कोरोना वायरस को हराने टापू पर बसे इस गांव ने दुनिया से खुद को किया अलग

Published : Mar 26, 2020, 12:17 PM ISTUpdated : Mar 26, 2020, 12:18 PM IST

मुंबई. कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने खुद को कुछ दिनों के लिए सबसे अलग-थलग करना ही बेहतर है। यह बात अब सारी दुनिया समझ चुकी है। प्रधानमंत्री मोदी ने देश में 21 दिनों तक लॉक डाउन की घोषणा की है। इसका मकसद यही है कि लोग संक्रमण से बचें। बावजूद इसके लोग घरों से बाहर निकल रहे हैं। यह एक गंभीर खतरे की निशानी है। इस सबके बीच महाराष्ट्र के एक छोटे से गांव पंजू ने देश के सामने मिसाल पेश की है। एक छोटे से टापू पर बसे इस गांव में 21 दिनों तक किसी को बाहर जाने और दूसरों को अंदर आने पर रोक लगा दी है। करीब 1400 लोगों का यह गांव थाणे जिले के वसूल तहसील में आता है। यहां के लोग खेती-किसानी पर निर्भर हैं। चूंकि यह गांव मुंबई के निकट है, इसलिए यहां अकसर काफी भीड़ होती है। लेकिन अब यहां गांव वालों के अलावा दूसरा कोई नजर नहीं आ रहा। गांव के सरपंच ने आदेश निकाला है कि न कोई बाहर जाए और न किसी को आने दे।  

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कोरोना वायरस को हराने  टापू पर बसे इस गांव ने दुनिया से खुद को किया अलग
पंजू गांव मुंबई के बोरीवली स्टेशन से करीब 15 किमी दूर है। ऐसा कहा जा रहा है कि यह दुनिया का पहला आईलैंड है, जिसने खुद को क्वारंटाइन कर लिया है।
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पंजू गांव के सरपंच आशीष भोईर ने मीडिया को बताया कि गांव को नायगांव से जोड़ने वालीं 30 फेरी सेवाओं को भी निलंबित किया गया है।
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गांव के कई लोग मुंबई-ठाणे में काम करने जाते हैं। वे अब घर पर ही हैं। वहीं, यहां मछुआरों ने अपनी 100 नावें समुद्र के किनारे बांधकर रख दी हैं।
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इस गांव में गरीबों की संख्या अधिक है, बावजूद उन्होंने लॉक डाउन का कड़ाई से पालन करने का निर्णय लिया है। इनके खाने-पीने का इंतजाम अब गांव के अन्य लोग कर रहे हैं।
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करीब 2.50 वर्गमीटर में फैला पंजू गांव नो व्हीकल जोन है। यही वजह है कि यहां प्रदूषण भी बिलकुल नहीं है। यहां एक स्कूल, छोटा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और कई मंदिर हैं। यहां के लोग सब्जियों के अलावा अमरूद, चीकू, केला, आम और जामुन की पैदावार करते हैं।

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