
UCC Explained: उत्तराखंड, गुजरात, असम के बाद UCC बिल पास कराने वाला मध्य प्रदेश भारत का चौथा राज्य बन गया है। 21 जुलाई 2026 को भाजपा की मोहन यादव सरकार ने यूनिफॉर्म सिविल कोड (Uniform Civil Code-UCC) बिल पास कराया। इसका मकसद है अलग-अलग धर्मों के पर्सनल कानूनों की जगह सभी नागरिकों के लिए एक समान नागरिक कानून लागू करना है। यह कानून शादी, तलाक, गोद लेना, विरासत और संपत्ति के बंटवारे जैसे मामलों से जुड़ा है। भाजपा का कहना है- इससे सभी नागरिकों को समान अधिकार मिलेंगे, जबकि विपक्ष इसे धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़ा मुद्दा बता रही है। आइए जानते हैं UCC क्या है?
Uniform Civil Code (समान नागरिक संहिता) ऐसा कानून है, जिसमें भारत के सभी नागरिकों के लिए शादी, तलाक, भरण-पोषण, गोद लेना, उत्तराधिकार (Inheritance) और संपत्ति के बंटवारे जैसे नागरिक मामलों में एक जैसे नियम लागू होंगे। भारत में अभी इन मामलों के लिए अलग-अलग धार्मिक समुदायों के अपने-अपने पर्सनल कानून हैं। जैसे -
1. सभी नागरिकों के लिए समान कानून
संविधान का अनुच्छेद 14 सभी को कानून के तहत समानता का अधिकार देता है। भाजपा की केंद्र सरकार का कहना है- नागरिक मामलों में भी समान नियम होने चाहिए।
2. महिलाओं के अधिकार मजबूत करना
राजनीतिक एक्सपर्ट का मानना है- समान नागरिक कानून से विवाह, तलाक और संपत्ति के मामलों में महिलाओं को ज्यादा समान अधिकार मिलेंगे।
3. कानूनी व्यवस्था को सरल बनाना
अलग-अलग व्यक्तिगत कानूनों के बजाय एक समान कानून होने से कानूनी प्रोसेस और आसान हो जाएगी।
UCC का विरोध कर रही विपक्ष का कहना है...
भारत के जिन राज्यों में UCC लागू हो रहा है, वहां पर इस कानून के तहत ये विषय शामिल होंगे...
नोटः UCC का संबंध धार्मिक पूजा-पद्धति, त्योहार, धार्मिक अनुष्ठानों या आस्था से नहीं, बल्कि नागरिक (Civil) मामलों से है।
UCC बिल अब तक भारत के 4 राज्यों में पास हो चुका है। ये राज्य हैं - उत्तराखंड, गुजरात, असम और मध्य प्रदेश। 21 जुलाई 2026 को मध्य प्रदेश की विधानसभा में UCC बिल पारित हुआ।
गोवा को अक्सर ऐसा राज्य माना जाता है, जहां पुर्तगाली काल से चले आ रहे गोवा सिविल कोड के तहत अधिकांश नागरिक मामलों में अपेक्षाकृत समान नियम लागू हैं। हालांकि वहां भी कुछ विशेष अपवाद मौजूद हैं। इसके अलावा, उत्तराखंड ने राज्य स्तर पर समान नागरिक संहिता संबंधी कानून पारित किया है।
आपराधिक कानून (Criminal Law) जैसे चोरी, हत्या, धोखाधड़ी आदि के लिए पूरे देश में पहले से एक समान कानून लागू हैं। UCC सिर्फ व्यक्तिगत और पारिवारिक नागरिक मामलों से संबंधित है। जैसे - मान लीजिए 2 अलग-अलग धर्मों के नागरिक शादी, तलाक या संपत्ति के बंटवारे का मामला लेकर कोर्ट जाते हैं। वर्तमान व्यवस्था में उन पर अलग-अलग पर्सनल कानून लागू हो सकते हैं। UCC लागू होने के बाद इस तरह के केसों में दोनों पर समान नागरिक कानून लागू होगा।