जानिए कहां और कैसे जी रहा 6वां दोषी, जिसने पहले निर्भया को बस में चढ़ाया, फिर रेप किया और घुसा दी रॉड

Published : Mar 20, 2020, 04:32 PM ISTUpdated : Mar 20, 2020, 08:32 PM IST

नई दिल्ली. 16 दिसंबर 2012 की रात को चलती बस में निर्भया से दरिंदगी करने वाले दोषियों को उनके किए की सजा दे दी गई। कोर्ट द्वारा जारी किए गए डेथ वारंट के बाद 20 मार्च शुक्रवार की सुबह 5.30 बजे फांसी पर लटका दिया गया। जिसके बाद से पूरे देश में खुशी का माहौल है। हालांकि निर्भया के साथ खौफनाक वारदात को अंजाम देने वाले छह दरिंदों में एक नाबालिग भी शामिल था। एक ओर जहां निर्भया के 4 दोषियों को फांसी पर लटकाया दिया गया है। वहीं, दूसरी तरफ देश के किसी न किसी कोने में रह रहा छठवा दोषी इस वक्त अपने साथियों की मौत को देखकर सिहर गया होगा। ऐसे में हम बताते है आपको निर्भया के छठे नाबालिग आरोपी के बारे में जो इस समय कहां रह रहा है और कैसे जी रहा है। 

