भगवान श्रीकृष्ण की 50 सबसे फेमस लीलाएं, जानें माखन चोरी से लेकर कंस वध तक की कहानी

Published : Sep 03, 2026, 03:26 PM IST
Shri Krishna Janmashtami 2026

सार

Krishna Janmashtami 2026: 4 सितंबर, शुक्रवार को पूरे देश में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर्व मनाया जाएगा। भगवान श्रीकृष्ण का एक नाम लीलाधर भी है क्योंकि अपने बाल्यकाल से लेकर युवावस्था तक उन्होंने अनेक लीलाएं कीं।

Krishna Bal Leela: भगवान श्रीकृष्ण का जीवन ऐसी अद्भुत लीलाओं से भरा है, जिनमें कहीं नटखट बाल कृष्ण नजर आते हैं, तो कहीं अधर्म का नाश करने वाले भगवान। गोकुल में माखन चोरी से लेकर कालिया नाग के दमन, गोवर्धन पर्वत उठाने, कंस वध और कुरुक्षेत्र में अर्जुन को गीता का ज्ञान देने तक, कृष्ण की हर लीला अपने आप में खास है। उनकी कथाएं आज भी घर-घर में सुनाई जाती हैं। आइए जानते हैं भगवान श्रीकृष्ण की धरती पर की गई 50 सबसे प्रचलित लीलाओं की रोचक कहानी...

1. श्रीकृष्ण का जन्म

मथुरा के राजा कंस को आकाशवाणी से पता चला कि उसकी बहन देवकी का 8वां पुत्र उसका अंत करेगा। इसके बाद कंस ने देवकी और वसुदेव को कारागार में बंद कर दिया। आधी रात को श्रीकृष्ण का जन्म हुआ। उनके जन्म के समय कारागार के पहरेदार सो गए और बंद दरवाजे अपने आप खुल गए।

2. वसुदेव का कृष्ण को गोकुल ले जाना

कृष्ण के जन्म के बाद वसुदेव उन्हें टोकरी में लेकर गोकुल की ओर निकल पड़े। रास्ते में यमुना नदी आई। यमुना के पानी को श्री कृष्ण ने अपने पैरों से छुआ तो पानी का जलस्तर कम हो गया। तेज बारिश के बीच वसुदेव ने कृष्ण को सिर पर उठाकर नदी पार की। शेषनाग ने अपने फन फैलाकर कृष्ण को बारिश से बचाया।

ये भी पढ़ें-
वसुदेव ने नवजात कृष्ण को टोकरी में रखकर यमुना पार क्यों कराई? शेषनाग-नदी से जुड़ी है अद्भुत कथा

3. नंद बाबा के घर कृष्ण

गोकुल में उसी रात नंद बाबा के घर यशोदा ने एक कन्या को जन्म दिया था। वसुदेव कृष्ण को वहां छोड़कर उस कन्या को अपने साथ मथुरा ले आए। इसी तरह कृष्ण का पालन-पोषण नंद और यशोदा के घर हुआ।

ये भी पढ़ें-
कृष्ण जन्माष्टमी पर 56 भोग क्यों लगाया जाता है? जानें 7 दिन और 8 पहर से कैसे बना ये खास आंकड़ा

4. पूतना वध

कंस ने कृष्ण को मारने के लिए पूतना नाम की राक्षसी को भेजा। वह सुंदर स्त्री का रूप बनाकर गोकुल पहुंची और कृष्ण को दूध पिलाने लगी। उसके स्तनों पर विष लगा था। लेकिन कृष्ण ने उसका विष नहीं, बल्कि उसके प्राण ही ले लिए। इस तरह पूतना का खात्मा हुआ।

5. शकटासुर का उद्धार

एक बार बाल कृष्ण पालने में लेटे थे। पास ही एक भारी बैलगाड़ी रखी थी। शकटासुर नाम का असुर उसी गाड़ी में छिपा था। कृष्ण ने अपने पैर से गाड़ी को ठोकर मारी और वह पलट गई।

6. तृणावर्त का अंत

तृणावर्त नाम का असुर बवंडर का रूप लेकर गोकुल आया। उसने बाल कृष्ण को उठाकर बहुत ऊंचाई पर ले जाने की कोशिश की। लेकिन कृष्ण ने उसका गला पकड़ लिया। राक्षस की शक्ति खत्म हो गई और वह नीचे गिर पड़ा।

