 PM IST
खंडवा (मध्य प्रदेश). लॉकडाउन के दौरान देशभर से कई मार्मिक कहानियां सामने आई हैं। किसी की नौकरी चली गई तो कोई दो वक्त के खाने के लिए मोहताज हो गया। ऐसी ही एक दिल को झोकझोर देने घटना मध्य प्रदेश के खंडवा जिले से आई है। जहां एक महिला की जिंदगी में दुखों का पहाड़ टूट गया। आलम यह था कि महिला को भीख मांगकर अपने मासूम बच्चों का पेट भरना पड़ा। लेकिन उसके ससुराल वालों का दिल नहीं पसीजा। आइए जानते हैं क्या पूरा मामला...
लॉकडाउन में भूखे मरता छोड़ गया पति
दरअसल, खंडवा की रहने वाली गुलनाज़ सिद्दीकी का 8 साल पहले साल 2012 में झांसी के अज़हर से निकाह हुआ था। लेकिन शादी के दो-तीन साल बाद ही दोनों में विवाद होने लगा। बात यहां तक पहुंच गई कि पति अपनी पत्नी के साथ रहने को तैयार नहीं था। जब 6 महीने पहले लॉकडाउन लगा तो युवक अपने परिवार को छोड़कर कहीं चला गया। एक-दो महीने बाद घर का सारा राशन और पैसा खत्म हो गया। आलम यह हो गया कि महिला बच्चों का पेट भरने के लिए भीख मांगने की नौबत आ गई।
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ससुराल वालों का भी नहीं पसीजा दिल
काफी दिनों तक उसने पति के लौटने का इंताजार किया, लेकिन वह वापस नहीं आया। महिला जब सुसराल गई और उनके सामने गिड़गिड़ाने लगी, लेकिन उन्होंने घर का दरवाजा नहीं खोला और ना ही उनका दिल नहीं पसीजा। ऐसे हालातों में युवती अपने बच्चों को लेकर मायके खंडवा आ गई।
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पुलिस के सामने पति ने पत्नी को दिया तलाक
गुलनाज़ ने अपना दर्द पुलिस के पास जाकर बयां किया और पति के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। शनिवार को काउंसलिंग सेल ने पति-पत्नी को काउंसलिंग के लिए थाने बुलवाया था। जहां पति ने पुलिस के सामने ही अपनी पत्नी को तीन बार तलाक कहते हुए तलाक दे दिया। महिला हाथ-पैर जोड़ती रही ऐसा मत करो, लेकिन वह नहीं मना। कहने लगा मैंने एक बार तुमको तलाक दे दिया है, अब वापस नहीं ले सकता, खुदा को क्या मुंह दिखाऊंगा इसलिए रहने दो।
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पति को कोई पछतावा नहीं
कानूनी तौर पर तीन तलाक खत्म होने के चलते पुलिस तुरंत हरकत में आई और पति गिरफ्तार कर लिया। इसके अलाव युवक पर मुस्लिम विवाह संरक्षण अधिनियम 2019 के तहत मामला दर्ज कर लिया। इसके बाद भी युवक के चेहरे पर कोई सिकन तक नहीं।
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भूखे मरते रहे, लेकिन कोई नहीं आया पास
महिला ने पुलिस को बताया कि शादी के बाद से उसके ससुराल वाले और पति उससे दहेज की मांग करने लगे थे। कई बार पिता ने मेरा बस जाए इसलिए उनको पैसे भी दिए। लेकिन उनकी लालच कम होने की बजाय बढ़ती चली गई। कई बार पति ने मुझको घर से निकालने की धमकी भी दी। लेकिन वह ऐसा नहीं कर पाया। लॉकडाउन के समय वह घर छोड़कर चला गया। हम भूखे मरते रहे लेकिन ससुराल वालों ने हमारी कोई सुध नहीं ली।
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बच्चों की खातिर सहती रही सारे जुल्म
पीड़िता ने बताया कि मेरे साथ इतना जुल्म होने के बाद भी मैं अपने बच्चों की खातिर पति के सात रहने को तैयार हो गई। इसलिए सुलह करने के लिए महिला परामर्श केंद्र पर गई थी। जहां पति भी आया था, लेकिन उसने हमारी कोई बात नहीं सुनी और पुलिस के सामने तलाक-तलाक कहकर तलाक दे दिया।
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बच्चों की खातिर सहती रही सारे जुल्म
पीड़िता ने बताया कि मेरे साथ इतना जुल्म होने के बाद भी मैं अपने बच्चों की खातिर पति के सात रहने को तैयार हो गई। इसलिए सुलह करने के लिए महिला परामर्श केंद्र पर गई थी। जहां पति भी आया था, लेकिन उसने हमारी कोई बात नहीं सुनी और पुलिस के सामने तलाक-तलाक कहकर तलाक दे दिया।
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