Published : Feb 20, 2021, 07:27 PM ISTUpdated : Feb 20, 2021, 07:29 PM IST
मुंबई. महाराष्ट्र से एक दिल को झकझोर देने वाली बड़ी खबर सामने आई है, जहां एक डॉक्टर ने खुद अपने बसे बसाए परिवार को दूसरों की वजह से खत्म कर दिया। पहले पत्नी बच्चों को जहर का इंजेक्शन दिया, इसके बाद खुद ने भी फांसी लगाकर खुदखुशी कर ली। मरने से पहले डॉक्टर ने एक सुसाइड नोट भी लिखा है। जिसको पढ़कर हर किसी की आंखों में आसूं आ गए।
दरअसल, यह घटना अहमदनगर में शनिवार दोपहर घटी। जहां राशिन गांव में रहने वाले डॉ. महेंद्र थोराट ने यह खौफनाक कदम उठाया। डॉक्टर ने इस घटना को अंजाम देने से पहले सुसाइड नोट में लिखा कि मेरा बेटा सुन नहीं सकता है। लेकिन आस पड़ोस और रिश्तेदार उसके साथ गलत बर्ताव करते हुए हमको ताना मारते हैं। इसलिए दुखी होकर हम लोग जान देने जा रहे हैं।
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बता दें कि 41 साल के डॉ. थोराट अपने ही राशिन गांव में खुद का एक हॉस्पिटल चलाते थे। जबकि उनकी पत्नी वर्षा हाउस वाइफ थी। दोनों के दो बेटे थे कृष्णा और कैवल्य। बच्चे और महिला का शव पुलिस को एक कमरे में मिले। जबकि डॉक्टर दूसरे कमरे में पंखे से लटके मिले।
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डॉक्टर डॉ. थोराट ने अपने सुसाइड नोट में लिखा कि यह समाज बहुत बुरा है। जो बिना वजह के हर किसी को परेशान करते हैं। मेरा बेटा कृष्णा सुन नहीं सकता तो उसे लोग ताना मारते हैं। अब हममें कोई सुनने और समझने की शक्ति नहीं रही। क्योंकि लोगों का बर्ताव अब बर्दाश्त नहीं होता है। इसलिए आज ही हमेशा के लिए अलविदा कह रहे हैं। जिनको हम अपना समझते थे वह बेटे की वजह से हमको अपराधी मानते हैं। अब बहुत हुआ और सहन नहीं कर सकते हैं, इसी वजह से जा रहे हैं।
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डॉक्टर थोराट ने अपने सुसाइड नोट में लिखा है कि उनकी सारी प्रॉपर्टी दिव्यांग बच्चों को दान कर दी जाए। साथ ही लिखा कि हम किसी को भी अपनी मौत का जिम्मेदार नहीं मानते हैं। बता दें कि डॉ. थोराट समाज सेवा और अनाथ बच्चों के लिए काम करते थे। वह गरीबों की मदद के लिए अक्सर तैयार रहते थे। लोग अब यही चर्चा कर रहे हैं कि इतना भला इंसान कैसे चला गया।
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