
How do Elephants Remember Ancient Migration Routes: क्या आपने कभी सोचा है कि जंगल में रहने वाला हाथी बिना किसी नक्शे, GPS या साइनबोर्ड के सैकड़ों किलोमीटर दूर उसी जगह कैसे पहुंच जाता है, जहां उसके परिवार की पिछली पीढ़ियां जाती रही हैं? आखिर हाथी रास्ता कैसे याद रखते हैं? इसका जवाब उनकी शानदार याददाश्त और परिवार से मिलने वाली सीख में छिपा है। जानिए इस बारे में वैज्ञानिक क्या कहते हैं?
दरअसल, हाथियों के पास कोई इलेक्ट्रॉनिक GPS तो नहीं होता, लेकिन उनके दिमाग में जंगल का एक तरह का नक्शा जरूर बन जाता है। झुंड की सबसे उम्रदराज और अनुभवी हथिनी अक्सर आगे चलती है। उसे याद रहता है कि पानी कहां मिलेगा, किस रास्ते से नदी पार करनी है और किस इलाके में भोजन आसानी से मिल सकता है। उसके पीछे चल रहे नन्हे हाथी इन चीजों को देखकर सीखते हैं।
मसलन, जब झुंड गेरुआ नदी जैसी नदी को पार करता है, तो छोटे हाथी अपनी मां के कदमों को देखते हुए आगे बढ़ते हैं। बड़े हाथी बच्चों को चारों ओर से घेरकर सुरक्षित रखते हैं। इस दौरान बच्चे सिर्फ नदी पार नहीं कर रहे होते, बल्कि जिंदगी का एक जरूरी सबक सीख रहे होते हैं।
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हां। वैज्ञानिक हाथियों के इस व्यवहार को सामाजिक रूप से सीखी जाने वाली संस्कृति का हिस्सा मानते हैं। हाथियों में रास्ते, पानी के स्रोत, भोजन की जगह, खतरे और मौसम के हिसाब से आवाजाही जैसी कई जानकारियां एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक पहुंचती हैं। भारत के कतरनियाघाट वन्यजीव अभयारण्य से नेपाल के बारदिया नेशनल पार्क तक हाथियों की आवाजाही इसका बड़ा उदाहरण है। दोनों देशों के बीच जंगलों का यह इलाका हाथियों के पुराने रास्तों का हिस्सा है।
A train of elephants crossing a railway line. Elephant herd size varies from small to big. I have seen a single herd of upto 95 elephants once. Keep counting in this family. https://t.co/shAFYXUNmG
— Parveen Kaswan, IFS (@ParveenKaswan) October 30, 2024
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जंगलों का बंटना, सड़कें, निर्माण और दूसरी मानवीय गतिविधियां हाथियों के पुराने रास्तों को प्रभावित कर सकती हैं। अगर किसी पीढ़ी के हाथी किसी रास्ते से गुजर ही नहीं पाए, तो अगली पीढ़ी उस रास्ते को सीख भी नहीं पाएगी। इसीलिए एलिफेंट कॉरिडोर यानी हाथी गलियारों को बचाना बेहद जरूरी माना जाता है। क्योंकि हाथियों के लिए ये सिर्फ रास्ते नहीं हैं। ये पीढ़ियों से चली आ रही यादें हैं, जो एक मां अपने बच्चे को कदम-कदम पर सिखाती है।