Published : Dec 16, 2019, 04:33 PM ISTUpdated : Dec 16, 2019, 05:01 PM IST
नई दिल्ली. नागरिकता कानून के विरोध में जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी में तीन दिनों तक विरोध प्रदर्शन किया। रविवार को प्रदर्शन हिंसक हो गया। छात्रों का आरोप है कि पुलिस ने लाईब्रेरी और हॉस्टल में घुसकर छात्र-छात्राओं को मारा। जामिया के बाद देश की दूसरी यूनिवर्सिटी में भी विरोध प्रदर्शन तेज हो गया है। नदवा कॉलेज (लखनऊ), जाधवपुर यूनिवर्सिटी (पश्चिम बंगाल), मौलाना आजाद नेशनल उर्दू यूनिवर्सिटी (हैदराबाद), आईआईटी मद्रास (चेन्नई), पांडिचेरी यूनिवर्सिटी (पुडुचेरी), एएमयू (अलीगढ़), बीएचयू (वाराणसी), टीस (मुंबई), आईआाईटी मुंबई में विरोध प्रदर्शन हो रहा है।
वीसी- बच्चों को डराने की कोशिश : जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी की वीसी ने कहा कि बहुत अफवाहें उड़ रही हैं, जिसमें से एक है कि एक बच्चे की मौत हुई है। लेकिन ऐसा नहीं है। किसी बच्चे की मौत नहीं हुई है। बाहर कुछ हुआ तो जामिया का नाम लिया गया। कैंपस सिक्योर होना चाहिए। जामिया को टारगेट न किया जाए।
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17 घंटे में कैसे हुआ हिंसक प्रदर्शन : रविवार की दोपहर 12.0 बजे, जमिया कैंपस के बाहर भीड़ जुटी। 2.30 बजे, शांतिपूर्ण प्रदर्शन हो रहा था। 3.30 बजे, अचानक भीड़ हिंसक हो गई। शाम 5 बजे, 3 डीटीसी बसों में आग लगाई गई। 7 बजे, दिल्ली पुलिस जामिया कैंपस में घुसी। रात 8.30 बजे, डेढ़ घंटे तक हिंसा की तस्वीरें आती रहीं। रात 9 बजे, पुलिस के खिलाफ हेड क्वार्टर के सामने प्रदर्शन। रात 10 बजे के बाद देर रात छात्रों ने विरोध प्रदर्शन किया। सुबह 5 बजे, 50 छात्र पुलिस स्टेशन से रिहा किया गए। फिर सुबह होते ही छात्र जामिया में पहुंचे अर्धनग्न होकर विरोध प्रदर्शन किया।
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200 स्टूडेंट्स घायल हुए : उन्होंने कहा, "एक अफवाह चल रही है कि जामिया के 2 स्टूडेंट की मौत हुई है। हम इसका खंडन करते हैं। हमारे किसी स्टूडेंट की मौत नहीं हुई है। इस प्रदर्शन में करीब 200 स्टूडेंट्स घायल हुए हैं। आप संपत्ति का पुनर्निर्माण कर सकते हैं, लेकिन आप उन चीजों के लिए क्षतिपूर्ति नहीं कर सकते हैं जिस स्थिति से हमारे स्टूडेंट्स गुजरे हैं। हम उच्च स्तरीय जांच की मांग करते हैं।
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पुलिस ने कहा, बोतल से बस की आग बुझाई : डीसीपी साउथ ईस्ट दिल्ली चिन्मय बिस्वाल ने कहा, "मैं जामिया के छात्रों से अपील करता हूं, कि जब असामाजिक तत्व उनके विरोध प्रदर्शन में शामिल हों तो विश्वविद्यालय की छवि प्रभावित होगी। विरोध शांतिपूर्ण और अनुशासित होना चाहिए।"
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किसने जलाई बस : बस जलाने के आरोप पर उन्होंने कहा, "यह पूरी तरह से झूठ है। जब भीड़ आग लगा रही थी, तो पुलिस ने स्थानीय निवासियों से पानी मांग कर आग बुझाने का प्रयास किया। जहां तक उस बस का सवाल है, पुलिस ने बोतल से पानी डालकर आग बुझाने की कोशिश की।"
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