ड्यूटी से लौटते ही मां की गोद में चढ़ने को मचलते हैं बच्चे, यह देखकर मां की आंखें हो जाती हैं नम

Published : Apr 13, 2020, 10:47 AM IST

सूरत, गुजरात. मां आखिर मां होती है! वो बच्चों के लिए संघर्ष करती है..कभी कष्टों में रोती है, तो कभी निराश होती है, लेकिन उसका हौसला नहीं टूटता। मां कामकाजी भी होती है, तो भी घर और ड्यूटी दोनों को बखूबी मैनेज कर लेती है। कोरोना संक्रमण के चलते यह दौर भी मांओं की ममता और उनके साहस की परीक्षा ले रहा है। लेकिन ये मांएं हार नहीं मान रहीं। वे संघर्ष की हर कसौटी पर खरी साबित हो रही हैं। हम आपको ऐसी कुछ तस्वीरें दिखा रहे हैं, जो मांओं के साहस को दिखाती हैं। यह हैं सूरत की वालोड तहसील के कणजोड़ स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में नर्स मयूरी बेन। इनके 8 महीने के जुड़वां बच्चे हैं। जब इन्हें लगा कि उनकी  जरूरत इस समय स्वास्थ्य केंद्र में है, तो ये पीछे नहीं हटीं। ये पूरी शिद्दत से ड्यूटी कर रही हैं।

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ड्यूटी से लौटते ही मां की गोद में चढ़ने को मचलते हैं बच्चे, यह देखकर मां की आंखें हो जाती हैं नम
मयूरी बेन 75 किमी स्कूटी चलाकर अपनी ड्यूटी करने स्वास्थ्य केंद्र जाती हैं। बच्चों को मां और पति को संभालने को दे जाती हैं। जब वे ड्यूटी से लौटती हैं, तो बच्चे गोद में आने को मचल उठते हैं। यह देखकर उनकी आंखें छलक पड़ती हैं, लेकिन पहले वे खुद को सैनिटाइज करती हैं..नहातीं हैं..उसके बाद ही बच्चों को गोद में उठाती हैं।
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जब खाने का संकट हो, तब भी मां पहले बच्चों का पेट भरती है।
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बेशक यह बूढ़ी मां हालात के आगे बेबस बैठी है, लेकिन वो हौसला कभी नहीं खोएगी।
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अपने मासूम बच्चों की खातिर खुद भूखी-प्यासी रह लेती है एक मां।
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ऐसी मांओं ने कभी नहीं सोचा था कि बच्चों की भूख मिटाने उन्हें किसी के आगे हाथ फैलाने पड़ेंगे।
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बच्चों की खातिर ऐसी हजारों मांओं को अपनी जान खतरे में डालकर घर से बाहर निकलना पड़ा।
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फिर से जिंदगी पटरी पर लौटने की उम्मीद में बैठीं मांंएं।
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ऐसी हजारों माएं हैं, जिन्हें बच्चों की खातिर पैदल अपने घर लौटना पड़ा।
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बच्चों को संक्रमण न फैले, इसलिए मांएं हमेशा सजग हैं।

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