क्या कबाड़ में तब्दील हो जाएगा भारतीय नौसेना का जांबाज 'INS विराट'? 55 साल की सर्विस के बाद हुआ रिटायर

Published : Sep 29, 2020, 03:47 PM ISTUpdated : Sep 30, 2020, 02:00 PM IST

नई दिल्ली. भारतीय नौसेना का जांबाज युद्धपोत कहा जाने वाला INS विराट अपनी 55 साल की सर्विस के बाद रिटायर हो गया है। दुनिया में सबसे ज्यादा वक्त तक सर्विस देने वाले इस वॉरशिप को अब पुर्जा-पुर्जा में तब्दील किए जाने की तैयारी हो चुकी है। आईएनएस विराट रिटायर तब हुआ जब एक तरफ सरकार आधुनिक उपकरणों से लगातार अपनी सैन्य क्षमता में इजाफा कर रही है। इस युद्धपोत का नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में भी दर्ज है।  

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क्या कबाड़ में तब्दील हो जाएगा भारतीय नौसेना का जांबाज 'INS विराट'? 55 साल की सर्विस के बाद हुआ रिटायर

पिछले हफ्ते ही INS Viraat मुंबई स्थित डॉकयार्ड से गुजरात के अलांग कोस्ट पहुंचा था। जहां, 28 सितंबर को 'थैंक्यू विराट' शीर्षक के साथ एक आयोजन किया गया। इस आयोजन में केंद्रीय शिपिंग मंत्री मनसुख मांडविया समेत भारतीय नेवी के तमाम अफसर भी मौजूद थे। 

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एक अंग्रेजी अखबार में आईएनएस विराट को लेकर बताया जा रहा है कि इस दौरान श्री राम ग्रुप के अधिकारियों ने बताया कि गुजरात मैरीटाइम बोर्ड और जीपीसीबी द्वारा एक बार और शिप की पड़ताल की जाएगी और उसके बाद इसे अलग करने यानी खोलने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। बताया जा रहा है कि अगले महीने तक शिप को किनारे ले आया जाएगा और फिर उसके पुर्जे खोलने शुरू कर दिए जाएंगे। रिपोर्ट्स की मानें तो भारतीय नेवी का यह शानदार जहाज अब कबाड़ में तब्दील हो जाएगा। 

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गौरतलब है कि ये शिप 2017 में भारतीय नेवी से रिटायर हो गया था, जिसके बाद इसे बेच दिया गया। इसी साल जुलाई में लगी बोली के दौरान श्री राम ग्रुप ने शिप 38.54 करोड़ रुपए में खरीदा था। भारतीय नेवी में आईएनएस विराट 1987 में शामिल किया गया था। 

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भारत में ये दूसरी वॉरशिप है जिसे डिस्मेंटल किया जा रहा है। इससे पहले 2014 में INS विक्रांत को मुंबई में डिस्मेंटल किया गया था। हालांकि, सबसे पहले आईएनएस विराट को एक म्यूजियम के तौर पर बनाए रखने का भी प्रस्ताव आया था, लेकिन एक्सपर्ट कमेटी की रिपोर्ट में बताया गया कि ये शिप पहले ही लंबे समय तक सेवाएं दे चुका है और इसमें जो मैटेरियल इस्तेमाल किया गया है वो 10-15 साल तक ही बच पाएगा, जिसके बाद नेवी से विचार-विमर्श कर आईएएस विराट को बेचने को फैसला किया गया।

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करीब 226 मीटर लंबे और 49 मीटर चौड़े आईएनएस विराट ने भारतीय नौसेना में शामिल होने के बाद जुलाई 1989 में ऑपरेशन जूपिटर में श्रीलंका में शांति स्थापना के ऑपरेशन में हिस्सा लिया। साल 2001 में भारतीय संसद पर हमले के बाद ऑपरेशन पराक्रम में भी विराट की अहम भूमिका थी। समुद्र के इस महायोद्धा ने दुनिया के 27 चक्कर लगाए। इसमें इसने 1 करोड़ 94 हजार 215 किलोमीटर का सफर तय किया था।
 

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बताया जाता है कि ये जहाज अपने आप में एक छोटे शहर जैसा था। इस पर लाइब्रेरी, जिम, एटीएम, टीवी और वीडियो स्टूडियो, अस्पताल, दांतों के इलाज का सेंटर और मीठे पानी का डिस्टिलेशन प्लांट जैसी सुविधाएं उपलब्ध थीं। ये जहाज जितना गौरवशाली था उतनी ही गौरवशाली इसकी विदाई भी थी। रिटायर किए जाने से पहले 23 जुलाई 2016 को विराट ने अपनी आखिरी यात्रा मुंबई से कोच्चि के बीच की थी। अपने पूरे कार्यकाल में यह 2250 दिनों तक समुद्र की लहरों से खेलता रहा था। 

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हिंदुस्तान के पराक्रम का प्रतीक रहे 'INS विराट' को लेकर बताया जाता है कि इस पर सी हैरियर लड़ाकू विमान तैनात रहते थे। यह जहाज एंटी सबमरीन एयरक्राफ्ट से भी लैस था। इस पर करीब 15 सौ नौसैनिक हर समय तैनात रहते थे। इसने देश की पूर्वी और पश्चिमी समुद्री सीमा में अपनी सेवा दी। विराट का वजन कुछ 28,500 टन होगा। इसमें 76000 शाफ्ट हॉर्सपावर के स्टीम इंजन लगे हुए हैं। इस जहाज पर 10-12 फाइटर प्लेन और 7-8 हैलीकॉप्टर रहते हैं।

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