नई दिल्ली. निर्भया मामले में कोर्ट ने मंगलवार को डेथ वारंट जारी कर दिया। तिहाड़ जेल में बंद चारों दोषियों को 22 जनवरी को सुबह 7 बजे फांसी दी जाएगी। हालांकि, इस दौरान दोषियों के पास 14 दिन में दो कानूनी विकल्प मौजूद रहेंगे। फांसी की तारीख सुनते ही दोषी खौफ में आ गए। हालांकि, उन्हें शुरू में लग रहा था कि यह तारीख सुनवाई के लिए तय की गई है।
अक्षय ने कहा कि 22 जनवरी से पहले क्यूरेटिव पिटीशन दाखिल कर दूंगा। वहीं, दूसरे दोषी पवन ने कहा, अब 3 नंबर जेल में चलने की तैयारी कर दो। फांसी घर 3 नंबर जेल में ही है।
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चारों दोषी पवन, विनय, अक्षय और मुकेश आम तौर पर शाम 7 बजे तक खाना खा लेते हैं। लेकिन फांसी की तारीख सुनते ही देर रात उन्होंने खाना नहीं खाया। हालांकि, उसे अपनी कोठरी में रख लिया। डेथ वारंट जारी होने के बाद चारों दोषियों की कोठरी की तलाशी ली गई।
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अब हर दोषी की निगरानी में तीन सुरक्षाकर्मी तैनात किए जाएंगे। 24 घंटे निगरानी होगी। दो बार मेडिकल जांच होगी। जेल सूत्रों के मुताबिक, डेथ वारंट जारी होने के बाद कैदियों से काम कराना बंद कर दिया जाता है। 24 घंटे उन पर कड़ी निगरानी रखी जाती है। साथ ही दिन में दो बार मेडिकल चेकअप करवाया जाता है।
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डेथ वारंट जारी होने के बाद सभी दोषियों को अलग अलग सेल में रखा जाता है। ये फांसी घर के पास ही होते हैं। फांसी की जानकारी करीब 15 दिन पहले इसलिए दी जाती है, जिससे वे अपने परिवार से मिल सकें।
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इस दौरान कैदी की इच्छा भी पूछी जाती है, जिससे वे अपने घर वालों से मिल सकें या फिर अच्छे खाने की मांग कर सकें। उनके नाम संपत्ति या पैसे किसी संबंधी के नाम किए जाएं।
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दक्षिण दिल्ली में चलती बस में 16-17 दिसंबर, 2012 की रात में 23 साल की निर्भया से 6 लोगों ने बर्बरता पूर्वक सामूहिक बलात्कार किया था और उसे बुरी तरह जख्मी हालत में सड़क पर फेंक दिया था। निर्भया की 29 दिसंबर, 2012 को सिंगापुर में माउन्ट एलिजाबेथ अस्पताल में मौत हो गई थी। इस घटना को सात साल बीत गए।
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