
Raksha Bandhan 2026: रक्षाबंधन पर हर बहन अपने भाई की कलाई पर राखी बांधती है, भाई उसे गिफ्ट देता है और दोनों एक-दूसरे की लंबी उम्र और खुशियों की कामना करते हैं। लेकिन क्या राखी सिर्फ भाई को ही बांधी जाती है? अगर आप सोचते हैं कि राखी का मतलब सिर्फ भाई की कलाई पर धागा बांधना है, तो इसकी कहानी इससे कहीं ज्यादा बड़ी है। रक्षासूत्र की परंपरा सिर्फ भाई-बहन तक सीमित नहीं रही है। अलग-अलग समय और परंपराओं में इसे सुरक्षा, शुभकामना और रिश्ते के प्रतीक के तौर पर भी देखा गया। तो आखिर पुराने समय में रक्षासूत्र किसे बांधा जाता था? आइए जानते हैं कि इतिहास और पौराणिक कथाओं के 5 किस्से, जब राखी सिर्फ भाई को नहीं बांधी गई...
भविष्य पुराण (Bhavishya Purana) की कथा के अनुसार, जब देवताओं और असुरों के बीच भयंकर युद्ध छिड़ा, तब देवराज इंद्र कमजोर पड़ने लगे। उनकी सुरक्षा के लिए उनकी पत्नी शची (इंद्राणी) ने मंत्रों से सिद्ध एक रक्षासूत्र तैयार किया और इंद्रदेव की कलाई पर बांधा। इसके बाद इंद्र ने युद्ध में जीत हासिल की।
चित्तौड़ की रानी कर्णावती ने जब देखा कि गुजरात का सुल्तान बहादुर शाह उनके राज्य पर हमला करने वाला है, तो उन्होंने अपनी और प्रजा की रक्षा के लिए मुगल बादशाह हुमायूं को राखी भेजी थी। हुमायूं ने इस धागे का मान रखा और चित्तौड़ की मदद के लिए सेना भेज दी।
प्राचीन काल में गुरु अपने शिष्यों को और विद्वान ब्राह्मण अपने यजमानों को मंगलकामना और सुरक्षा के लिए रक्षासूत्र (कलावा) बांधते थे। आज भी रक्षाबंधन के दिन पुरोहित अपने यजमानों को यह सूत्र बांधते हैं।
भगवान विष्णु जब राजा बलि के द्वारपाल बन गए, तब माता लक्ष्मी ने एक आम महिला का रूप धरकर बलि को रक्षासूत्र बांधा और बदले में अपने पति (विष्णु जी) को वैकुंठ वापस ले जाने का वचन मांगा। यहां राखी ने एक सुरक्षा और सम्मान का पुल बनाया।
1905 में जब अंग्रेजों ने बंगाल का विभाजन किया, तब गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर ने हिंदू-मुस्लिम एकता बनाए रखने के लिए सभी को एक-दूसरे की कलाई पर राखी बांधने का आह्वान किया था। यह भाईचारे और सामाजिक एकता का सबसे बड़ा प्रतीक बना।
बिलकुल! रक्षाबंधन किसी एक रिश्ते में बंधा हुआ त्योहार नहीं है। आप यह रक्षासूत्र