दिवाली पर देश के इन राज्यों में अलग मान्यताएं, तस्वीरों में देखिए कहां किस देवता की होती है पूजा

Published : Oct 23, 2022, 09:33 AM IST

ट्रेंडिंग डेस्क।  दीपावली का पर्व देशभर में हर्ष और उल्लास के साथ मनाया जाता है। इस पर्व से कुछ दिन पहले तक लोग अपने घरों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में साफ-सफाई करते हैं, जो अब लगभग पूरा हो चुका है। देश के ज्यादातर इलाकों में इस दिन लोग मां लक्ष्मी की पूजा करते हैं। मिट्टी के दीये जलाते। घर को सजाते हैं और मिठाई व पकवान खाते हैं। साथ ही पटाखे भी चलाते हैं। ज्यादातर राज्यों में यह पर्व भगवान श्रीराम के 14 साल के वनवास पूरा करने के बाद रावण को मारकर अयोध्या लौटने के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। इस दिन लोग घर को दीप जलाकर रौशन करते है। भारत में इस पर्व को कुछ राज्यों में अलग-अलग तरह से मनाते हैं। यह उससे जुड़ी कुछ पौराणिक कथाओं के आधार पर मनाया जाता है। आइए जानते हैं किन राज्यों में यह पर्व कैसे मनाते हैं। 

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दिवाली पर देश के इन राज्यों में अलग मान्यताएं, तस्वीरों में देखिए कहां किस देवता की होती है पूजा

गुजरात में लोगों का मानना है कि इस दिन पारंपरिक वर्ष का समापन होता है। खासकर दीवाली के पांच दिन वे इसे लाभ पंचमी के तौर मनाते हैं और इस दिन को व्यवसाय शुभ करने के लिए अच्छा मानते हैं। मां लक्ष्मी की पूजा की जाती है और घर को बुरी शक्तियों से दूर रखने के लिए विभिन्न तरह के अनुष्ठान किए जाते हैं। 

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ओडिशा में दीपावली के दिन कई तरह के उत्सव मनाते हैं। लोग पूर्वजों का स्वागत करते हैं और इसके लिए जूट जलाते हैं। लोगों का मानना है कि पूर्वज सीधे इस दिन स्वर्ग से उनसे मिलने आते हैं। इसके बाद लोग उन्हें पकवानों का भोग लगाते हैं और प्रार्थना करने के बाद उसे ग्रहण करते हैं। 

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गोवा में लोग मानते हैं कि भगवान श्रीकृष्ण ने नरकासुर नाम के राक्षस का इस दिन वध किया था। इस जीत की खुशी में वे अपने घर को रौशन करते हैं। सड़कें इस दाव की प्रतिमाओं से अटी पड़ी होती है और अंधेरा होने पर इन प्रतिमाओं को पटाखे जलाकर नष्ट कर दिया जाता है। लोग मिठाई और पकवान खाते हैं और एक दूसरे को बधाई देते हैं। 

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तमिलनाडु में इस त्योहार को ठीक उसी तरह मनाया जाता है, जैसे कि उत्तर भारत में लोग छोटी दीवाली यानी नरक चतुर्दशी मनाते हैं। ऐसे में यहां मुख्य पर्व दीपावली से एक दिन पहले ही मनाया जाता है। सुबह लोग तेल मिश्रित पानी या फिर पूरा तेल से स्नान करते हैं। इसके बाद लोग पूजा-पाठ करते हैं। दीपक जलाकर भगवान को प्रसाद चढ़ाते हैं। चावल को पीसकर रंग में मिलाकर घर के बाहर रंगोली बनाते हैं। पटाखे जलाते हैं और मिठाई व पकवान खाते हुए एक दूसरे को बधाई देते हैं। 

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पश्चिम बंगाल में यह दीपावली को श्यामा पूजा या फिर काली पूजा के तौर पर मनाते हैं।  यह सूर्य अस्त होने के बाद मनायी जाती है। मां काली को पूजा में प्रसाद के तौर पर मिठाई, अनाज और मछली या मांस भी चढ़ाते हैं। काली पूजा से एक दिन पहले बंगाली लोग घर के चौखट पर 14 दीये जलाते हैं। इसके साथ ही वे बुरी शक्तियों को दूर रखने के लिए भूत चतुदर्शी अनुष्ठान भी करते हैं। 

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