इस वैज्ञानिक को सालों तक कहा गया गद्दार, जाना पड़ा था जेल... बरी हुए तो मिला 1.30 करोड़ का मुआवजा

Published : Aug 14, 2020, 11:20 AM ISTUpdated : Aug 14, 2020, 11:24 AM IST

तिरुअनंतपुरम. कहते हैं कि सत्य परेशान हो सकता है, लेकिन पराजित नहीं। यह कहावत भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के पूर्व वैज्ञानिक नांबी नारायणन पर एकदम सटीक बैठती है। नांबी नारायणन को 26 साल पहले गद्दार मान लिया गया था। वे जेल भी गए। लेकिन लंबी कानूनी लड़ाई के बाद उन्हें बरी कर दिया गया। इतना ही नहीं केरल सरकार ने मंगलवार को नांबी नारायणन को इस मामले के निपटारे के लिए 1.30 करोड़ रुपए का अतिरिक्त मुआवजा दिया।

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इस वैज्ञानिक को सालों तक कहा गया गद्दार, जाना पड़ा था जेल... बरी हुए तो मिला 1.30 करोड़ का मुआवजा

नांबी नारायणन देश के जाने माने वैज्ञानिक थे। उन्होंने सतीश धवन और भारत के पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम जैसे वैज्ञानिकों के साथ काम किया। नांबी को पिछले साल भारत सरकार ने तीसरे सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार पद्म भूषण से सम्मानित किया था। 

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नांबी का जन्म तमिलनाडु में 1941 में हुआ था। वे बचपन से ही पढ़ने लिखने में काफी तेज थे। इंजीनियरिंग करने के बाद वे इसरो में काम करने लगे। हालांकि, वे 1969 में रॉकेट से जुड़ी तकनीक का अध्ययन करने के लिए अमेरिका की प्रिंस्टन यूनिवर्सिटी चले गए। एक साल बाद वे भारत वापस आ गए। 
 

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1994 में लगे गंभीर आरोप
नांबी पर 1994 में गंभीर आरोप लगे। उन्हें जासूसी के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया। उन पर आरोप था कि उन्होंने क्राइजेनिक इंजन से जुड़े दस्तावेज मालदीव के दो खुफिया अधिकारियों को बेचे। उनके खिलाफ सरकारी गोपनीय कानून के उल्लंघन और भ्रष्टाचार के कई मामले दर्ज किए गए। उन्हें देश का गद्दार माना जाने लगा। 

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मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, नांबी को इस दौरान काफी टॉर्चर किया गया। उन्हें घंटों पीटा जाता। इसके बाद उन्हें बिस्तर से बांध दिया जाता, ताकि वे घंटों बैठ ना सकें। हालांकि, नांबी लगातार खुद को बेकसूर बताते रहे, लेकिन पुलिस ने उनकी बात पर यकीन नहीं किया। 

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नांबी 48 दिन जेल में रहे। बाद में ये मामला सीबीआई को सौंपा गया। सीबीआई ने उन्हें क्लीन चिट दे दी। इसके बाद केरल सरकार इस मामले में एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट गई। हालांकि, कोर्ट ने 1998 में सरकार की अपील ठुकराते हुए नांबी को बरी कर दिया। 

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बाद में नांबी ने केरल सरकार पर उन्हें गलत तरीके से फंसाने को लेकर केस दर्ज कर दिया। इसके बाद 2001 में अदालत ने केरल सरकार को मुआवजा देने का आदेश दिया। मुआवजे के तौर पर उन्हें 50 लाख रुपए दिए गए। हालांकि, केरल सरकार का कहना है कि उन्हें उत्पीड़न के मुआवजे के तौर पर 1 करोड़ 30 लाख रुपए देगी। 
 

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