अहमदाबाद, गुजरात. जिंदगी में कोई काम छोड़ा-बड़ा नहीं होता। दूसरा, मुसीबत में ही इंसान को अपने भीतर की ताकत का एहसास होता है। मूलत: सूरत की रहने वाली अंकिता शाह भी जिंदगी के इसी पड़ाव से गुजर रही हैं। एक पैर से लाचार अंकिता ने इकॉनामिक्स से ग्रेजुएशन किया है। वे एक जगह जॉब करती थीं। इसी दौरान उन्हें मालूम चला कि उनके पिता को कैंसर है। अपने पिता के इलाज के लिए अंकिता को बार-बार अहमदाबाद आना पड़ा। लिहाजा उन्हें नौकरी छोड़नी पड़ गई। उन्हें दूसरी जगह नौकरी भी नहीं मिली। उनके साथ दिव्यांग होने से भेदभाद किया जाने लगा था। शुरुआत में अंकिता को कुछ नहीं सूझा। वे मायूस हुईं, फिर उन्हेांने खुद के आत्मविश्वास को समेटा। अब वे ऑटो रिक्शा चलाकर अपने पिता के इलाज के लिए पैसा जुटा रही हैं।
अंकिता ने बताया कि उनके पिता को चौथे स्तर का कैंसर है। वे अपने पिता की जिंदगी बचाने दिन-रात रिक्शा चलाकर इलाज के लिए पैसा जुटा रही हैं।
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35 वर्षीय अंकिता बताती हैं कि बचपन में उन्हें पोलियो हो गया था। लिहाजा उनका दायां पैर काटना पड़ा। अंकिता पिछले 6 महीने से अहमदाबाद में ऑटो चला रही हैं।
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पांच भाई-बहनों में सबसे बड़ीं अंकिता 2012 में अहमदाबाद आकर एक कॉल सेंटर में जॉब करने लगी थीं। लेकिन अब उन्हें नौकरी छोड़कर रिक्शा चलाना पड़ा रहा है। लेकिन अंकिता को इस बात का कोई अफसोस नहीं है।
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अंकिता बताती हैं कि वे 12 घंटे की शिफ्ट में काम करने के बाद 12 हजार रुपए कमा पाती थीं। उन्हें पिता के इलाज के लिए बार-बार सूरत से अहमदाबाद आना पड़ता था। इसलिए उन्हें नौकरी छोड़नी पड़ी। अंकिता बताती हैं कि दिव्यांग होने की वजह से उन्हें नौकरी में भेदभाव का शिकार होना पड़ता था।
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अंकिता ने अपने एक दोस्त लालजी बारोट की मदद से ऑटो चलाना सीखा। वो भी दिव्यांग है। अब अंकिता 8 घंटे ऑटो चलाकर महीने में करीब 20 हजार रुपए तक कमा लेती हैं।
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