यू्क्रेन में फंसी एमपी की ये बेटियां : बेसमेंट में गुजारी रात, इनका दर्द सुन आ जाएंगे आंसू, बोलीं- हमें बचा लो

Published : Feb 25, 2022, 03:57 PM ISTUpdated : Feb 25, 2022, 04:02 PM IST

भोपाल : रूस और यूक्रेन युद्ध (Russia Ukraine Conflict) के बीच भारत के कई छात्र यूक्रेन (Ukraine) में फंस गए हैं। इसमें मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) की कई बेटियां भी। टीवी पर वहां के हालातों को देख उनके परिजन परेशान हैं और बेटी के घर वापस लौटने की राह देख रहे हैं। उधर बेटियां भी वतन वापसी की कोशिश में लगी हैं। वे अपने माता-पिता से फोन के जरिए संपर्क में हैं। कई परिवार वालों का हौसला बढ़ा रही हैं तो कोई वहां के हालातों के बयां कर रही है और बता रही हैं कि कैसे एक-एक पल निकालना मुश्किल हो रहा है। धमाके उन्हें डरा रहे हैं और जरुरत के सामान की कमी..जानिए इन बेटियों का हाल..

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यू्क्रेन में फंसी एमपी की ये बेटियां : बेसमेंट में गुजारी रात, इनका दर्द सुन आ जाएंगे आंसू, बोलीं- हमें बचा लो

एमपी के हरदा (Harda) की रहने वाली बेटी तनुजा पटेल 6 साल से यूक्रेन में रहकर MBBS की पढ़ाई कर रही है। युद्ध होने के बाद तनुजा के माता-पिता काफी टेंशन में हैं। बेटी का हाल जानने वे बेहाल हैं। हालांकि तनुजा मम्मी-पापा का हौसला बढ़ा रही है और उसका कहना है कि वह पूरी तरह से सुरक्षित हैं। कल तक तो उसकी ऑफ लाइन क्लास भी लगी थी। 
 

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तनुजा के पिता का नाम बलराम पटेल हैं। वे एक शिक्षक हैं। तनुजा ने बताया कि हमला होने के बाद शुक्रवार सुबह सायरन बजाकर सभी को अपने घरों में सुरक्षित रहने को कहा गया है। उसने कहा कि वह पूरी तरह से सुरक्षित है। मम्मी-पापा आप टेंशन न लें। यहां और भी स्टूडेंट्स हैं जो भारत के रहने वाले हैं।
 

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जबलपुर (Jabalpur) की तीन बेटियां रिया पाठक, इशिता ठाकुर और सुवि गुप्ता भी इस युद्ध में फंसी हुई हैं। उनके परिवार वालों के माथे पर चिंता की लकीरें हैं।। यूक्रेन में मार्शल-लॉ घोषित होने से तीनों बेटियों की 24 फरवरी की फ्लाइट कैंसिल हो गई। तीनों एयरपोर्ट के पास ही एक होटल में हैं। जबलपुर सांसद राकेश सिंह ने तीनों बेटियों से और उनके परिवार के लोगों से बात की। भारतीय दूतावास सभी को पोलैंड के रास्ते निकालने की कवायद में जुटा है।

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रतलाम ( Ratlam) के सुमंगल गार्डन के पास रहने वाली वैशाली राठौड़ यूक्रेन के कारक्यू शहर में रहती है। वैशाली वहां से MBBS लास्ट ईयर की स्टूडेंट हैं। यूक्रेन और रूस के बीच चल रहे युद्ध को देखते हुए वैशाली के परिजनों को बेटी की चिंता सताने लगी है और वह प्रशासन से अपनी बेटी को सुरक्षित देश वापस लाने की मांग कर रहे हैं। हालांकि 24 साल की वैशाली ने अपने माता-पिता को वीडियो कॉल कर अपने सुरक्षित होने की जानकारी दी है और चिंता नहीं करने की बात भी कही है ।

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थांदला (झाबुआ) की रहने वाली MBBS स्टूडेंट रिचा धानक ने परिजनों से कहा कि वो घर लौटना चाहती है। रिचा ने कहा कि मैं रूस-यूक्रेन बॉर्डर के बैटल ग्राउंड से 35 किलोमीटर दूर खार्किव शहर में हूं। युद्ध के धमाकों से बुरी तरह डरी हुई हूं। भारत लौटने के लिए खूब मदद मांगी, लेकिन नहीं मिली। अब अंडर ग्राउंड मेट्रो स्टेशन में छिपी हुई हूं। वहीं रायसेन की तीन बेटियां सूची, शिवी, आशी, यूक्रेन के खार कीव शहर मेट्रो स्टेशन पर फंसी हैं। सूची ने वहीं स्टेशन से एक वीडियो बनाकर जारी किया है। जिसमें वह सरकार से मदद मांग रही है। अपने देश वापस लाने के लिए गुहार लगाती नजर आ रही है। बेटियों की चिंता में माता-पिता परेशान हैं।

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