7. यशोदा को कृष्ण के मुंह में ब्रह्मांड दिखना

एक दिन कृष्ण के मिट्टी खाने की शिकायत यशोदा से की गई। यशोदा ने उनका मुंह खोलने को कहा। जब कृष्ण ने मुंह खोला तो यशोदा को उसमें पूरी सृष्टि दिखाई दी। वह समझ गईं कि उनका लल्ला कोई साधारण बालक नहीं है।

8. माखन चोरी

कृष्ण को माखन बहुत पसंद था। वे अपने दोस्तों के साथ मिलकर गोकुल के घरों में पहुंच जाते और मटकी से माखन निकाल लेते। गोपियां उनकी शिकायत लेकर यशोदा के पास पहुंचतीं, लेकिन कृष्ण की शरारत देखकर खुद भी मुस्कुरा देतीं।

9. मटकी फोड़ना

गोपियां माखन को ऊंची जगह पर टांग देती थीं ताकि कृष्ण उसे न निकाल सकें। कृष्ण अपने दोस्तों की मदद से मानव-पिरामिड बनाते और मटकी तक पहुंच जाते। फिर मटकी फोड़कर माखन सभी में बांट देते।

10. दामोदर लीला

एक बार कृष्ण ने माखन की बहुत शरारत की। यशोदा उन्हें पकड़कर रस्सी से बांधना चाहती थीं। लेकिन हर बार रस्सी थोड़ी छोटी पड़ जाती। आखिरकार कृष्ण को एक ओखली से बांधा गया। इसी कारण उनका नाम दामोदर पड़ा।

11. यमलार्जुन वृक्षों का उद्धार

दामोदर लीला के दौरान कृष्ण ओखली को खींचते हुए 2 विशाल अर्जुन वृक्षों के बीच से निकलने लगे। ओखली अटक गई और कृष्ण ने उसे खींच दिया। दोनों पेड़ गिर पड़े और उनमें बंधे 2 यक्ष मुक्त हो गए।

12. वत्सासुर वध

कृष्ण और बलराम गायों के बछड़ों को चराने जाते थे। एक दिन वत्सासुर नाम का असुर बछड़े का रूप बनाकर उनके बीच आ गया। कृष्ण ने उसे पहचान लिया और उसका अंत कर दिया।

13. बकासुर वध

बकासुर ने विशाल बगुले का रूप धारण किया और कृष्ण पर हमला किया। उसने कृष्ण को निगलने की कोशिश की। लेकिन कृष्ण ने उसके मुंह को चीर दिया और उसका उद्धार कर दिया।

14. अघासुर का उद्धार

अघासुर एक विशाल अजगर का रूप लेकर रास्ते में लेट गया। उसका मुंह इतना बड़ा था कि ग्वालबालों को वह गुफा जैसा लगा। बच्चे उसके मुंह में चले गए। कृष्ण भी अंदर पहुंचे और अपने शरीर का विस्तार करके उसका अंत कर दिया।

15. ब्रह्मा का मोह

कृष्ण की बाल लीलाओं को देखकर ब्रह्मा भी उनकी शक्ति को परखना चाहते थे। उन्होंने कृष्ण के ग्वालबाल मित्रों और बछड़ों को छिपा दिया। तब कृष्ण ने स्वयं ही सभी ग्वालबालों और बछड़ों के रूप धारण कर लिए। ब्रह्मा को कृष्ण की दिव्यता का एहसास हुआ।

16. धेनुकासुर वध

तालवन में धेनुकासुर नाम का असुर गधे के रूप में रहता था। उसके डर से कोई वहां नहीं जाता था। बलराम ने उसे पकड़कर जमीन पर पटक दिया। इसके बाद कृष्ण और बलराम ने उसके साथियों का भी अंत किया।

17. प्रलंबासुर का अंत

कृष्ण और बलराम अपने ग्वालबाल मित्रों के साथ खेल रहे थे। प्रलंबासुर ग्वालबाल का रूप बनाकर उनके बीच आ गया। उसने बलराम को उठाकर भागने की कोशिश की। बलराम ने उसे पहचान लिया और उसका अंत कर दिया।

18. कालिया नाग का दमन

यमुना में कालिया नाम का जहरीला नाग रहता था। उसके विष से नदी का पानी दूषित हो गया था। कृष्ण नदी में कूद गए और कालिया के फनों पर नृत्य किया। अंत में कालिया ने हार मान ली और कृष्ण ने उसे यमुना छोड़कर जाने का आदेश दिया।

