चीन की जिस लैब से आया कोरोना वायरस; उसमें अमेरिकी सरकार के फंड से चल रही थी चमगादड़ों पर रिसर्च

Published : Apr 12, 2020, 02:32 PM ISTUpdated : Apr 14, 2020, 06:20 PM IST

वुहान. कोरोना वायरस से दुनियाभर में हाहाकार मचा है। अब तक 1 लाख से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं, 17 लाख से ज्यादा लोग संक्रमित हैं। अब कोरोना को लेकर एक बड़ा खुलासा हुआ है। बताया जा रहा है कि कोरोना चीन के वुहान की मांस मंडी से नहीं बल्कि एक लैब से निकला। इस लैब में अमेरिका सरकार द्वारा दिए गए फंड से चमगादड़ों पर रिसर्च चल रही थी। यह खुलासा एक रिपोर्ट में किया गया है। कोरोना से दुनियाभर में 1 लाख 8 हजार से ज्यादा मौते हो चुकी हैं। वहीं, चीन में सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, करीब 3400 लोगों की मौत हुई है। हालांकि, चीन में अब स्थिति सामान्य मानी जा रही है। वुहान समेत सभी जगह से लॉकडाउन भी हट गया है। लेकिन इन खुलासे ने एक बार फिर चीन और अमेरिका पर बड़े सवाल खड़े कर दिए। हालांकि, इससे पहले चीन और अमेरिका एक दूसरे पर वायरस फैलाने के आरोप लगाते रहे हैं।

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चीन की जिस लैब से आया कोरोना वायरस; उसमें अमेरिकी सरकार के फंड से चल रही थी चमगादड़ों पर रिसर्च

डेली मेल में छपी खबर के मुताबिक, चीन के वुहान में स्थित इस लैब में अमेरिकी सरकार द्वारा दी गई आर्थिक मदद से चीन की गुफाओं से निकाले गए चमगादड़ों पर रिसर्च चल रही थी।

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रिपोर्ट के मुताबिक, वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वीरोलॉजी में 1000 मील दूर यूंनान की गुफाओं से लाए गए चमगादड़ों पर रिसर्च चल रही थी। इस रिसर्च के लिए अमेरिकी सरकार से 10 करोड़ रुपए की आर्थिक मदद भी मिली थी।
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वुहान में यह लैब मांस मार्केट के पास है। इस लैब पर पहले भी ऐसे आरोप लगते रहे हैं कि यहीं से कोरोना वायरस निकला। पहले यह वायरस यूंनान की गुफाओं के चमगादड़ों में ही पाया गया था। बाद में ऐसा कहा गया कि वुहान के मांस मार्केट से यह जानवरों से इंसानों में पहुंचा।
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डेली मेल के मुताबिक, लैब में कुछ ऐसे दस्तावेज मिले हैं, जिनसे यह पता चलता है कि उस लैब में चमगादड़ों पर प्रयोग चल रहे थे। कुछ मीडिया रिपोर्ट में पहले भी कहा जा चुका है कि यह वायरस किसी लैब से निकला है।
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उधर, इस खबर के सामने आने के बाद अमेरिका में भी विरोध होना शुरू हो गया है। अमेरिकी सांसद मैट गैट्स ने कहा, यह जानकार हैरान और निराश हूं कि अमेरिकी सरकार जानवरों पर ऐसे खतरनाक प्रयोग करने के लिए फंड दे रही है। हो सकता है कि इसी वजह से पूरी दुनिया में कोरोना फैला हो।
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जानवरों पर ऐसे प्रयोग के खिलाफ काम करने वाली अमेरिका संस्था वाइट कोट वेस्ट ने कहा, अमेरिकी सरकार टैक्स के पैसे ऐसे प्रयोगों पर खर्च करती है। उन्होंने कहा, ऐसा सामने आया है कि इन जानवरों को प्रयोगों बाद मांस मार्केट में बेच दिया जाता था।
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अमेरिका में बायोमेडिकल और पब्लिक हेल्थ रिसर्च का काम सरकार की एनआईएच संस्था करती है। एनआईएच की वेबसाइट पर अमेरिका के अन्य इंस्टीट्यूशन की तरह वुहान इंस्टीट्यूट भी इसमें पार्टनर के तौर पर रजिस्टर है।
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हालांकि, वुहान इंस्टिट्यूट अपने ऊपर लगे ऐसे आरोपों को हमेशा से नकारता रहा है। इस इंस्टिट्यूट को चीनी सरकार ने 2003 के बाद बनाया था। तब चीन में सार्स वायरस फैला था। सार्स कोरोना का ही एक वायरस था जिसने 775 लोगों की जान ली थी। दुनियाभर में 8 हजार लोग उससे संक्रमित हुए थे।
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इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है कि वुहान की लैब में चमगादड़ों पर प्रयोग चल रहा था। रिपोर्ट के मुताबिक, लैब का एक वैज्ञानिक भी संक्रमित हो गया था। इसके बाद यह अन्य लोगों में फैला।

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