नई दिल्ली. अमेरिका में साल 1909 में सोशलिस्ट पार्टी ऑफ अमेरिका ने पहली बार 28 फरवरी को पूरे देश में महिला दिवस के रूप में मनाया गया। इसके बाद साल 1911 में ऑस्ट्रिया , डेनमार्क, जर्मनी और स्विटजरलैंड में लाखों महिलाओं ने नौकरी में भेदभाद को खत्म करने और महिलाओं के लिए समान अधिकार जैसे मुद्दों को लेकर रैली निकाली। साल 1913-14 में रूसी महिलाओं ने शांति स्थापना के लिए फरवरी महीने के अंतिम सप्ताह को महिला दिवस के रूप में मनाया था। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस भले ही पहली बार ऑस्ट्रिया और डेनमार्क जैसे देशों में मनाया गया हो, पर अब इसे दुनियाभर में मनाया जाता है।
पहले अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की थीम सेलिब्रेटिंग द पास्ट, प्लानिंग फॉर द फ्यूचर थी। जबकि इस बार की थीम 'आई एम जनरेशन इक्वालिटी, रियलाइजिंग वोमेन राइट्स है'।
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अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की तारीख कई बार बदली जा चुकी है। अबकी बार यह दिन 8 मार्च को मनाया जएगा।
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महिलाओं के आत्मसम्मान और विश्वास के लिए अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जाता है।
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महिलाओं के उत्थान के बिना कोई भी राष्ट्र प्रगति नहीं कर सकता। इसलिए हर देश और समाज में इस दिन का खास महत्व है।
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हर इंसान की पहली शिक्षक उसकी मां ही होती है। इसलिए हर समाज में महिलाओं को पढ़ाया जाना बेहद जरूरी है।
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महिलाओं के शिक्षित और सक्रिय होने से हर समाज के विकास में तेजी आई है। हर समाज में महिलाओं का शिक्षित होना जरूरी है।
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दुनियाभर में महिलाओं के उत्थान में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस का खासा योगदान है।
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हर व्यक्ति के जीवन में नारियों का खासा महत्व होता है। इसलिए हर व्यक्ति को महिलाओं के महत्व के बारे में बताया जाना जरूरी है।
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एक महिला माता, बहन, बेटी और पत्नी कई किरदारों में समाज के विकास में अहम योगदान देती है। इसलिए पहले महिलाओं का विकास होना जरूरी है।
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