Published : Jan 02, 2020, 11:43 AM ISTUpdated : Jan 02, 2020, 12:37 PM IST
वाराणसी (Uttar Pradesh). यूपी के वाराणसी में नागरिकता कानून के खिलाफ हुए प्रदर्शन के दौरान गिरफतार की गई एक्टिविस्ट एकता शेखर को जमानत मिल गई। रिहा होते ही एकता अपनी बेटी से मिलीं। इस दौरान उन्होंने कहा, मैं अपनी बच्ची को लेकर बहुत डरी हुई थी, क्योंकि वो मेरे दूध पर ही निर्भर है। बच्ची से दूर रहना मेरे लिए बहुत मुश्किल भरा रहा। बता दें, अपर जिला जज सप्तम सर्वेश कुमार पांडेय की कोर्ट ने बुधवार को सभी की जमानत 25-25 हजार बंध पत्र जमा कर रिहाई का आदेश दिया दे दिया था।
एकता कहती हैं, एक्टिविस्ट होकर जेल में रहना मेरे लिए गर्व की बात थी, लेकिन एक मां होकर एक एक पल पहाड़ की तरह गुजर रहा था।
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एकता कहती हैं, बच्ची मेरा दूध पीती है, 14 दिन एक मां के लिए वनवास की तरह था।मैं जैसे ही चंपक से मिली, उसकी खुशी का ठिकाना नहीं था।
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19 दिसंबर 2019 को बेनिया बाग में नागरिकता कानून के खिलाफ जनसभा हुई थी। जिसमें शामिल होकर एकता और उनके पति रवि शेखर ने भीड़ के साथ नारेबाजी की थी। इस दौरान भीड़ की पुलिस से धक्का मुक्की हुई और उत्तेजक नारे लगाए गए। जिसके बाद पुलिस ने 56 लोगों को अरेस्ट कर जेल भेज दिया था।
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एकता और उनके पति भी जेल भेज दिया गया। माता पिता के जेल जाने के बाद उनकी सवा साल की बच्ची चंपक रवि के बड़े भाई शशिकांत तिवारी के पास थी।
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चंपक की तबीयत खराब हो गई। जिसके बाद कोर्ट ने मर्सी के आधार पर एकता को गुरुवार सुबह रिहा कर दिया।
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कांग्रेस महासचिव प्रियंका वाड्रा ने बीते दिनों कहा था, वाराणसी में दुधमुंही बच्ची के माता-पिता को गिरफ्तार कर लिया गया। सरकार का कर्तव्य है कि वह बच्ची की मां को घर जाने दें।
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अपर जिला जज सप्तम सर्वेश कुमार पांडेय की कोर्ट ने बुधवार को सभी की जमानत 25-25 हजार बंध पत्र जमा कर रिहाई का आदेश दिया दे दिया था।
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