सामने आया नरेंद्र गिरी का सुसाइड नोट: लिखा-मौत का रहस्य, 'लड़की संग फोटो वायरल करेगा आनंद गिरी'

Published : Sep 21, 2021, 07:37 PM ISTUpdated : Sep 22, 2021, 10:17 AM IST

प्रयागराज (उत्तर प्रदेश). अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद (akhada parishad) के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरी (Mahant Narendra Giri) का संदिग्ध हालत में सोमवार को निधन हो गया। पुलिस की जांच में कई चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। अब इस मामले में 24 घंटे बाद 8 पेज का सुसाइड नोट सामने आया है। जिसमें महंत की जिंदगी का पूरा रहस्य लिखा हुआ है। साथ ही नोट में अपनी मौत का जिम्मेदार शिष्य आनंद गिरी हनुमान मंदिर के पुजारी आद्या तिवारी और उनके बेटे संदीप तिवारी को बताया है। पढ़िए मंहत के जरिए लिखा हुआ पूरा सुसाइड नोट...  

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सामने आया नरेंद्र गिरी का सुसाइड नोट: लिखा-मौत का रहस्य, 'लड़की संग फोटो वायरल करेगा आनंद गिरी'

दरअसल, मंहत नरेंद्र गिरी ने करीब 13 पेजों का यह सुसाइड नोट श्री मठ बाधम्बरी गद्दी के लेटर पेड पर लिखा हुआ है। सुसाइड नोट में लिखा- मैं महंत नरेंद्र गिरि, मेरा मन आज बहुत ही विचलित हो गया है। इसके पीछे का कारण आनंदि गिरी है। मुझे सूचना मिली है कि वह किसी लड़की की फोटो कम्प्यूटर के जरिए मेरे साथ लगाकर मुझे बदनाम करना चाहता है। मैं कहां तक आनंद गिरि को सफाई दूंगा। आखिर किस-किस को सच बताऊंगा। मैं बदनाम हो गया तो कैसे जी पाऊंगा। इसलिए अपना जीवन समाप्त कर रहा हूं।
 

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महंत नरेंद्र गिरी ने अपने दूसरे पेज में लिखा-मैं पुलिस और प्रशासान से निवेदन करता हूं कि मेरी मौत के जिम्मेदार आनंद अद्या प्रसाद तिवारी, संदीप तिवारी पुत्र अद्या प्रसाद तिवारी होंगे। इसलिए इन लोगों को कानूनी कार्रवाई की जाए। क्योंकि इनकी वजह से ही आत्मत्या कर रहा हूं। इन लोगों को जब तक सजा नहीं मिलेगी मेरी आत्मा को शांति नहीं मिलेगी।

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महंत नरेंद्र गिरी ने अगले पेज पर लिखा- मैं 13 सितंबर को ही सुसाइड करना चाहता था, लेकिन हिम्मत नहीं जुटा पाए। मेरी अंतिम इच्छा है कि मैंने जिस तरह से इस गद्दी पर रहते हुए गरिमा को बनाए रखा। आगे जो भी इसको संभाले वह ऐसी ही गरिमा बनाए रखे। बस मैं यही चाहता हूं।

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आगे लिखा- प्रिय बलवीर मठ मंदिर का ख्याल वैसे ही करना, जैसे मैंने रखा था। आशुतोष गिरी, नितेश गिरि एवं मंदिर के सभी महात्मा बलवीर की मदद करते रहना।

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महंत ने लिखा- मैं मरने जा रहा हूं, अतं समय में सत्य बोलूंगा। मैंने हर समय मठ और हनुमान जी की सेवा की है। मठ का एक पैसा भी घर-परिवार को नहीं दिया है। मेरा घर से कोई संबंध नहीं है। मैं 2004 में महंत बना। तब से लेकर अब तक विकास किया। मैं समाज में अपना सिर उठाकर जीता था, लेकिन आनंद गिरी, मंदिर के पुजारी, तिवारी का बेटा संदीप तिवारी भी मेरी मरन की वजह हैं। उन्होंने मुझे कहीं का नहीं छोड़ा, इसलिए सुसाइड कर रहा हूं। मेरी आखिरी इच्छा है कि मेरी समाधि पर एक नीबू का पौधा लगा देना।

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बता दें कि महंत नरेंद्र गिरी ने अपने सुसाइड में एक चीज को कई बार रिपीट किया है। साथ उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम में आनंद गिरी का नाम लिखा है। महंत ने सुसाइड नोट के हर पेज पर अपने साइन किए हैं।
 

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