Published : Jan 15, 2020, 01:19 PM ISTUpdated : Jan 21, 2020, 10:50 AM IST
नई दिल्ली. निर्भया केस में सुप्रीम कोर्ट ने दोषी विनय और मुकेश की क्यूरेटिव पिटीशन को खारिज कर दिया, जिसके बाद मुकेश ने राष्ट्रपति के पास दया याचिका लगाई। अभी दो दोषियों पवन और अक्षय ने अभी क्यूरेटिव पिटीशन भी नहीं लगाई है। इस बीच दोषी मुकेश ने हाई कोर्ट में भी डेथ वॉरंट को खारिज करने की याचिका लगाई है। मुकेश ने कहा कि दया याचिका राष्ट्रपति के पास लंबित है इसलिए डेथ वॉरंट को रद्द किया जाए। निर्भया के दोषियों को लेकर एक दिलचस्प खबर यह है कि चारों ने जेल में पढ़ाई करने की कोशिश की। दोषियों ने हत्याकांड के तीन साल बाद जेल में पढ़ाई शुरू की। दोषी विनय ने 2015 में बीए में दाखिला लिया। 2016 में मुकेश, पवन और अक्षय ने ओपन स्कूल में दसवीं में दाखिला लिया। पढ़ाई के बाद तीनों ने परीक्षा भी दी, लेकिन पास नहीं हो पाए। उसके बाद सभी ने पढ़ाई छोड़ दी। जेल सूत्रों के मुताबिक विनय ने पेंटिंग में हाथ आजमाया था, लेकिन उसमें भी कामयाब नहीं हो पाया।
दोषी विनय जिम ट्रेनर का काम करता था। उसके पिता को एक आंख से ठीक से दिखाई नहीं देता है। वह ठेके पर एयरपोर्ट पर काम करते हैं। विनय की मां बीमार रहती है।
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विनय ने पिता से की मुलाकात : डेथ वॉरंट जारी होने के बाद निर्भया के दोषी अपने परिजन से मिलने लगे हैं। मंगलवार को दोषी विनय ने अपने पिता से मुलाकात की। पिता को देखते ही विनय रोने लगा। बेटे को देख पिता भी रोने लगे।
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विनय ने कहा, पापा एक बार गले तो लगा लो : पिता को देख विनय ने कहा, पापा एक बार गले तो लगा लो। आधे घंटे तक चली मुलाकात के दौरान विनय की आंखों के आगे अंधेरा छाने लगा। वह कई बार लड़खड़ाया भी।
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20 जनवरी को होगी आखिरी मुलाकात : मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 20 जनवरी को निर्भया के चारों दोषी अपने परिवार से आखिरी बार मुलाकात करेंगे। जेल मैनुअल के मुताबिक जेल में बंद कैदियों को एक हफ्ते में दो बार परिवार के सदस्यों से मिलने की इजाजत दी जाती है।
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बलात्कारियों ने निर्भया के प्राइवेट पार्ट में डाल दी थी रॉड : दक्षिणी दिल्ली के मुनिरका बस स्टॉप पर 16-17 दिसंबर 2012 की रात पैरामेडिकल की छात्रा अपने दोस्त को साथ एक प्राइवेट बस में चढ़ी। उस वक्त पहले से ही ड्राइवर सहित 6 लोग बस में सवार थे। किसी बात पर छात्रा के दोस्त और बस के स्टाफ से विवाद हुआ, जिसके बाद चलती बस में छात्रा से गैंगरेप किया गया। लोहे की रॉड से क्रूरता की सारी हदें पार कर दी गईं। छात्रा के दोस्त को भी बेरहमी से पीटा गया।
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13 दिन बाद निर्भया ने तोड़ दिया था दम : बलात्कारियों ने दोनों को महिपालपुर में सड़क किनारे फेंक दिया गया। पीड़िता का इलाज पहले सफदरजंग अस्पताल में चला, सुधार न होने पर सिंगापुर भेजा गया। घटना के 13वें दिन 29 दिसंबर 2012 को सिंगापुर के माउंट एलिजाबेथ अस्पताल में छात्रा की मौत हो गई।
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