19. कालिया की पत्नियों की प्रार्थना

जब कृष्ण कालिया के फनों पर नृत्य कर रहे थे, तब कालिया की पत्नियों ने कृष्ण से प्रार्थना की। उन्होंने अपने पति की गलती के लिए क्षमा मांगी। कृष्ण ने कालिया को जीवनदान दिया और उसे यमुना छोड़ने को कहा।

20. बांसुरी की लीला

कृष्ण की बांसुरी की धुन का वर्णन कृष्ण भक्ति की परंपरा में बेहद सुंदर तरीके से मिलता है। उनकी बांसुरी सुनकर ग्वालबाल, गोपियां और वृंदावन के जीव-जंतु तक आकर्षित हो जाते थे। बांसुरी कृष्ण के प्रेम और आनंद का प्रतीक बन गई।

21. गोपियों के वस्त्र की लीला

कात्यायनी व्रत करने वाली गोपियों से जुड़ी एक प्रसिद्ध कथा में कृष्ण उनके वस्त्र लेकर कदंब के पेड़ पर चढ़ गए। गोपियों ने उनसे वस्त्र वापस मांगे। इस कथा को भक्ति परंपरा में कृष्ण की लीला और समर्पण के भाव से जोड़ा जाता है।

22. गोवर्धन पूजा

गोकुल में इंद्र की पूजा की तैयारी हो रही थी। कृष्ण ने नंद बाबा और ग्रामीणों से कहा कि हमें अपनी गायों, गोवर्धन पर्वत और प्रकृति का सम्मान करना चाहिए। इसके बाद लोगों ने इंद्र की जगह गोवर्धन की पूजा की।

23. गोवर्धन पर्वत उठाना

इंद्र इस बात से नाराज हो गए और उन्होंने गोकुल में तेज बारिश शुरू कर दी। तब कृष्ण ने अपनी छोटी उंगली पर गोवर्धन पर्वत उठा लिया। सभी गांववासी और पशु उसके नीचे आ गए। सात दिन तक कृष्ण ने पर्वत को धारण किए रखा, ऐसी धार्मिक मान्यता है।

24. इंद्र का अहंकार टूटना

गोवर्धन लीला के बाद इंद्र को अपनी गलती का एहसास हुआ। उन्होंने कृष्ण से क्षमा मांगी। इस लीला को अहंकार छोड़कर विनम्रता अपनाने की सीख के रूप में देखा जाता है।

25. गोचारण लीला

कृष्ण का बचपन गायों और ग्वालबालों के बीच बीता। वे सुबह गायों को लेकर जंगल जाते और शाम को वापस लौटते। कृष्ण की यह साधारण दिखने वाली दिनचर्या भी उनकी सबसे प्रिय वृंदावन लीलाओं में गिनी जाती है।

26. ग्वालबालों के साथ खेल

कृष्ण अपने मित्रों के साथ तरह-तरह के खेल खेलते थे। कभी दौड़ लगाते, कभी कुश्ती करते तो कभी पेड़ों पर चढ़ते। इन लीलाओं में कृष्ण का बाल रूप सबसे ज्यादा दिखाई देता है।

27. माखन का बंटवारा

कृष्ण अकेले माखन नहीं खाते थे। वे अपने दोस्तों को भी बुलाते और माखन बांटकर खाते थे। इसी वजह से उनकी माखन चोरी की कहानी सिर्फ शरारत नहीं, बल्कि प्रेम और साझेदारी की कथा के रूप में भी सुनाई जाती है।

28. राधा-कृष्ण की प्रेम लीला

वृंदावन की भक्ति परंपरा में राधा और कृष्ण का प्रेम सबसे खास कहानी में से एक है। इसे सांसारिक प्रेम से अलग आत्मा और परमात्मा के प्रेम के प्रतीक के रूप में देखा जाता है।

29. रास लीला

रास लीला कृष्ण की सबसे प्रसिद्ध वृंदावन लीलाओं में है। शरद पूर्णिमा की रात कृष्ण ने गोपियों के साथ रास किया, ऐसी भक्ति परंपरा है। इसका मतलब कृष्ण के प्रति पूर्ण प्रेम और समर्पण से जोड़ा जाता है।

