Published : Jun 30, 2020, 01:12 PM ISTUpdated : Feb 05, 2022, 03:22 PM IST
नई दिल्ली. भारत में चाइनीज कंपनी टिक टॉक को बैन कर दिया गया है। इससे चीन को बड़ा झटका लगा है। बैन के कुछ घंटों बाद ही टिक टॉक अधिकारियों के तरफ से सफाई देते हुए बयान भी आने लगे। इस बीच जानना जरूरी हो जाता है कि आखिर टिक टॉक को बैन करने से चीन को कितना नुकसान होगा? बता दें कि सरकार ने 59 चीनी ऐप को बैन करने का फैसला लिया है। बैन किए गए ऐप में मशहूर टिक-टॉक (Tik Tok Ban) ऐप भी शामिल है। इसके अलावा यूसी ब्राउजर, कैम स्कैनर जैसे और भी बहुत फेमस ऐप शामिल हैं। इन ऐप्स को सरकार ने देश के लिए खतरा माना है।
भारत में टिक टॉक कितना लोकप्रिय था, इसका अंदाजा इसी से लगा सकते हैं कि साल 2018 की तुलना में 2019 में भारतीय यूजर्स 6 गुना ज्यादा वक्त बिताने लगे।
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एक रिसर्च के मुताबिक, साल 2019 में भारतीय यूजर्स ने टिक टॉक पर 5.5 अरब घंटे समय टिक टॉक पर बिताया। मोबाइल और डेटा ऐनालिटिक्स फर्म App Annie के मुताबिक, ऐंडॉयड यूजर्स ने साल 2018 में कुल 900 मिलियन (9 करोड़) घंटे ही टिक-टॉक पर बिताए थे।
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भारत में टिक टॉक के यूजर्स में भी जोरदार बढ़ोतरी हुई। दिसंबर 2019 में टिक टॉक के मंथली एक्टिव यूजर्स की संख्या 81 मिलियन हो गई। दिसंबर 2018 के मुकाबले यह 90% की ग्रोथ है।
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ग्रोथ के मामले में टिक टॉक ने फेसबुक को भी पीछे छोड़ दिया। साल 2019 में फेसबुक पर भारतीयों ने 25.5 अरब घंटे बिताए। यह पिछले साल के मुकाबले सिर्फ 15% की ग्रोथ है। वहीं मंथली एक्टिव यूजर्स की संख्या में भी सिर्फ 15% की ग्रोथ हुई। कुल समय के मामले में टिक-टॉक भले ही फेसबुक से पीछे हो, लेकिन एक साल पहले के मुकाबले हुई बढ़ोतरी में यह फेसबुक से कहीं आगे निकल जाता है।
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बाइट डांस की स्वामित्व वाले टिक टॉक ऐप ने इस वित्त वर्ष की तिमाही जुलाई-सितंबर में भारत से 100 करोड़ राजस्व का लक्ष्य रखा है। रिपोर्ट के मुताबिक, टिक टॉक ने 31 दिसंबर 2019 को खत्म हुई तिमाही में 23 से 25 करोड़ रुपए का राजस्व कमाया।
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