51 साल पहले बर्फ के इस टुकड़े ने मचाई थी भीषण तबाही, निगल ली थी 20 हजार लोगों की जान

Published : Feb 07, 2021, 04:58 PM IST

हटके डेस्क. उत्‍तराखंड के चमोली में रविवार 7 फरवरी 2021 को बेहद भयानक श्रासदी हुई। यहां चमोली के पास ग्‍लेशियर टूटने से भारी हिमस्खलन हुआ है। पानी के सैलाब ने जोशीमठ डैम और तपोवन बैराज बांध को भी ध्वस्त कर दिया। देश-दुनिया में प्राकृतिक आपदाएं नई नहीं है। आज से करीब 51 साल पहले एक भयानक भूकंप के कारण पहाड़ी से गिरे 700 टन बर्फ के विशाल हिमखंड ने पेरू देश में 20 हजार लोगों की जानें ले ली थीं। आइए देखते हैं उस घटना की भयानक तस्वीरें- 

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51 साल पहले बर्फ के इस टुकड़े ने मचाई थी भीषण तबाही, निगल ली थी 20 हजार लोगों की जान

31 मई 1970 को पेरू में एक बड़ा भूकंप आया था। भूकंप और बड़े पैमाने पर हुए भूस्खलन ने लगभग 70,000 लोगों की जान ले ली थी। भूकंप के झटकों के कारण पेरू की सबसे ऊंची पर्वत Mount Huascarán से बर्फ का एक बड़ा हिमखंड लुढ़कता हुआ नीचे आ गिरा था जिसने Yungay शहर को दफन कर दिया। 

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इस शहर में बर्फ के इस टुकड़े के गिरने से हुई तबाही के बाद यहां के  कब्रिस्तान में बना ईसा मसीह का एक स्टैच्यू और चार ताड़ के पेड़ ही रह गए थे। बाकी सब स्वाहा हो गया था। ये पूरा शहर धव्स्त हो गया था। 

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BBC की एक रिपोर्ट के मुताबिक, तस्वीर में ग्लेशियर बर्फ के इस विशाल टुकड़े का आकार दिखाया गया है। एक बोल्डर ने अनुमान लगाया था कि इसका वजन 700 टन के करीब था। आपको जानकर हैरानी होगी कि भूकंप के बाद ये टुकड़ा अविश्वसनीय तेज रफ्तार से पहाड़ी से नीचे लुढ़कता आया था। 

 

इस हादसे से Yungay के पास के शहर Ranrahirca, में 20,000 लोग मारे गए थे। यहां केवल 400 ही जिंदा बचे थे। सभी लोगों की मौत पहाड़ी से दौड़कर गिरते इस विशाल हिमखंड के कारण हुई थी। ये बर्फ का टुकड़ा उन पर मौत बनकर गिरा था। 

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हालांकि यह पहली बार नहीं था जब Ranrahirca शहर तबाह हुआ था। इस त्रासदी से केवल आठ साल पहले इसी तरह के भूस्खलन में 2,000 लोग मारे गए थे जिसने सात और पड़ोसी शहरों को तबाह कर दिया था, लेकिन 1970 का भूकंप, जिसे तब से महान पेरू भूकंप के रूप में जाना जाता है ने पेरू को बिल्कुल तहस-नहस कर दिया था।

 

 इस त्रासदी से  पेरू का सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्र Ancash और La Libertad थे। हालांकि भूकंप के झटके ब्राजील में भी दूर तक महसूस किए गए थे। Ancash क्षेत्र की राजधानी हुआज में बने मकान इन तीव्र भूकंप के झटकों का सामना नहीं कर सके थे। गली-सड़के सब टूटकर बिखरे नजरे आए।  

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भूकंप का केंद्र प्रशांत महासागर पर कास्मा और चिंबोट के तट से 35 किमी दूर स्थित था, जहां नाज़का प्लेट दक्षिण अमेरिकी प्लेट से मिलती है। इसकी तीव्रता 7.9 थी। भूकंप पेरू के समयानुसार रविवार दोपहर 3 बजकर 23 मिनट पर  आया और 45 सेकंड तक रहा।

 

हालांकि ज्यादा जान-माल का नुकसान भूकंप नहीं भूस्खलन के बाद हुआ। इस हादसे में एक लॉरी और एक बस मलबे में बह गए थे लेकिन लाख कोशिश के बाद भी उन्हें बमुश्किल बाहर निकाला जा सका। 

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एरियल शॉट में इस त्रासदी का नजारा दिखाया गया है। तस्वीरों में ग्लेशियर बर्फ और चट्टानों की स्लाइड का आकार दिखाया गया है, जो 160 किमी प्रति घंटे की स्पीड से हिमस्खलन करते हुए पर्वत से पिघल रही थीं। 
 

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भूस्खलन ने 15 मीटर तक के मलबे के टीले को ऊंचा कर दिया - जैसा कि नीचे दिए गए फोटोग्राफ में बताया गया है - और ग्लेशियर से पिघली हुई बर्फ से छोटी-छोटी झीलें बन गईं। 

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घर, बिजनेस कंपनी सभी तरह के इंफ्रास्टक्चर  जैसे कि बिजली कंपनी आदि पूरी तरह से नष्ट हो गए थे। यहां कीचड़ और मलबे का बहाव 20 मीटर गहरा था और ये वहां बनाए घरों को बहा ले गया। 

 

विश्व के इतिहास में दर्ज इस त्रासदी में 50,000 लोग मारे गए, 20,000 लापता और मृत घोषित कर दिए गए थे। वहीं 150,000 लोग घायल हो गए थे। ग्रेट पेरुवियन भूकंप को आज तक दुनिया की सबसे विनाशकारी भूकंपों में से एक माना जाता है। (फोटो सोर्स- BBC) 

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