नई दिल्ली: पूर्व केंद्रीय मंत्री और भाजपा नेता अरुण जेटली का शनिवार दोपहर निधन हो गया। वे 66 साल के थे। उन्हें टिश्यू कैंसर था। इस बीमारी के बाद से उनकी तबियत खराब चल रही थी। आज हम आपको भारत के 10 ऐसे नेताओं के बारे में बताने जा रहे है, जिनकी आकस्मिक मौत ने भारत सहित पूरी दुनिया को शॉक कर दिया था।
अरुण जेटली, 24 अगस्त 2019: पूर्व केंद्रीय मंत्री और भाजपा नेता अरुण जेटली का शनिवार दोपहर निधन हो गया। वे 66 साल के थे। 9 अगस्त को एम्स में चेकअप कराने पहुंचे थे, जिसके बाद उन्हें भर्ती कर लिया गया। उन्हें कमजोरी और घबराहट की शिकायत के बाद भर्ती करवाया गया था। जेटली का सॉफ्ट टिश्यू कैंसर का इलाज चल रहा था। वे इस बीमारी के इलाज के लिए 13 जनवरी को न्यूयॉर्क चले गए थे और फरवरी में वापस लौटे थे। इसी के चलते पिछली सरकार में उन्होंने अंतरिम बजट भी पेश नहीं किया था।
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सुषमा स्वराज, 6 अगस्त 2019: सुषमा स्वराज की मौत दिल का दौरा पड़ने से हुई। उन्हें रात करीब साढ़े 9 बजे घबराहट होने लगी थी, जिसके बाद उन्हें एम्स में एडमिट करवाया गया था। डॉक्टरों ने काफी कोशिश की लेकिन उन्हें नहीं बचाया जा सका।
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शीला दीक्षित, 20 जुलाई 2019: 15 साल तक दिल्ली की मुख्यमंत्री रही शीला दीक्षित का 81 साल की उम्र में निधन हो गया। उन्हें भी अचानक दिल का दौरा पड़ा था, जिसके बाद उन्हें दिल्ली के फोर्टिस एस्कार्ट्स अस्पताल में एडमिट करवाया गया। लेकिन उनकी जान नहीं बचाई जा सकी। शीला दीक्षित मौत के कुछ समय पहले से हृदय संबंधी रोगों के चलते गंभीर रूप से बीमार थीं।
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वाईएसआर रेड्डी, 2 सितंबर 2009: वाईएसआर रेड्डी साल 2004 से 2009 तक आन्ध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री थे। वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी के सदस्य थे। 2 सितंबर 2009 को उन्हें ले जा रहा हेलीकॉप्टर नल्लामला के जंगल में खो गया। 3 सितंबर की सुबह करनूल से 40 नॉटिकल मील की दूरी पर रूद्रकोंडा की पहाड़ी पर उनका क्षत-विक्षत शव मिला। उनके साथ हेलीकॉप्टर से जा रहे चार अन्य लोगों की भी मौत हो गई। उनके लापता हेलीकॉप्टर की खोज के लिए भारत का सबसे बड़ा तलाशी अभियान चलाया गया था।
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प्रमोद महाजन, 3 मई 2006: बीजेपी के दिग्गज नेता प्रमोद महाजन को उनके सगे भाई प्रवीण महाजन ने गोली मारी थी, जिस कारण उनकी मौत हो गई थी। प्रवीण ने प्रमोद महाजन पर 4 गोलियां चलाई थी, जिसमें से तीन गोलियां उन्हें लगी। प्रमोद महाजन ने 13 दिन अस्पताल में जिंदगी की जंग लड़ी। लेकिन आखिरकार उनकी मौत हो गई।
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माधवराव सिंधिया, 30 सितंबर 2001: यूपी के कानपुर के पास हवाई हादसे में ग्वालियर के महाराज माधवराज सिंधिया की मौत हो गई थी। इस विमान ने हवा में उड़ते ही आग पकड़ ली थी। विमान में मौजूद सभी लोगों का शव बुरी तरह झुलस गया था।
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राजीव गांधी, 21 मई 1991: राजीव गांधी की मौत बम धमाके में हुई थी। 21 मई को वो तमिलनाडु के श्रीपेरंबदूर में सभा को संबोधित कर रहे थे। वहां से रात को 10 बजे जब वो निकले तो भीड़ में से आई एक महिला उनके पांव छूने के लिए झुकी। लेकिन उसने अपने शरीर से बांधा बम ब्लास्ट कर दिया और इसमें राजीव गांधी की मौत हो गई।
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इंदिरा गांधी, 31 अक्टूबर 1984: इंदिरा गांधी की गोली मारकर हत्या की गई थी। 31 अक्टूबर को इंदिरा के व्यस्त कार्यक्रम के बीच में उनके ही सिक्यॉरिटी गार्ड्स ने उनकी हत्या कर दी। इंदिरा को कुल 28 गोलियां लगी थी। उन्हें तुरंत एम्स ले जाय गया, जहां उन्हें बचाने के लिए 80 बोतल खून चढ़ाया गया लेकिन उनकी जान नहीं बचाई जा सकी।
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संजय गांधी, 23 जून 1980: संजय गांधी की मौत हवाई हादसे में हुई थी। उन्हें जहाज उड़ाना काफी पसंद था। लेकिन इसी शौक ने उनकी जान ले ली। दुर्घटना वाले दिन उन्होंने सुरक्षा नियमों की अनदेखी करते हुए रिहायशी इलाके में जहाज उड़ाया। लेकिन अचानक उसके इंजन ने काम करना बंद कर दिया। थोड़ी देर में विमान नीचे गिर गया और इस हादसे में संजय गांधी की मौत हो गई।
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जवाहरलाल नेहरू, 27 मई 1964: इस दिन दोपहर 2 बजे ऐलान किया गया कि 74 साल के नेहरू नहीं रहे। उनकी मौत का कारण हार्ट अटैक बताया गया। वैसे तो जवाहरलाल नेहरू की सेहत 1962 के बाद लगातार गिर रही थी। लेकिन इस साल जब चीन ने भारत पर हमला किया, तो इससे उन्हें गहरा सदमा लगा था। कहा जाता है कि चीन के हाथों मिली जबरदस्त हार के कारण वो डिप्रेशन में चले गए थे। मौत से एक दिन पहले उनकी तबियत ठीक नहीं थी। अगली सुबह 6.30 बजे उन्हें पीठ में दर्द हुआ, जिसके बाद डॉक्टर बुलाए गए। उसी दौरान वो बेहोश हो गए और उनकी मौत हो गई।
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