गलवान घाटी में हुई हिंसा ने दिलाई 1962 की याद, यहीं चीन ने भारत को दिया था धोखा

Published : Jun 16, 2020, 02:59 PM IST

नई दिल्ली. भारत और चीन के बीच पिछले 1.5 महीने से चला आ रहा विवाद अब चरम पर पहुंच गया है। पूर्वी लद्दाख के गलवान घाटी में सोमवार को दोनों देशों की सेनाओं के बीच हिंसक झड़प हुई। इस दौरान भारत के 1 कर्नल समेत 3 जवान शहीद हो गए। वहीं, इस झड़प में 5 चीनी सैनिकों के भी मारे जाने की खबर है। वहीं, 11 सैनिक जख्मी हुए हैं।

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गलवान घाटी में हुई हिंसा ने दिलाई 1962 की याद, यहीं चीन ने भारत को दिया था धोखा

इस झड़प ने एक बार फिर 1962 के उस टकराव की याद दिला दी, जिसके चलते युद्ध हुआ था। गलवान घाटी में गलवान नदी बहती है। यह क्षेत्र हमेशा से दोनों देशों के बीच टकराव की वजह रहा है। चीनी सैनिक इस क्षेत्र में टेंट लगाकर रहते हैं। वे लगातार भारतीय सेना को उकसाने का काम भी करते हैं।
 

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ऐसा ही कुछ सोमवार रात को भी हुआ। पहले चीनी सेना भारतीय सीमा में घुसी। जब भारतीय सैनिकों ने उन्हें रोका तो दोनों पक्षों में झड़प हो गई। 
 

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58 साल पहले इसी घाटी को लेकर भारत और चीन के बीच युद्ध हुआ था। ऐसे में अब उसी जगह पर एक बार फिर तनाव चरम पर है। हालांकि, भारत और चीन लगातार इस विवाद को बातचीत से सुलझाने पर जोर दे रहे हैं। इसे लेकर कई बैठकें भी हुई हैं।

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चीनी मीडिया ने भारतीय सैनिकों पर सीमा में घुसकर उनके सैनिकों पर हमला करने का आरोप लगाया है। वहीं, भारत का कहना है कि चीनी सैनिक भारतीय सीमा में घुसे थे।

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इस विवाद को बातचीत से सुलझाने के लिए दोनों देशों के अधिकारी बैठकें कर रहे हैं। उधर, चीनी मीडिया ने विदेश मंत्री के हवाले से कहा, चीन और भारतीय पक्ष ने सीमा पर बनी स्थिति को हल करने और सीमा क्षेत्रों में शांति बनाए रखने के लिए बातचीत के माध्यम से द्विपक्षीय मुद्दों को हल करने पर सहमति जताई है। 

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क्या है विवाद?
चीन ने लद्दाख के गलवान नदी क्षेत्र पर अपना कब्जा बनाए रखा है। यह क्षेत्र 1962 के युद्ध का भी प्रमुख कारण था। इसका विवाद को सुलझाने के लिए कई स्तर की बातचीत भी हो चुकी है। 6 जून को दोनों देशों के बीच लेफ्टिनेंट जनरल लेवल की बैठक हुई थी। हालांकि, अभी विवाद पूरी तरह से निपटा नहीं है।

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बता दें कि भारत चीन के साथ 3,488 किलोमीटर लंबी सीमा साझा करता है। ये सीमा जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश से होकर गुजरती है। ये तीन सेक्टरों में बंटी हुई है। पश्चिमी सेक्टर यानी जम्मू-कश्मीर, मिडिल सेक्टर यानी हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड और पूर्वी सेक्टर यानी सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश।  

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