Janmashtami 2026: कंस द्वारा देवकी की 8वीं संतान को मारने की भविष्यवाणी के कारण, श्रीकृष्ण का जन्म जेल में हुआ। वसुदेव उन्हें बचाने के लिए रात में यमुना पार कर गोकुल ले गए। वहाँ उन्होंने कृष्ण को यशोदा की कन्या से बदल दिया।

Lord Krishna Birth Story: श्रीकृष्ण के जन्म की सबसे भावुक कथाओं में से एक है। भगवान कृष्ण का जन्म मथुरा की जेल में उस समय हुआ था, जब उनके मामा कंस का अत्याचार बढ़ चुका था। कृष्ण के जन्म के साथ ही उनके माता-पिता देवकी और वसुदेव को यह विश्वास हुआ कि अब कंस के अत्याचार का अंत होगा। लेकिन नवजात कृष्ण को कंस से बचाना सबसे बड़ी चुनौती थी। इसलिए वसुदेव आधी रात को कृष्ण को एक टोकरी में रखकर यमुना नदी पार करने के लिए निकल पड़े।

कंस से कृष्ण को बचाना था जरूरी

देवकी के भाई कंस को आकाशवाणी हुई थी कि देवकी की 8वीं संतान ही उसकी मौत का कारण बनेगी। यह सुनकर कंस ने देवकी और वसुदेव को कारागार में बंद कर दिया। देवकी की पहली 6 संतानों को कंस ने मार दिया। 7वीं संतान बलराम को योगमाया की शक्ति से रोहिणी के गर्भ में पहुंचा दिया गया।

जब देवकी की 8वीं संतान के रूप में श्रीकृष्ण का जन्म हुआ, तब कारागार में दिव्य प्रकाश फैल गया। भगवान कृष्ण ने देवकी और वसुदेव को अपना दिव्य स्वरूप दिखाया और बताया कि वे स्वयं भगवान विष्णु के अवतार हैं। इसके बाद कृष्ण ने उन्हें आदेश दिया कि उन्हें तुरंत गोकुल ले जाकर नंद बाबा और यशोदा के यहां छोड़ दें।

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अचानक खुल गए जेल के दरवाजे

कृष्ण के जन्म के बाद वसुदेव ने उन्हें एक टोकरी में रखा। भगवान की योगमाया से कारागार के सभी पहरेदार गहरी नींद में सो गए। जेल के दरवाजों पर लगे ताले अपने आप खुल गए। वसुदेव नवजात कृष्ण को सिर पर रखी टोकरी में लेकर कारागार से बाहर निकल पड़े। उन्हें गोकुल पहुंचाना था, जहां नंद बाबा और यशोदा रहते थे।

रास्ते में आई यमुना नदी

गोकुल पहुंचने के रास्ते में वसुदेव के सामने यमुना नदी थी। उस समय रात का अंधेरा था और यमुना में तेज पानी बह रहा था। लेकिन वसुदेव ने हिम्मत नहीं छोड़ी। वे कृष्ण को टोकरी में लेकर यमुना में उतर गए। जैसे ही वसुदेव यमुना में आगे बढ़े, नदी का जल बढ़ने लगा। यमुना भी भगवान कृष्ण को एक बार छूना चाहती थीं। जब यमुना का जल कृष्ण के चरणों तक पहुंचा, तब उनका मकसद पूरा हो गया और पानी फिर नॉर्मल हो गया।

शेषनाग ने की कृष्ण की रक्षा

जब वसुदेव कृष्ण को लेकर यमुना पार कर रहे थे, तब तेज बारिश होने लगी। भगवान विष्णु के शेषनाग ने अपने फन फैलाकर बाल कृष्ण के ऊपर छतरी बना दी। इस तरह बारिश के बीच भी कृष्ण सुरक्षित रहे और वसुदेव आगे बढ़ते रहे।

गोकुल में यशोदा के पास पहुंचे

आखिरकार वसुदेव यमुना पार करके गोकुल पहुंच गए। वहां नंद बाबा के घर यशोदा ने एक कन्या को जन्म दिया था। वह कन्या योगमाया थीं। वसुदेव ने कृष्ण को यशोदा के पास सुला दिया और उस कन्या को लेकर वापस मथुरा की जेल में लौट आए। जैसे ही वे जेल पहुंचे, दरवाजे फिर बंद हो गए और पहरेदार जाग गए।

कंस को जब देवकी की 8वीं संतान के जन्म की खबर मिली, तो वह उस कन्या को मारने के लिए पहुंचा। लेकिन कन्या उसके हाथ से छूटकर आकाश में चली गईं और देवी के रूप में प्रकट होकर कंस को चेतावनी दी कि उसका अंत करने वाला जन्म ले चुका है।

क्यों महत्वपूर्ण है वसुदेव की यह यात्रा?

वसुदेव की यह यात्रा केवल एक पिता द्वारा अपने बच्चे को बचाने की कहानी नहीं है। इसे भगवान की इच्छा और उनकी दिव्य लीला के रूप में देखा जाता है। जब भगवान स्वयं धरती पर अवतार लेते हैं, तो उनकी रक्षा और उनके मकसद को पूरा करने के लिए प्रकृति भी उनका साथ देती है। वसुदेव का कृष्ण को टोकरी में रखकर यमुना पार कराना इसी दिव्य लीला का एक पार्ट था।

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