Published : Dec 10, 2019, 10:38 AM ISTUpdated : Dec 10, 2019, 10:58 AM IST
गुवाहाटी. देश की संसद द्वारा नागरिकता संशोधन विधेयक के पारित होने के बाद विरोध तेज हो गया है। पूर्वात्तर छात्र संगठनों की तरफ से संयुक्त रूप से बुलाया गया 12 घंटे का बंद मंगलवार सुबह पांच बजे शुरू हो गया। हाथ में मशालें लिए लोगों विरोध प्रदर्शन और रोड मार्च की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हैं। वहीं सोशल मीडिया पर किसी के बाप का हिंदुस्तान थोड़ी है और बॉयकाट सिटिजन बिल जैसे हैशटैग ट्रेंड कर रहे हैं..........
नॉर्थईस्ट में 12 घंटे के बंद का ऐलान किया गया है जिसमें स्टूडेंट हाथ में बांस की मशाले लेकर सड़कों पर मार्च कर रहे हैं। महिलाएं भी इसमें पीछे नहीं हैं।
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असम में लोग जमीन पर लेटकर बिल के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कर रहे हैं।
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पूर्वात्तर छात्र संगठन एनईएसओ ने इस विधेयक के खिलाफ शाम चार बजे तक बंद का आह्वान किया है। कई अन्य संगठनों और राजनीतिक दलों ने भी इसे अपना समर्थन दिया है।
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असम के डिब्रूगढ़ में महिलाएं सुबह पांच बजे से मासूम बच्चों को गोद में लेकर जमीन पर बैठ गई और बिल के खिलाफ विरोध जताया।
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गृह मंत्री अमित शाह के मणिपुर को इनर लाइन परमिट (आईएलपी) के दायरे में लाने की बात कहने के बाद राज्य में आंदोलन का नेतृत्व कर रहे द मणिपुर पीपल अगेंस्ट कैब (मैनपैक) ने सोमवार के अपने बंद को स्थगित करने की घोषणा की।
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नागरिकता (संशोधन) विधेयक (कैब) में अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान से धार्मिक प्रताड़ना के कारण भारत आए हिन्दू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदायों के लोगों को भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन करने का पात्र बनाने का प्रावधान है।
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लोकसभा में विधेयक पर चर्चा के बाद इसके पक्ष में सोमवार को 311 और विरोध में 80 मत पड़े, जिसके बाद इसे निचले सदन की मंजूरी मिल गई। इस विधेयक के खिलाफ क्षेत्र के विभिन्न संगठन लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं।
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कांग्रेस, एआईयूडीएफ, ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन, कृषक मुक्ति संग्राम समिति, ऑल अरुणाचल प्रदेश स्टूडेंट्स यूनियन, खासी स्टूडेंट्स यूनियन और नगा स्टूडेंट्स फेडरेशन जैसे संगठन बंद का समर्थन करने के लिए एनईएसओ के साथ हैं।
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गुवाहाटी विश्वविद्यालय और डिब्रुगढ़ विश्वविद्यालय ने कल होने वाली अपनी सभी परीक्षाएं टाल दी हैं।
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बिल के विरोध में पूरे पूर्वोत्तर में लोग सड़कों पर उतर आए हैं लोग हाथों में आग की मशाल लिए मार्च कर रहे हैं।
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यह विधेयक अरुणाचल प्रदेश, नगालैंड और मिजोरम में लागू नहीं होगा जहां आईएलपी व्यवस्था है इसके साथ ही संविधान की छठी अनुसूची के तहत शासित होने वाले असम, मेघालय और त्रिपुरा के जनजातीय क्षेत्र भी इसके दायरे से बाहर होंगे।
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सैकड़ों स्टूडेंट और महिलाएं हाथों में बोर्ड लेकर बिल का विरोध जता रहे हैं।
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ये तस्वीरें सोशल मीडिया पर छाई हुई हैं।
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