30. गोपियों की परीक्षा

कृष्ण ने गोपियों को यह समझाया कि सच्ची भक्ति में अहंकार नहीं होना चाहिए। उनकी लीलाओं में बार-बार यह भाव दिखाई देता है कि भक्त का मन पूरी तरह भगवान में लग जाए।

31. अक्रूर के साथ मथुरा प्रस्थान

जब कृष्ण और बलराम को मथुरा बुलाया गया तो अक्रूर उन्हें लेने गोकुल आए। गोकुल छोड़ते समय कृष्ण से बिछड़ने का दुख पूरे ब्रज में छा गया। कृष्ण के मथुरा जाने की यह घटना वृंदावन की लीलाओं का एक भावुक पड़ाव है।

32. मथुरा में प्रवेश

मथुरा पहुंचकर कृष्ण और बलराम ने शहर में प्रवेश किया। यहां उन्होंने कंस के अत्याचार के खिलाफ अपनी भूमिका शुरू की। मथुरा की उनकी लीलाएं बाल-क्रीड़ा से आगे बढ़कर धर्म की स्थापना की ओर जाती हैं।

33. कुब्जा का उद्धार

मथुरा में कृष्ण की मुलाकात कुब्जा नाम की एक महिला से हुई, जो शरीर से झुकी हुई थीं। उन्होंने कृष्ण को चंदन अर्पित किया। कृष्ण ने उनके शरीर को सीधा कर दिया और उन्हें सुंदर रूप प्रदान किया।

34. धनुष भंग

कंस ने एक विशाल धनुष रखा था। कृष्ण वहां पहुंचे और उन्होंने उस धनुष को उठा लिया। फिर उन्होंने उसे तोड़ दिया। इसके बाद कंस को समझ आ गया कि कृष्ण उसके लिए बड़ा खतरा बन चुके हैं।

35. कुवलयापीड़ हाथी का वध

कंस ने कृष्ण और बलराम को मारने के लिए कुवलयापीड़ नाम के विशाल हाथी को भेजा। कृष्ण ने उसका सामना किया और उसका अंत कर दिया। इसके बाद दोनों मल्लयुद्ध के मैदान में पहुंचे।

36. चाणूर-मुष्टिक से मल्लयुद्ध

कंस के पहलवान चाणूर और मुष्टिक बेहद शक्तिशाली थे। कृष्ण ने चाणूर से और बलराम ने मुष्टिक से मुकाबला किया। दोनों असुर पहलवानों का अंत हुआ।

37. कंस वध

मल्लयुद्ध के बाद कृष्ण सीधे कंस के पास पहुंचे। कंस ने भागने की कोशिश की, लेकिन कृष्ण ने उसे पकड़ लिया और उसका अंत कर दिया। इसके साथ मथुरा को उसके अत्याचार से मुक्ति मिली।

38. माता-पिता को मुक्त कराना

कंस के वध के बाद कृष्ण और बलराम ने अपने माता-पिता देवकी और वसुदेव को कारागार से मुक्त कराया। लंबे समय बाद माता-पिता ने अपने पुत्रों को खुले रूप में देखा।

39. संदीपनि आश्रम में शिक्षा

कृष्ण और बलराम ने गुरु संदीपनि के आश्रम में शिक्षा प्राप्त की। वहां उन्होंने शास्त्र और विभिन्न विद्याएं सीखीं। गुरु दक्षिणा के रूप में उन्होंने संदीपनि मुनि के पुत्र को वापस लाने का कार्य किया।

40. गुरु पुत्र को वापस लाना

संदीपनि मुनि का पुत्र समुद्र में चला गया था और फिर वापस नहीं लौटा। कृष्ण और बलराम उसे खोजने निकले। वे समुद्र और फिर यमलोक तक गए और गुरु के पुत्र को वापस लेकर आए।

41. जरासंध से युद्ध

कंस के ससुर जरासंध ने कृष्ण से बदला लेने के लिए मथुरा पर कई बार आक्रमण किया। कृष्ण और बलराम ने उसकी सेना का सामना किया। लगातार हमलों से मथुरा के लोगों की सुरक्षा को देखते हुए कृष्ण ने बाद में एक नई रणनीति अपनाई।

42. द्वारका नगरी बसाना

मथुरा पर लगातार हमलों के बीच कृष्ण ने समुद्र के किनारे एक सुरक्षित नगरी बसाई, जिसे द्वारका कहा गया। कृष्ण के जीवन का यह चरण उन्हें वृंदावन के बालक से एक कुशल राजा और रणनीतिकार के रूप में दिखाता है।

