Published : May 15, 2020, 09:51 AM ISTUpdated : May 15, 2020, 12:08 PM IST
हटके डेस्क: कोरोना वायरस यानी कोविड 19 के बारे में भला कौन जानता था? इस वायरस ने दिसंबर में चीन, फिर पूरी दुनिया को अपनी चपेट में ले लिया। धीरे-धीरे इस वायरस ने दुनिया को लाशों के ढेर में बदल दिया। आज इस वायरस की वजह से दुनिया के 45 लाख 26 हजार लोग संक्रमित हो जबकि मरने वालों का आंकड़ा 3 लाख 34 सौ के पार है। इस वायरस ने अमेरिका जैसे शक्तिशाली देश में भी मौत का कोहराम मचा दिया है। कई देश इस जानलेवा वायरस की वैक्सीन बनाने में जुटे हैं, लेकिन WHO ने अभी तक किसी भी वैक्सीन को कंफर्म नहीं किया है। इस बीच मार्च में ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी ने इंसानों पर कोविड 19 के वैक्सीन का ट्रायल किया था। ये वैक्सीन बंदरों पर सफल हुई थी। इसके बाद इसे इंसानी बॉडी में इंजेक्ट किया गया। अब ऑक्सफोर्ड के एक प्रोफ़ेसर ने दावा किया है कि इंसानों पर ट्रायल का रिजल्ट अगले महीने यानी जून में आ जाएगा। इसके बाद ये कंफर्म होगा कि क्या इस वायरस का खात्मा मुमकिन है भी या नहीं?
ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के प्रोफ़ेसर सर जॉन बेल ने बताया कि इंसानों पर किये गए वैक्सीनेशन टेस्ट का नतीजा जून में आ जाएगा। तब पता चल जाएगा कि कोरोना का इलाज मिल पाएगा या नहीं?
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उन्होंने बताया कि अभी तक सैंकड़ों लोगों को ये वैक्सीन दी जा चुकी है। इनकी बॉडी इस वैक्सीन पर कैसे रियेक्ट करती है, इसका नतीजा जून में आएगा।
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इंपेरियल लंदन की टीम अगले महीने वैक्सीन लगाए गए इंसानों को टेस्ट करेगी और देखेगी कि इंसानों पर इस वैक्सीन का क्या असर पड़ रहा है।
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67 साल के प्रोफेसर सर जॉन बेल ने BBC को दिए गए इंटरव्यू में कहा कि अगर इंसानों में ये ट्रायल सफल होता है, तो फिर अगला चैलेंज होगा दुनिया में इस वायरस को खत्म करने वाले इस वैक्सीन का उत्पादन करना।
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डॉ बेल ने बताया कि ये वैक्सीन ना सिर्फ यूके के लिए बनेगा, बल्कि दुनिया के बाकी देशों को भी कोरोना से बचाने के लिए इसका निर्माण किया जाएगा।
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उनके मुताबिक, यूके में जितने कोरोना संक्रमित हैं, उतने लोगों के लिए वैक्सीन बनाने की क्षमता यूके के पास नहीं है। ऐसे में उन्हें दूसरे पार्टनर की जरुरत पड़ेगी।
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साथ ही प्रोफ़ेसर ने इस वैक्सीन के ट्रायल से जुड़ी एक चेतावनी भी जारी की है। डॉ बेल के मुताबिक, ट्रायल में सैंकड़ों लोगों को इंजेक्शन दिया तो गया है लेकिन अगर इसका नेगेटिव इफ़ेक्ट पड़ा, इन लोगों के ट्रीटमेंट की कोई गारंटी नहीं है।
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यूके में कोरोना ने भारी तबाही मचाई है। इस वायरस को लेकर देश के पीएम ने भी आशंका जताई थी कि शायद इस वायरस का कोई इलाज ना मिल पाए।
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जबकि देश के चीफ साइंटिफिक एडवाइजर सर पैट्रिक वैलंस ने कहा कि उन्हें पूरी उम्मीद है कि ये ट्रायल सक्सेसफुल होगा। अगर ऐसा नहीं होता है, तो ये हैरानी की बात होगी।
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