Published : Dec 27, 2020, 11:31 AM ISTUpdated : Dec 27, 2020, 11:38 AM IST
महाराष्ट्र। जी हां यकीन नहीं हो रहा होगा। लेकिन, कुछ ऐसा ही कोल्हापुर में नगर निगम और जीपीआरसी द्वारा कैटल सर्विस सेंटर स्थापित की गई है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यहां मवेशियों के लिए शॉवर बाथ आदि की व्यवस्था की गई है। जिससके निर्माण में करीब 15 लाख रुपए का खर्च आया है। बताते हैं कि यहां मवेशी के पूछ के बाल को भी स्टाइलिश तरीके से काटने की व्यवस्था है। इतना ही नहीं पशु पालकों को अपने मवेशी को स्टाइलिश लुक कराने के लिए पहले से ही अपॉइंटमेंट तक लेनी पड़ती है।
नगर निगम कोल्हापुर में पानी की किल्लत को देखते हुए कई रूल्स बनाए गए हैं। जिसका कड़ाई से पालन सुनिश्चित कराया जा रहा है। जल आपूर्ति में इस्तेमाल होने वाली पानी से जानवरों को धोने पर रोक है।
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बताते हैं कि रोक की वजह से पशुपालक पंचगंगा, रंकाला और अन्य झीलों में अपने जानवरों को धोने के लिए ले जाते थे। इससे जल प्रदूषण का खतरा बना रहता है। ऐसे में लोगों की मांग पर नगर निगम ने अभिनव योजना के तहत मंगेशकर नगर में कैटल सर्विस सेंटर स्थापित की है।
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कैटल सर्विस सेंटर के निर्माण में करीब 15 लाख रुपए का खर्च हुआ। जहां मवेशियों को भैसें को नहलाने के बाद पानी व्यय न हो, इसके लिए पानी को नजदीक के बगीचे तक ले जाया गया है। यहां आने वाली मवेशियों के गोबर का इस्तेमाल पौष्टिक खाद बनाने के लिए होगा।
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मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक कैटल सर्विस सेंटर में एक साथ पांच भैसें धोई जा सकती हैं। यहां एक पशु चिकित्सक भी नियुक्त किया गया है, जो पशु पालकों को सही टिप्स देगा। भैसों के पूछ के बाल को भी स्टाइलिश तरीके से काटने की व्यवस्था यहां की गई है।
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मवेशी पालन के पारंपरिक व्यवसाय के लिए इस क्षेत्र को जाना जाता है। हर साल यहां 'बफैलो रेस' का आयोजन किया जाता है। बता दें कि कोल्हापुर में भैसों का गर्म दूध छोटे-छोटे स्टाल पर बिकता है।
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