Published : Jul 26, 2021, 08:51 AM ISTUpdated : Jul 26, 2021, 01:33 PM IST
उज्जैन. हिंदू धर्म में दान का विशेष महत्व बताया गया है। दान करना हर मनुष्य का कर्तव्य है। सभी को अपने सामर्थ्य के अनुसार दान जरूर करना चाहिए। धर्म ग्रंथों में दान से संबंधित अनेक नियम भी बताए गए हैं। लाल किताब के अनुसार कुंडली में ग्रहों की कुछ ऐसी स्थितियां होती हैं जिसके चलते उन ग्रहों से संबंधित वस्तु या अन्य किसी चीज का दान करने से नुकसान हो सकता है। यानी उन चीजों का दान भूलकर भी नहीं करना चाहिए। आगे जानिए इससे जुड़ी खास बातें…
चंद्रमा
- चंद्र छठे भाव में है तो भूलकर भी दूध या पानी का दान न करें।
- चंद्र बलवान होने पर चांदी, मोती, चावल आदि का दान न करें।
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बृहस्पति
- गुरु सप्तम भाव में हो तो कपड़ों का दान न करें।
- गुरु नवम भाव में है तो मंदिर आदि में दान नहीं करना चाहिए।
- गुरु पांचवें भाव में है तो धन का दान नहीं करना चाहिए।
- गुरु बलवान होने पर पुस्तकों का उपहार नहीं देना चाहिए।
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केतु
- केतु सातवें में हो तो लोहे का दान नहीं करना चाहिए।
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मंगल
- चौथे भाव में मंगल बैठा हो तो वस्त्रों का दान नहीं करें।
- मंगल बलवान होने पर मिठाई, गुड़, शहद आदि मंगल की वस्तुओं का दान न दें।
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राहु
- राहु दूसरे भाव में हो तो तेल व चिकनाई वाली चीजों का दान न करें।
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शनि-
- शनि लग्न में व गुरु पंचम में हो तो कभी भी ताम्बे का दान नहीं करें।
- शनि, आठवें भाव में हो तो भोजन, वस्त्र या जूते आदि का दान न करें।
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शुक्र
- शुक्र बलवान होने पर सिले हुए सुंदर वस्त्र, सेंट और आभूषण उपहार में न दें।
- शुक्र भाग्य भाव में हो तो पढ़ाई के लिए छात्रवृति, पुस्तकें व दवा के लिए दान नहीं करें।
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सूर्य
- कुंडली के सप्तम/अष्टम भाव में सूर्य हो तो तांबे का दान नहीं करना चाहिए।
- सूर्य बलवान होने पर सूर्य की वस्तुएं सोना, गेहूं, गुड़ व तांबे का दान नहीं दें।
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