पति से आखिरी बार हुई बातें याद कर रोने लगी पत्नी, बोली-आपने सब सपने तोड़ दिए, शव देखते ही बेसुध

Published : Jan 23, 2020, 08:09 PM ISTUpdated : Jan 23, 2020, 08:31 PM IST

देहरादून (उत्तराखंड). जम्मू-कश्मीर के पुलवामा जिले के अवंतीपोरा में मंगलवार के दिन आतंकियों के बीच जारी मुठभेड़ में शहदी हुए जवान राहुल रैंसवाल का आज चंपावत में अंतिम संस्कार हुआ। शहीद की एक आखिरी बार की झलक देखने के लिए दूर-दूर से लोग आए हुए थे। हर तरफ भारत माता के जय कारों की अवाज सुनाई दे रही थीं। राहुल की पत्नी प्रीती पति के शव को तिंरगे में लिफ्टे देख चीख रही थी। वह एक तीन दिन पहले फोन पर हुई पति की बातों को याद करके रो रही थी। वह यही कह रही थी कि आपने तो जल्दी आने का वादा किया था। लेकिन आपने सब बर्बाद कर दिया हंसती-खेलती जिंदगी खत्म हो गईं।  बीते नवंबर महीने की ही बात है, राहुल छुट्टियों पर अपने घर आया था। हंसी-खुशी और बातों-बातों में छुट्टियां कब बीती, पता ही नहीं चला। आज आंखों में आंसू लिए राहुल की पत्नी हर उस पल को याद कर रही है। शहीद अपने पीछे एक आठ महीने की छोटी सी बच्ची को भी छोड़ कर गया है। जानकारी के मुताबिक तीन साल पहले ही उनकी शादी हुई थी।

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पति से आखिरी बार हुई बातें याद कर रोने लगी पत्नी, बोली-आपने सब सपने तोड़ दिए, शव देखते ही बेसुध
बता दें कि जवान राहुल अपने साले की 9 फरवी को होने वाली शादी में आने का पत्नी से वादा किया था। प्रीती इसके लिए खरीददारी भी कर चुकी थी। वह जिस दिन पति शहीद हुए थे, उस दौरान वो लखनऊ में अपने मायके में थी। लेकिन जैसे ही पति के शहादत की खबर सुनी तो वह रोती-बिलखती हुई चंपावत आ गई। वह रोती हुए बोल रही है कि में इस आठ माह की बेटी को क्या बोलूंगी। की आपके पापा कहां चले गए।
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जैसे ही शहीद की अंतिम यात्रा निकाली तो देखने वालों का हूजूम उमड़ पड़ा। वह अपने घरों की छतों पर चढ़कर राहुल की एक झलक पाना चाहते थे। हर तरफ बस एक ही आवाज आ रही थी। 'जब तक सूरज चांद रहेगा, राहुल तेरा नाम रहेगा'
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शहीद के पिता वीरेंद्र सिंह रोते हुए बोले- वह कहते हैं कि ऐसे लाल हर जगह पैदा हों, यही उनकी तमन्ना है। उन्होंने कहा कि राहुल के अंदर सेना में भर्ती होकर देश सेवा करने का जुनून बचपन से ही था। हाईस्कूल की परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद राहुल ने अपने बड़े भाई की तरह सेना में भर्ती होने के लिए तैयारियां तेज कर दीं थीं।
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चंपावत के डिप्टेश्वर घाट पर सैन्य सम्मान के साथ उनकी अंत्येष्टि की गई। राहुल के दादा केशव सिंह और पिता वीरेंद्र सिंह शहीद की चिता को मुखाग्नि दी। पिता नम आंखों से यह कह रहे थे कि मैं राहुल से साथ होता तो दो चार को तो मार ही देता है। क्योंकि मैं भी सेना में रहा हूं।
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राहुल 2012 में फौज में भर्ती हुआ था। शहीद के बड़े भाई राजेश रैंसवाल भी 2009 से सेना में है। इस वक्त वह लखनऊ में तैनात है। राहुल के दादा भी फौज में ही थे। जबकि राहुल के पिता भी भारतीय सेना से रिटायर्ड है। राजेश रैंसवाल का परिवार भी उनके साथ लखनऊ में रहता है और वह भी घर के लिए रवाना हो गए हैं।
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शहीद की पत्नी प्रीती आज आंखों में आंसू लिए राहुल की पत्नी हर उस पल को याद कर रही हैं, जो उन्होंने अपने पति के साथ बिताए थे। राहुल रैंसवाल की शादी 2017 में हुई थी। सिर्फ इतने कम वक्त में ही राहुल की पत्नी की मांग सूनी हो गई।

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