Published : Jan 25, 2020, 04:03 PM ISTUpdated : Jan 28, 2020, 12:43 PM IST
नई दिल्ली. निर्भया केस में चारों दोषियों को 1 फरवरी की सुबह 6 बजे फांसी दी जाएगी। हालांकि अभी तीन दोषी के पास दया याचिका का विकल्प बचा हुआ है, ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि शायद एक बार फिर से फांसी की तारीख टल जाए। इससे पहले दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने 22 जनवरी को फांसी देने की तारीख तय की थी, लेकिन उसे टाल दिया गया। ऐसे में निर्भया के दोषी मुकेश के बारे में बताते हैं, जिसने एक इंटरव्यू में कहा था कि अगर निर्भया चुप रहती तो उसकी जान बच जाती।
दोषी मुकेश, मुख्य दोषी राम सिंह का भाई है। वह अपने बड़े भाई के साथ दक्षिण दिल्ली के रविदास झुग्गी झोपड़ी कॉलोनी में रहता था। वह कभी-कभी बस चलाने और साफ-सफाई का काम भी करता था।
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मुकेश सिंह को निर्भया और उसके दोस्त को लोहे की रॉड से पीटने का दोषी पाया गया था। कोर्ट में मुकेश ने कहा था कि घटना की रात वह बस चला रहा था और चार आरोपियो ने निर्भया के साथ रेप किया और उसके दोस्त की पिटाई की। लेकिन कोर्ट ने मुकेश की बात नहीं मानी और उसे मौत की सजा सुनाई।
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दोषी मुकेश ने कहा था, मैंने 15-20 मिनट गाड़ी चलाई थी। लाइटें बंद कर दी थीं। मेरा भाई मेन था। उसी ने निर्भया के दोस्त को मारा।
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मुकेश ने कहा था कि वह लड़की और उसका दोस्त बिना कुछ कहे ऐसा होने देते तो हमारा गैंग उन्हें मारता-पीटता नहीं। लड़की को घटना का विरोध नहीं करना चाहिए था। यदि वह विरोध नहीं करती तो हम घटना के बाद उसे उसके घर तक छोड़ते और केवल उसके दोस्त को ही मारते।
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दोषी मुकेश ने कहा था कि अगर रात में लड़कियां निकलेंगी तो ऐसी घटनाएं तो होंगी ही। रेप के लिए आदमी से ज्यादा वह जिम्मेदार होगी।
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लड़की चिल्लाती रही। बचाओ-बचाओ। हम उसे मारपीट कर पीछे ले गए। हम आ जा रहे थे। बारी-बारी से। लड़की विरोध नहीं करती तो उसकी जान नहीं जाती।
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