43. रुक्मिणी हरण

विदर्भ की राजकुमारी रुक्मिणी कृष्ण को अपना पति मानती थीं। लेकिन उनका विवाह शिशुपाल से तय किया जा रहा था। रुक्मिणी ने कृष्ण को संदेश भेजकर उनसे सहायता मांगी। कृष्ण पहुंचे और उन्हें अपने साथ ले गए। बाद में दोनों का विवाह हुआ।

44. नरकासुर वध

कृष्ण ने नरकासुर नाम के असुर का अंत किया। उसने अनेक महिलाओं को बंदी बना रखा था। कृष्ण ने उन्हें मुक्त कराया। इसी घटना से जुड़ी परंपरा में दीपावली से एक दिन पहले नरक चतुर्दशी मनाने की कथा भी सुनाई जाती है।

45. स्यमंतक मणि की कथा

स्यमंतक मणि को लेकर कृष्ण पर चोरी का आरोप लगा। कृष्ण ने अपनी प्रतिष्ठा साफ करने के लिए मणि की खोज की। अंत में उन्हें मणि से जुड़ी पूरी सच्चाई का पता चला और गलत आरोप दूर हुआ।

46. सुदामा से मित्रता

कृष्ण और सुदामा बचपन में गुरु संदीपनि के आश्रम में साथ पढ़े थे। सालों बाद गरीब सुदामा कृष्ण से मिलने द्वारका पहुंचे। वे उनके लिए थोड़े से चावल लेकर गए थे। कृष्ण ने मित्र का बेहद प्रेम से स्वागत किया। यह कथा सच्ची मित्रता और प्रेम का प्रतीक मानी जाती है।

47. शिशुपाल का उद्धार

राजसूय यज्ञ के दौरान शिशुपाल ने कृष्ण का लगातार अपमान किया। उसे कई अपराधों तक क्षमा करने का वचन दिया गया था। जब उसने सीमा पार कर दी तो कृष्ण ने सुदर्शन चक्र से उसका वध किया।

48. महाभारत में अर्जुन के सारथी बनना

महाभारत युद्ध में कृष्ण ने हथियार न उठाने का संकल्प लिया। उन्होंने अर्जुन के सारथी बनना स्वीकार किया। युद्धभूमि में जब अर्जुन अपने रिश्तेदारों को देखकर विचलित हुए, तब कृष्ण ने उन्हें धर्म और कर्म का उपदेश दिया।

49. श्रीमद्भगवद्गीता का उपदेश

कुरुक्षेत्र में कृष्ण ने अर्जुन को जो ज्ञान दिया, वही भगवद्गीता के रूप में प्रसिद्ध है। उन्होंने कर्म, ज्ञान, भक्ति, आत्मा और धर्म के बारे में समझाया। गीता में कृष्ण का संदेश है कि व्यक्ति को अपने कर्तव्य से भागना नहीं चाहिए और कर्म करते हुए उसके फल की कामना नहीं करनी चाहिए।

50. कृष्ण का धर्म और प्रेम का संदेश

कृष्ण की पूरी जीवन-कथा को देखें तो उनकी लीलाओं में अलग-अलग रंग दिखाई देते हैं- कहीं वे नटखट बालक हैं, कहीं गोपाल, कहीं मित्र, कहीं प्रेम के प्रतीक, कहीं योद्धा और कहीं अर्जुन के सारथी। कृष्ण की कथाओं का मूल भाव भक्ति, प्रेम, धर्म, करुणा और जीवन में सही कर्म करने से जोड़ा जाता है।


Disclaimer
इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।

PREV
Welcome to the Asianet News Hindi General Knowledge (GK) Hub, your go-to destination for amazing facts, interesting information, everyday science explainers, "Did You Know?" stories, curiosity-driven content, and answers to intriguing "Aisa Kyu?" questions. Explore fascinating insights about science, nature, history, technology, space, health, and the world around you—all explained in a simple and engaging way.
Read more Articles on

Recommended Stories

'ज' से शुरू होने वाले 59 मुहावरे और उनके मतलब, 'जले पर नमक छिड़कना' से 'जूते चाटना' तक पूरी लिस्ट
KBC Quiz: मैरी क्यूरी से लेकर मिल्खा सिंह तक, जानें कौन बनेगा करोड़पति के इन सवालों के सही जवाब