यहां ठंडई पीकर होली में मगन हुए भगवान, रोज लगता है बांके बिहारी को जलेबी का भोग

Published : Mar 08, 2020, 06:45 PM IST

मथुरा (Uttar Pradesh)। ब्रज में होली का विशेष महत्व है। परंपरागत रूप से ठाकुर बांके बिहारीजी महाराज को मेवा युक्त ठंडाई का सेवन (भोग लगाया गया) कराया गया। इसके बाद प्रसाद का वितरण किया गया। बता दें कि यह दौर रंगभरी एकादशी से पूर्णिमा तक चलता रहेगा। मान्यता है कि ठंडई पीने के बाद ठाकुर बांके बिहारी महाराज भक्तों के साथ होली में मगन हो जाते हैं। इसके अलावा प्रतिदिन ठाकुर जी को जलेबी का प्रसाद भी लगाया जाता है। यह जलेबी भी ठाकुर जी की रसोई में ही तैयार की जाती है। यहां पर जलेबी का विशेष प्रसाद लगाया जाता है।  

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यहां ठंडई पीकर होली में मगन हुए भगवान, रोज लगता है  बांके बिहारी को जलेबी का भोग
होली पर मेवायुक्त ठंडाई का सेवन भी परंपरागत है। इसमें काली मिर्च आदि का भी सेवन किया जाता है। हुरियारे का वेश धारण कर भक्तों के साथ होली खेलने वाले ठाकुर बांके बिहारी लाल को गोस्वामीजनों द्वारा मेवा युक्त ठंडाई का भोग लगाया जाता है।
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दर्शन खुलने से पहले ही ठाकुर जी की रसोई में ही इसे गोस्वामीजनों द्वारा तैयार किया जाता है जिसमें विभिन्न प्रकार के मेवा मिलाए जाते हैं। ठंडाई का बिहारी जी को सेवन कराया जाता है। इस ठंडाई को सभी गोस्वामीजन और भक्तगणों को प्रसाद स्वरूप दिया जाता है।
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बताते हैं कि यह ठंडई तो परंपरागत रूप से ठाकुर जी को दी ही जाती है। इसके अलावा प्रतिदिन ठाकुर जी को जलेबी का प्रसाद भी लगाया जाता है। यह जलेबी भी ठाकुर जी की रसोई में ही तैयार की जाती है। यहां पर जलेबी का विशेष प्रसाद लगाया जाता है।
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ठाकुर बांके बिहारी जी महाराज जब होली खेलकर थक जाते हैं तो आरती के पश्चात सेवायत गोस्वामीजन द्वारा उनकी गुलाब और अंबर के इत्र से श्री अंग पर मालिश की जाती है। मालिश के बाद ठाकुर जी को शयन कराया जाता है।
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ठाकुरजी का इशारा पाकर यहां पर भी गोस्वामीजन द्वारा उनकी चरण सेवा की जाती है और इसके बाद ठाकुर जी शयन करने लगते हैं। यह जानकारी देते हुए चन्द्र प्रकाश गोस्वामी ने बताया कि मौसम के अनुसार होली पर ठाकुर जी को गुलाब और अंबर के इत्र की सेवा की जा रही है।

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