जेल में बंद अपने बलात्कारी पोते को एकटक देखती रहीं दादी, फफक कर ऐसे रो पड़ा निर्भया का दोषी

Published : Jan 18, 2020, 04:27 PM IST

नई दिल्ली. निर्भया के दरिंदों को फांसी पर लटकाने की अब नई तारीख सामने आ चुकी है। जिसमें दोषियों को 1 फरवरी को फांसी पर लटकाया जाना है। इन सब के बीच दोषी पवन के परिजनों ने उससे मुलाकात की। इस दौरान तकरीबन आधे घंटे तक हुई मुलाकात के दौरान दादी अपने पोते को निहारती रही। पवन ने अपनी बहन से परिवार वालों के बारे में बातचीत की। जेल नंबर तीन में जाने के बाद चारों दोषियों में से किसी दोषी की यह पहली मुलाकात है। जेल सूत्रों का कहना है कि जेल अधीक्षक के कार्यालय में इनकी मुलाकात करवाई गई। करीब आधे घंटे की मुलाकात हुई।  

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जेल में बंद अपने बलात्कारी पोते को एकटक देखती रहीं दादी, फफक कर ऐसे रो पड़ा निर्भया का दोषी
आखिरी मुलाकात की बाकी है तारीख: जेल सूत्रों का कहना है कि परिवार वालों के मुलाकात कर वापस लौटने के बाद दोषियों के मौत के लिए जारी नया डेथ वारंट जेल पहुंच चुका है। जेल अधिकारियों का कहना है कि दोषियों की मुलाकात में अभी कोई रोक टोक नहीं है। इससे पूर्व मुकेश की मां और विनय के पिता भी उससे मिल चुके हैं। हालांकि अभी तक आखिरी मुलाकात को लेकर कोई तारीख तय नहीं हुई है। (निर्भया के दोषियों की फाइल फोटो)
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दादी को देखते ही लड़खड़ायाः डेथ वॉरंट में फांसी की नई तारीख जारी होने के कुछ देर पहले ही दोषी पवन ने अपनी दादी, बहन और पिता से मुलाकात की, जो करीब आधे घंटे तक चली। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक बहन से मिलकर पवन रोने लगा। दादी को देखते ही वह लड़खड़या। पवन को देखकर लग रहा था कि वह पूरी तरह से टूट चुका हो। (जेल में पेशी के दौरान निर्भया के दोषियों की फाइल फोटो)
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दोषियों की सेहत जांच के लिए मेडिकल बोर्ड का होगा गठनः निर्भया के दोषियों की स्वास्थ्य जांच के लिए जल्द ही मेडिकल बोर्ड का गठन किया जाएगा। फिलहाल दोषियों की लगातार मेडिकल जांच की जा रही है लेकिन जेल प्रशासन ने एक बोर्ड गठित करने का फैसला किया है। बोर्ड में तीन डॉक्टर होंगे, जो दोषियों की सुबह और शाम मेडिकल जांच करेंगे। इसके अलावा दोषियों की मनोचिकित्सक से भी जांच करवाई जा रही है। उन्होंने बताया कि चारों दोषियों के स्वास्थ्य पर पूरी नजर रही जा रही है। इनका डाइट चार्ट भी बनाया गया है। (तिहाड़ जेल की फाइल फोटो))
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फांसी घर से रखा गया है दूरः मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, दोषियों को फांसी घर से दूर रखा गया है। प्रशासन का मानना है कि फांसी घर को देखने से उनमें दहशत और तनाव हो सकता है। सुरक्षाकर्मियों को हिदायत दी गई है कि दोषियों को फांसी से जुड़ी कोई भी जानकारी न दी जाए। (जेल में निर्भया के दोषी, अपना दैनिक काम करते हुए फाइल फोटो)
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क्या है पूरा मामलाः दक्षिणी दिल्ली के मुनिरका बस स्टॉप पर 16-17 दिसंबर 2012 की रात पैरामेडिकल की छात्रा अपने दोस्त को साथ एक प्राइवेट बस में चढ़ी। उस वक्त पहले से ही ड्राइवर सहित 6 लोग बस में सवार थे। किसी बात पर छात्रा के दोस्त और बस के स्टाफ से विवाद हुआ, जिसके बाद चलती बस में छात्रा से गैंगरेप किया गया। (निर्भया की मां आशा देवी और उसके पिता की फाइल तस्वीरें)
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जिसके बाद लोहे की रॉड से क्रूरता की सारी हदें पार कर दी गईं। छात्रा के दोस्त को भी बेरहमी से पीटा गया। बलात्कारियों ने दोनों को महिपालपुर में सड़क किनारे फेंक दिया। पीड़िता का इलाज पहले सफदरजंग अस्पताल में चला, सुधार न होने पर सिंगापुर भेजा गया। घटना के 13वें दिन 29 दिसंबर 2012 को सिंगापुर के माउंट एलिजाबेथ अस्पताल में छात्रा की मौत हो गई। (निर्भया के दोषी मुकेश और अक्षय)

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