मुंबई. जन्माष्टमी पर देशभर में दही हांड का आयोजन होता रहा है। यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है। खासकर महाराष्ट्र और गुजरात में तो दही हांडी एक ऐतिहासिक आयोजन माना जाता है। शायद ऐसा पहली बार होगा, दाही हांडी पर कोरोना के चलते ग्रहण लगा है। छोटे-मोटे आयोजनों को छोड़ दिया जाए, तो इस साल बड़े आयोजन संभव नहीं होंगे। अभी तक जो सूचनाएं आ रही हैं, उसके हिसाब से बड़े आयोजन टाले जाएंगे। बता दें कि अकेले महाराष्ट्र में कोरोना संक्रमितों की संख्या 1 लाख 28 हजार पार कर चुकी है। इसमें से 5984 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। हालांकि इसमें से 64 हजार से ज्यादा ठीक हो चुके हैं। वहीं, गुजरात में संक्रमितों की संख्या 26 हजार से ज्यादा है। इसमें से 1638 की मौत हो चुकी है। हालांकि यहां भी 18 हजार से ज्यादा रिकवर हो चुके हैं। इस बीच मुंबई के भाजपा नेता और दही हांडी आयोजन समिति के प्रमुख राम कदम ने घोषणा कर दी कि इस साल घाटकोपर में दही हांडी समारोह नहीं होगा। जानिए क्यों मनाया जाता है दही हांडी समारोह और देखिए कुछ पुरानी तस्वीरें..
दाही हांडी की कहानी महाभारतकालीन है। कहते हैं कि भगवान कृष्ण से माखन छुपाने के लिए वृंदावन की महिलाओं ने उसे मटकी में भरकर टांगना शुरू कर दिया था। लेकिन कान्हा अपने साथियों के साथ पिरामिड बनाकर मटकी फोड़ देते थे। यह पर्व तब से चला आ रहा है। दही हांडी में कई फिल्म सितारे शामिल होते हैं।
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मुंबई के दही हांडी आयोजन देशभर में प्रसिद्ध हैं।
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दही हांडी आयोजनों में हजारों की संख्या में लोग उमड़ते हैं।
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देशभर में दही हांडी के आयोजन होते रहे हैं।
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इस तरह की तस्वीरें इस साल देखने को नहीं मिलेंगी।
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दही हांडी का आयोजन एक तरह से युवाओं के जोश को दिखाता है।
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दही हांडी के आयोजनों में बड़े-बड़े कलाकार शामिल होते हैं।
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ये तस्वीरें इस बार कोरोना के चलते दुहराई नहीं जा सकेंगी।
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मुंबई में जन्माष्टमी बड़े धूम-धाम से मनती आई है।
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इस साल कोरोना ने तमाम त्यौहारों पर असर डाला है।
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