
Issyk Kul Mystery: मध्य एशिया के देश किर्गिस्तान में एक ऐसी झील है, जिसे देखकर पहली नजर में यकीन करना मुश्किल होता है। चारों तरफ बर्फ से ढके टीएन शान पहाड़, समुद्र तल से करीब 1600 मीटर की ऊंचाई, कड़ाके की सर्दी और फिर भी झील का खुला पानी जमता नहीं है। इसका नाम है Issyk-Kul, जिसका मतलब है- किर्गिज भाषा में ‘गर्म झील’। इसकी खासियत के पीछे कोई एक रहस्य नहीं, बल्कि झील की विशाल गहराई, हल्का खारा पानी, बड़ी जलराशि और लोकल जलवायु जैसे कई कारण मिलकर काम करते हैं।
सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि ऊंचाई पर स्थित हर झील नहीं जमती है। Issyk-Kul की सतह समुद्र तल से लगभग 1606–1607 मीटर ऊपर है और इसकी अधिकतम गहराई करीब 665–668 मीटर है। यानी यह सिर्फ कोई छोटी पहाड़ी झील नहीं, बल्कि पानी का एक विशाल भंडार है। इतनी बड़ी मात्रा में पानी को पूरी तरह ठंडा करके बर्फ में बदलने के लिए बहुत ज्यादा गर्मी बाहर निकलनी होगी। यही इसकी सबसे बड़ी प्राकृतिक ताकत है।
Issyk-Kul की गहराई इसकी कहानी में बेहद खास रोल है। सर्दियों में झील की सतह ठंडी होती है, लेकिन नीचे मौजूद पानी पूरी तरह उसी गति से ठंडा नहीं होता। सर्दियों में खुले पानी का तापमान करीब 4 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहता है और गहरे पानी की स्थिति स्थिर रहती है। यानी ऊपर की ठंडी हवा के बावजूद पूरी विशाल जलराशि जल्दी से हिमांक तक नहीं पहुंचती। यही वजह है सतह पर बर्फ की मोटी परत बनने की स्थिति नहीं बनती।
ये भी पढ़ें- उज्बेकिस्तान के घरों में क्यों बिछता है ‘दस्तरखान’? इस अनोखी परंपरा के पीछे छिपा है बड़ा मतलब
Issyk-Kul पूरी तरह मीठे पानी की झील नहीं है। इसका पानी हल्का खारा यानी brackish है। इसकी लवणता लगभग 6 ग्राम प्रति किग्रा के आसपास बताई गई है। खारे पानी का हिमांक मीठे पानी की तुलना में कम होता है। इसलिए पानी को बर्फ में बदलने के लिए और कम तापमान चाहिए। यानी सर्दी चाहे कितनी भी तेज हो, झील के पानी में मौजूद खनिज और नमक उसके जमने की प्रोसेस को मुश्किल बनाते हैं।
Issyk-Kul के आसपास ऊंचे पहाड़ जरूर हैं, लेकिन झील के आसपास का स्थानीय मौसम आसपास के क्षेत्र की तुलना में अपेक्षाकृत नरम रहता है। झील के कारण आसपास के तापमान में भी कुछ हद तक बैलेंस दिखाई देता है। यानी यहां सिर्फ पहाड़ों की ऊंचाई देखकर यह मान लेना गलत होगा कि झील भी उसी अनुपात में जम जाएगी।
आमतौर पर खुली मुख्य झील जमती नहीं है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि किनारे के हर हिस्से में कभी बर्फ नहीं बनती। साइंस के मुताबिक - कुछ उथले हिस्सों और खाड़ियों में सर्दियों के दौरान बर्फ जम सकती है। खासकर शांत और कम गहरे हिस्से मुख्य जलराशि की तुलना में ज्यादा आसानी से जमते हैं। इसलिए Issyk-Kul की खासियत यह है कि इसकी विशाल मुख्य जलराशि सर्दियों में भी खुली रहती है।
Issyk-Kul को लेकर अक्सर यह बात कही जाती है कि इसके नीचे गर्म पानी के स्रोत इसे जमने नहीं देते। कुछ वैज्ञानिक अध्ययनों में thermal springs यानी गर्म जलस्रोतों को भी झील की खासियत में शामिल किया गया है। लेकिन वैज्ञानिक तस्वीर इससे कहीं बड़ी है। झील का न जमना सिर्फ गर्म पानी की वजह से नहीं समझाया जा सकता। इसकी विशाल जलराशि, गहराई, हल्की लवणता और स्थानीय जलवायु मिलकर इसे सर्दियों में भी खुला रखने में अहम भूमिका निभाते हैं।
किर्गिज भाषा में Issyk-Kul का अर्थ ‘गर्म झील’ है। इसके पीछे मुख्य वजह यही असाधारण प्राकृतिक विशेषता है कि बर्फीले पहाड़ों के बीच मौजूद होने के बावजूद झील की मुख्य सतह सर्दियों में आमतौर पर पूरी तरह नहीं जमती। यही विरोधाभास Issyk-Kul को इतना खास बनाता है- ऊंचाई पर मौजूद झील, चारों ओर बर्फीले पहाड़ और फिर भी पानी का विशाल नीला विस्तार खुला हुआ।
ये भी पढ़ें- अरल सागर सूखा तो जमीन से निकलीं भूतिया चीजें! उज्बेकिस्तान के ‘Ghost Ships’ की पूरी कहानी
तो आखिर 1600 मीटर की ऊंचाई पर भी Issyk-Kul क्यों नहीं जमती? इसका जवाब किसी एक रहस्यमयी वजह में नहीं, बल्कि प्रकृति के कई नियमों के मेल में छिपा है। झील की विशाल गहराई और जलराशि गर्मी को लंबे समय तक संजोकर रखती है, हल्का खारापन पानी के हिमांक को कम करता है और स्थानीय जलवायु भी झील को पूरी तरह जमने से बचाने में मदद करती है। इसीलिए बर्फीले टीएन शान पहाड़ों के बीच Issyk-Kul आज भी एक ऐसी ‘गर्म झील’ के रूप में मौजूद है, जिसका पानी सर्दियों में भी प्रकृति के इस अनोखे संतुलन की कहानी सुनाता है।