उज्जैन. हिंदू धर्म में भगवान शिव से संबंधित अनेक ग्रंथ हैं, श्रीलिंग पुराण भी उनमें से एक है। इस ग्रंथ में भी भगवान शिव को प्रसन्न करने के अनेक उपाय बताए गए हैं। श्रीलिंग पुराण में ये भी बताया गया है कि किस महीने में किस रत्न से बने शिवलिंग की पूजा करने से भक्त की हर मनोकामना पूरी हो सकती है। सावन के पवित्र महीने में हम आपको यही बताने जा रहे हैं।
1. श्रीलिंग पुराण के अनुसार वैशाख के महीने में वज्र यानी हीरे से बने शिवलिंग की पूजा करनी चाहिए।
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2. श्रीलिंग पुराण के अनुसार ज्येष्ठ मास में मरकत यानी पन्ने से निर्मित शिवलिंग की पूजा करनी चाहिए।
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3. आषाढ़ के महीने में मोती से बने शिवलिंग की पूजा करने से शुभ फलों की प्राप्ति होती है।
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4. श्रावण (सावन) मास में नीलमणि यानी नीलम से बने शिवलिंग की पूजा से हर मनोकामना पूरी हो जाती है।
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5. भादौ में पद्मराग यानी पुखराज से बने शिवलिंग की पूजा करनी चाहिए, ऐसा श्रीलिंग पुराण में लिखा है।
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6. आश्विन यानी क्वांर मास में गोमेद से निर्मित शिवलिंग की पूजा से भक्तों की हर इच्छा पूरी हो सकती है।
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7. श्रीलिंग पुराण के अनुसार, कार्तिक मास में प्रवाल यानी मूंगे से बने शिवलिंग की पूजा करनी चाहिए।
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8. मार्गशीर्ष यानी अगहन मास में वैदूर्यमणि यानी लहसुनिया से निर्मित शिवलिंग की पूजा करनी चाहिए।
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9. पौष के महीने में पुष्पराग यानी नीले रंग के पुखराज से बने शिवलिंग की पूजा शुभ फलदायक मानी गई है।
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10. श्रीलिंग पुराण के अनुसार माघ मास में सूर्यकांतमणि यानी माणिक से बने शिवलिंग की पूजा करनी चाहिए।
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11. फाल्गुन के महीने में स्फटिक से बने शिवलिंग की पूजा से सभी समस्याओं का समाधान हो जाता है।
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