करगिल युद्ध: एक चरवाहे ने खोली थी पाकिस्तान की पोल; भारत ने 60 दिन में चटा दी थी धूल...जानिए 10 FACT

Published : Jul 26, 2020, 09:13 AM IST

नई दिल्ली. 21 साल पहले 1999 में भारत-पाकिस्तान के बीच लड़ा गया कारगिल युद्ध आज भी लोगों के जहन में है। देश की रक्षा के लिए भारत के जिन वीर सपूतों ने अपनी शहादत दी है, वो आज भी लोगों की यादों में जिंदा हैं और उनकी वीरता के किस्से सुनकर बच्चे बड़े होते हैं। आज 26 जुलाई है। इसी दिन 1999 में भारतीय सेना ने पाकिस्तान के नापाक मंसूबों को ध्वस्त करते हुए कारगिल युद्ध में धूल चटा दी थी। तभी से हर साल इस दिन को कारगिल विजय दिवस के रूप में मनाया जाता है। पाकिस्तान के धोखे के साथ शुरू हुआ ये युद्ध 60 दिन चला था। भारतीय जवानों के पराक्रम और बहादुरी के सामने पाकिस्तान ने आखिरी में घुटने टेक दिए थे। ऐसे में इससे जुड़ी 10 खास बातें बता रहे हैं...

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करगिल युद्ध: एक चरवाहे ने खोली थी पाकिस्तान की पोल; भारत ने 60 दिन में चटा दी थी धूल...जानिए 10 FACT

एलओसी से पाकिस्तानी सैनिकों को खदेड़ने के लिए कारगिल में चलाए गए इस अभियान को ऑपरेशन विजय नाम दिया गया। भारतीय सीमा में दुश्मनों की घुसपैठ के बारे में चरवाहों ने खबर की थी।

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भारत-पाकिस्तान के बीच यह युद्ध करीब 60 दिनों तक चला। मई में शुरू हुई जंग में 26 जुलाई को भारतीय सेना ने जीत हासिल की।

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पाक सैनिक ऊंची पहाड़ियों पर बैठे थे, इस वजह से भारतीय सैनिकों को काफी मुश्किलों का सामना भी करना पड़ा। भारतीय जवानों ने रात में मुश्किल चढ़ाई की ताकि दुश्मन की नजर न पड़े।
 

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इस युद्ध में जीत हासिल करने में भारतीय वायुसेना की बड़ी भूमिका रही। वायुसेना ने पाक सैनिकों पर 32000 फीट की ऊंचाई से बम बरसाए। मिग—29, मिग—29 और मिराज—2000 विमानों का इस्तेमाल किया गया। इस दौरान पाकिस्तान ने हमारे दो लड़ाकू विमान मार गिराए थे जबकि एक क्रैश हो गया था।

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नौसेना की भूमिका भी अहम रही। नौसेना ने ऑपरेशन तलवार चलाया। इसके तहत कराची समेत कई पाक बंदरगाहों के रास्ते रोक दिए गए ताकि वह कारगिल युद्ध के जरूरी तेल व ईंधन की सप्लाई न कर सके। साथ ही भारत ने अरब सागर में पाक के व्यापार रूट को भी अवरुद्ध कर दिया था।

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इस युद्ध में 527 भारतीय जवान शहीद हुए और 1363 घायल हुए। पाकिस्तान के भी करीब 3000 सैनिक मारे गए। मगर, पाकिस्तान ने इसे स्वीकार नहीं किया। उसका दावा है कि उसके सिर्फ 357 सैनिक ही मारे गए हैं।

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इस युद्ध में बोफोर्स तोपों ने पाकिस्तानी सेना के छक्के छुड़ा दिए। इस तोप के खरीददारी पर खूब विवाद हुआ था, लेकिन ये कारगिल में बहुत काम आई।

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तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने 14 जुलाई को ही युद्ध की घोषणा कर दी थी। मगर, आधिकारिक तौर पर 26 जुलाई को कारगिल विजय दिवस की घोषणा हुई।

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कारगिल युद्ध के दौरान करीब 2 लाख 50 हजार गोले दागे गए। वहीं 5,000 बम फायर करने के लिए 300 से ज्यादा मोर्टार, तोपों और रॉकेट का इस्तेमाल किया गया। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद ऐसा पहला युद्ध था, जिसमें दुश्मन देश की सेना पर इतनी बड़ी संख्या में गोले दागे गए थे।
 

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तत्कालीन पीएम वाजपेयी ने पाक प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को खूब लताड़ लगाई थी। उन्होंने कहा था कि मेरा लाहौर बुलाकर स्वागत करते हैं और उसके बाद कारगिल का युद्ध छेड़ देते हैं यह बहुत बुरा व्यवहार है।

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