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जानिए कहां और कैसे जी रहा 6वां दोषी, जिसने पहले निर्भया को बस में चढ़ाया, फिर रेप किया और घुसा दी रॉड
यह जानकर आप हैरान रह जाएंगे कि वह वारदात में शामिल बस चालक राम सिंह के लिए काम करता था। चालक के पास उसके 8000 रुपये बकाया थे और वह लगातार अपने पैसे मांग रहा था। वारदात की रात भी वह राम सिंह से अपने पैसे लेने के लिए गया था और इस जघन्य अपराध का हिस्सा हो गया। खबरों के अनुसार निर्भया के साथ सबसे अधिक क्रूरता इसी नाबालिग ने की थी।
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निर्भया के साथ दरिंदगी करने वाले दोषियों ने पुलिसिया पूछताछ में सामने आया था कि इस दोषी ने ही निर्भया और उसके दोस्त से बस में बैठने का आग्रह किया था। जिसके बाद निर्भया और उसके दोस्त बस में सवार हुए थे। इस पूरे घटनाक्रम के बाद बस में सवार 6 दोषियों ने दरिंदगी की घटना को अंजाम दिया था।
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इस वारदात से पहले यह नाबालिग दिल्ली से 240 किलोमीटर दूर एक गांव में रहता था। महज 11 साल की उम्र में वह अपना घर छोड़कर भाग गया था। दिल्ली आते ही सबसे पहले उसकी मुलाकात राम सिंह से हुई थी। रामसिंह ने उसे बस की सफाई के काम पर रख लिया और यहीं से उसकी नौकरी शुरू हो गई। राम सिंह ने निर्भया कांड के बाद तिहाड़ जिले में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी।
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निर्भया के साथ हुई दरिंदगी में शामिल यह दोषी अब 24 साल का हो चुका है। कुछ सालों तक बाल सुधार गृह में रहने के बाद उसे दिसंबर 2016 में रिहा कर दिया गया। फिलहाल वह दक्षिण भारत के किसी राज्य में कुक का काम कर रहा है। उसने दिल्ली में प्रेक्षणगृह में खाना पकाने का काम सीखा था। एक एनजीओ के अधिकारी ने बताया कि उसने अपना नया नाम रख लिया है।
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एनजीओ के अधिकारी ने बताया कि उसकी असली पहचान और पुरानी जिंदगी की असलियत को छिपाने के लिए उसे दिल्ली एनसीआर से बहुत दूर भेज दिया गया है, जिससे लोग उसका पता न लगा सकें और वह एक नई जिंदगी शुरू कर सके। जहां वह काम करता है वहां भी लोगों को उसके वास्तविक नाम के बारे में नहीं पता और न ही कोई उसकी पिछली जिंदगी के बारे में जानता है।
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निर्भया का यह छठा आरोपी 16 दिसंबर, 2012 की उस काली रात के कुछ महीने बाद ही 18 साल का हो जाता, लेकिन कानूनी रूप से घटना के वक्त नाबालिग होने के कारण कोर्ट ने मौजूदा कानून के आधार पर उसे सजा देने की बजाए सुधार गृह में भेजने का फैसला सुनाया था। जिसके बाद वह 2 साल तक सुधार गृह में रहा। दोषियों में से यह एकमात्र ऐसा शख्स है जिसका चेहरा आजतक देश की जनता से छुपा हुआ है। (निर्भया का मुख्य दोषी रामसिंह, जिसने फांसी लगा ली थी।)
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16 दिसंबर 2012 को हुए निर्भया कांड ने पूरे देश को झंकझोर कर रख दिया था। 23 वर्षीय निर्भया के साथ चलती बस में गैंगरेप किया गया था और उसकी बुरी तरफ पिटाई की थी। दरिंदगी की हदों को पार करते हुए दोषियों ने निर्भया के प्राइवेट पार्ट में लोहे की रॉड डाल दी थी। जिससे उसकी आंत बूरी तरह से जख्मी हो गई बाद में अस्पताल में निर्भया की मौत हो गई थी। (फाइल फोटो- दोषियों ने इसी बस में दरिंदगी की घटना को दिया था अंजाम)
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इसके बाद दिल्ली पुलिस ने मामले में 6 लोगों को गिरफ्तार किया था, जिनमें से एक नाबालिग था। नाबालिग को किशोर अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया गया, जबकि राम सिंह ने तिहाड़ जेल में फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली थी। इसके अलावा बाकी 4 दोषियों को फांसी की सजा सुनाई गई है। (फाइल फोटो- निर्भया के चारों दोषी, जिन्हें 1 फरवरी को फांसी दी जानी है।)
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अवनींद्र पांडेय : निर्भया मामले में अवनींद्र पांडेय इकलौते गवाह थे। उन्हीं की गवाही ने निर्भया को न्याय दिलाने में अहम भूमिका निभाई। अवनींद्र घटना के वक्त निर्भया के साथ बस में मौजूद थे।चलती बस में जब निर्भया के साथ दरिंदगी हुई तब अवनींद्र को भी बुरी तरह पीटा गया था। (फोटोः निर्भया का दोस्त, अपने किसी परिचित के साथ)
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कैसे शुरू हुई घटनाः 16 दिसंबर की रात निर्भया अपने दोस्त के साथ साकेत स्थित सलेक्ट सिटी मॉल से फिल्म देखने के बाद रात 9 बजे मुनिरका पहुंचीं। जहां से वह दोषियों की बस में द्वारका जाने के लिए सवार हुई। सभी आरोपी रविदास कैंप आरके पुरम में पार्टी करके बस लेकर निकले थे।
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इसके बाद उन्हें निर्भया के साथ बस से बाहर फेंक दिया गया। निर्भया के दोस्त की गवाही को निचली अदालत, दिल्ली हाई कोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट ने सही माना और फांसी की सजा सुनाई।
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कुछ इस तरह हुई थी दरिंदगीः निर्भया से दरिंदगी करने वाले आरोपियों ने चेहरे पर दांत से काटा था। छाती और गले पर नाखून से काटने के निशान मिले थे। इतना ही नहीं पेट पर नुकीले हथियार से गंभीर चोट लगा हुआ था। वहीं, इलाज कर रहे डॉक्टरों को प्राइवेट पार्ट्स पर तेज चोट के निशान लोहे की रॉड शरीर के अंदर डाले जाने के जख्म मिले थे। जिसके कारण बच्चेदानी का कुछ हिस्सा प्रभावित हुआ था। वहीं, रॉड की वजह से छोटी आंत पूरी तरह से बाहर आ गई थी। जबकि बड़ी आंत का भी काफी हिस्सा प्रभावित हुआ था। (फाइल फोटोः निर्भया की मां आशा देवी)
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निर्भया केस की जिम्मेदारी डीसीपी छाया शर्मा के पास थी। घटना के बाद वह तीन दिन तक घर नहीं गईं। छाया शर्मा और उनकी पूरी टीम गुनाहगारों को पकड़ने के लिए जी जान से जुटी हुई थी। क्योंकि उन्हें पता था कि थोड़ी सी भी चूक हुई तो मामला हाथ से फिसल जाएगा और अपराधियों को मौका मिल जाएगा। दोषियों को पकड़ने के लिए छाया शर्मा ने 100 पुलिसकर्मियों की अगल-अलग टीमें बनाई गईं। केस के बाद छाया का ट्रांसफर मिजोरम कर दिया गया।

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