लुधियाना (पजाब). कोरोना ने इंसान को ऐसे दिन दिखा दिए हैं, जिसकी उसने कभी कल्पना भी नहीं की थी। लॉकडाउन के चलते कई लोगों का रोजगार छिन गया, लाखों लोग बिरोजगार हो गए। रेलवे स्टेशन पर काम करने वाले कुली जो सारी दुनिया का बोझ उठाते हैं उनके दर्द का बोझ इतना हो गया कि पता नहीं अब वह कब कम होगा। पंजाब में लुधियाना रेलवे स्टेशन पर कुछ ऐसी ही मार्मिक तस्वीरें देखने को मिली, जहां कुलियों ने अपना दर्द बयां किया।
दरअसल, केंद्र सरकार की ट्रेन चलाने की घोषणा के बाद सोमवार को लुधियाना रेलवे स्टेशन पर ढाई महीने बाद 55 कुली काम की तलाश में गए थे। लेकिन उनके हाथ सिर्फ निराशा ही लगी, उनसे किसी ने कोई समान नहीं रखवाया। तो वह दुखी होकर अपने घर को लौट गए।
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नम आंखों से कुलियों ने कहा-दो महीने से लोगों से मांगकर पेट भरना पड़ रहा है। जो जमा पूंजी तो वह तो पहले ही हफ्ते में खत्म हो गई। अब तो लोगों का इतना कर्जा हो गया है कि पता नहीं कब उतरेगा।
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नम आंखों से कुलियों ने कहा-दो महीने से लोगों से मांगकर पेट भरना पड़ रहा है। जो जमा पूंजी तो वह तो पहले ही हफ्ते में खत्म हो गई। अब तो लोगों का इतना कर्जा हो गया है कि पता नहीं कब उतरेगा।
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यह कुली घर से यह सोचकर आया था कि आज ढाई महीने बाद काम मिलेगा और उस पैसे से मैं घर का राशन लेकर आऊंगा, लेकिन वह दिनभर इंतजार करता रहा, लेकिन उसे कोई काम नहीं मिला तो वह मायूस होकर वापस अपने घर लौट गया।
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