Published : Jun 15, 2020, 10:44 AM ISTUpdated : Jun 15, 2020, 10:51 AM IST
अहमदाबाद, गुजरात. देश-दुनिया में अपने विकास की रफ्तार के लिए पहचाने जाने वाला गुजरात राज्य भूकंप के झटकों से बार-बार डर जाता है। 19 साल पहले कच्छ में आए विनाशकारी भूकंप से गुजरात उबर गया है, लेकिन रविवार को फिर भूंकप के झटकों ने उसे वो मंजर याद दिला दिया। बेशक रविवार को आए भूकंप से कोई नुकसान नहीं पहुंचा, पर लोग डरकर घर से बाहर निकल आए। बता दें कि रविवार रात 8.13 बजे कच्छ में तेज झटके महसूस किए गए। रिक्टर स्केल पर इसकी तीव्रता 5.5 थी। हालांकि सरकार इसकी तीव्रता 5.3 बताती है। इसका केंद्र कच्छ के वोंध गांव में था। कच्छ में 10 सेकंड धरती हिली। राजकोट, सौराष्ट्र और अहमदाबाद में भी झटके आए। बता दें कि गुजरात भूकंप के बड़े-बड़े झटके झेल चुका है। ये तस्वीरें 26 जनवरी, 2001 में गुजरात के भुज और कच्छ के अलावा अहमदाबाद में आए विनाशकारी भूंकप की हैं। 6.9 रिएक्टर की तीव्रता वाले इस भूकंप ने मानों गुजरात को हिलाकर रख दिया था। भुज और कच्छ बर्बाद हो गया था। आखिरी आंकड़े बताते हैं कि अकेले भुज और कच्छ में ही 12000 लोगों की मौत हो गई थी। घर ताश के पत्तों की तरह ढह गए थे। इस त्रासदी में 167,000 से ज्यादा लोग घायल हुए थे। भुज और कच्छ में 400,000 से ज्यादा घर मिट्टी में मिल गए थे। भूकंप के दो मुख्य कारण हैं। पहला धरती के अंदर गैस का प्रवाह या भूस्खलन। जिन क्षेत्रों में भूगर्भीय गतिविधियां अधिक होती हैं, वहां के लोगों को भूकंपरोधी घरों का निर्माण कराना चाहिए। आइए दिखाते हैं भुज-कच्छ में आए विनाशकारी भूकंप के बाद की कुछ तस्वीरें, मकसद है कि मुसीबतों से डरे नहीं, डटकर खड़े रहें...
ये तस्वीरें भुज में 2001 में आए विनाशकारी भूकंप की हैं। लेकिन लोगों के हौसलों ने फिर से खुद को खड़ा कर लिया।
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भुज में इस तरह लोग दफन हो गए थे।
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यह तस्वीर गुजरात के भुज से 40 किमी दूर अंजर गांव की है। यहां 2001 में भूकंप आया था।
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भुज में इस तरह घर बिखर गए थे।
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भुज से 40 किमी दूर अंजार गांव की तस्वीर।
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भुज में इस तरह बिल्डिंग्स जमींदोज हो गई थीं।
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मोहल्ले के मोहल्ले बर्बाद हो गए थे। लाशें मलबे में दबी पड़ी थीं।
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याद रहे कि जब 26 जनवरी, 2001 को देश सुबह गणतंत्र दिवस के जश्न में डूबा था, तभी भूकंप ने गुजरात खासकर कच्छ-भुज को हिलाकर रख दिया था।
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भूकंप में 167,000 लोग मलबे में दबकर घायल हो गए थे।
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भूकंप सिर्फ 2 मिनट आया था, लेकिन इतने ही वक्त में मौत ने तांडव मचा दिया था। कच्छ-भुज में ही 12,000 से ज्यादा लोगों की जान चली गई थी।
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एक साथ कई चिताएं जलते देखकर किसी को भी रोना आ सकता है, ये तो फिर उनके अपने थे।
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भुज में 40 प्रतिशत घर नष्ट हो गए थे। इनमें ऐतिहासिक धरोहरें भी शामिल थीं।
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2 मिनट के भूकंप ने करीब 4 लाख घरों की नींव हिला दी थीं।
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भूकंप से ऐसे हिल गई थीं ऐतिहासिक इमारतें।
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अनुमान लगाया गया था कि भूकंप से करीब 15 हजार करोड़ रुपए का नुकसान हुआ था।
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कई लाशें तो ऐसी थीं, जिनकी पहचान तक नहीं हो पाई थी। उन्हें दूसरों ने अग्नि दी।
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बता दें कि भुज भूकंप के केंद्र से सिर्फ 12 किमी दूर बसा शहर है। भूकंप से भचाऊ और अंजार भी बुरी तरह प्रभावित हो गए थे।
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भूकंप के बाद पूरा देश गुजरात की मदद के लिए आगे आया था। जैसे आज वॉरियर्स जी-जान से लोगों को कोरोना से बचा रहे, तब घायलों की मदद कर रहे थे।
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जब भूकंप से भुज-कच्छ उड़ खड़ा हुआ, तो कोरोना को हराना कोई बड़ी बात नहीं।
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भूकंप ने कुछ ही सेकंड में बड़ी-बड़ी इमारतों को मिट्टी में मिला दिया था।
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बड़ी संख्या में वॉलिंटियर लोगों की मदद के लिए गुजरात पहुंचे थे।
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गुजरात को मरहम लगाने भारतीय सेना भी जी-जान से जुट गई थी।
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मलबे में फंसे लोगों के रेस्क्यू के लिए सेना की मदद ली गई थी।
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गुजरात के दो जिलों कच्छ और भुज में 6.9 रिएक्टर की तीव्रता वाला भूकंप आया था।
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