उज्जैन. 23 मई से शनि ग्रह वक्री हो जाएगा यानी टेढ़ी चाल चलने लगेगा। शनि का ये परिवर्तन कुछ लोगों को फायदा पहुंचाने वाला रहेगा और कुछ लोगों को नुकसान भी हो सकता है। शनि की ये स्थिति 10 अक्टूबर तक रहेगी। शनिदेव को ज्योतिष शास्त्र में बहुत है महत्वपूर्ण और न्याय के देवता के रूप में माना जाता है। शनिदेव की पूजा में बहुत-सी बातों का ध्यान रखना पड़ता है अन्यथा गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। आगे जानिए शनिदेव को प्रसन्न करने के उपाय और उनकी पूजा में किन बातों का ध्यान रखना चाहिए…
1. शमी के वृक्ष की जड़ के साथ रोजाना ॐ प्रां प्रीं प्रौं स: शनिश्चराय नम: मंत्र का तीन माला जप करें।
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2. कुंडली में शनि से जुड़े दोषों को दूर करने के लिए प्रतिदिन सुंदरकांड का पाठ करें और हनुमान जी के मंदिर में जाकर अपनी क्षमता के अनुसार कुछ मीठा प्रसाद चढ़ाएं।
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3. शनिवार को शनि महाराज को नीले रंग का अपराजिता फूल चढ़ाएं और काले रंग की बाती और तिल के तेल से दीप जलाएं।
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4. शनिवार को महाराज दशरथ का लिखा शनि स्तोत्र पढ़ें।
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5. शनिवार या अमावस्या पर सूर्यास्त के बाद पीपल के पेड़ के नीचे बैठकर शनिदेव का ध्यान करें फिर एक दीपक में सरसों का तेल डालकर जलाएं।
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1. शनिदेव की पूजा में काले तिल को बहुत ही शुभ माना जाता है, लेकिन शनिवार को काले तिल नहीं खरीदना नहीं चाहिए।
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2. शास्त्रों के अनुसार शनिदेव की पूजा करते समय कभी भी उनकी आंखों में आंख डालकर नहीं देखना चाहिए, बल्कि चरण की तरफ देखते हुए तेल अर्पण करना चाहिए।
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3. शनिवार को तामसिक चीजों का सेवन न करें जैसे नॉनवेज और मदिरा।
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