नई दिल्ली. दिल्ली में पिछले 20 दिनों से चल रहा किसान आंदोलन सरकार व यात्रियों के लिए भले ही परेशानी का सबब हो लेकिन कुछ ऐसे भी लोग हैं जिनके लिए खुशियां लेकर आया है। ये लोग हैं फुटपाथ पर भीख मांग कर गुजारा करने वाले बेघर-बेसहारा बच्चे। किसान आंदोलन इन बच्चों के लिए खुशियां लेकर आया है। पेट भरने के लिए दूसरों की इमदाद पर आश्रित रहने वाले इन बेसहारा बच्चों को किसानों के बीच पेट भर खाना मिल रहा है।
8 साल का बेघर राजू अपना पेट भरने के लिए भीख मांगने को मजबूर है। फुटपाथ पर रहने वाले राजू ही नहीं उसी के जैसे कई और बच्चे हैं जो नहीं चाहते हैं किसानों का यह आंदोलन खत्म हो। इन बच्चों ने बताया कि जब से आंदोलन शुरू हुआ है, हमें मुफ्त में खाना मिल रहा है। इसलिए हमें ट्रैफिक पर खड़े होकर अब भीख नहीं मांगना पड़ रहा है।
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सिंधु बॉर्डर पहुंचे इन बेघर-बेसहारा बच्चों को यहां मुफ्त में खाना मिल रहा है। यही नहीं, इस ठंड के मौसम में सोने की अच्छी जगह भी मिल रही है। इन बेसहारा बच्चों की खुशी का ठिकाना नहीं है क्योंकि यहां उन्हें मुफ्त भोजन और रहने की जगह मिल रही है।
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इन बच्चों ने बताया कि उन्होंने कभी इस तरह का खाना पहले कभी नहीं खाया था। कोरोना काल दाने-दाने को मोहताज हुए इन बेसहारा बच्चों के लिए किसान आंदोलन खुशियों की बहार लेकर आया है। किसान उन्हें खाना तो खिलाते हैं बचा हुआ खाना घर ले जाने के लिए भी दे देते हैं।
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बच्चों ने बताया कि उन्हें नाश्ते में अचार के साथ आलू, मूली और गोभी का पराठा मिलता है। साथ में चाय भी। इसके बाद लंच में दाल, कढ़ी, रोटी और चावल के साथ पकौड़ा मिलता है। रात के खाने में रोटी, सब्जी मिलती है।
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तीन कृषि कानूनों को खत्म करने की मांग को लेकर पिछले 20 दिनों से दिल्ली की सीमाओं के करीब किसान डटे हुए हैं। सरकार के साथ किसान नेताओं की कई दौर की बातचीत हो चुकी है लेकिन मुद्दा अभी सुलझा नहीं है। किसानों ने कहा कि वह 6 महीने का राशन-पानी लेकर यहां आए हैं सरकार से अपनी बात मनवाकर रहेंगे।
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