
Nano Urea Liquid: खेती में अच्छी पैदावार के लिए सबसे जरूरी चीजों में से एक है सही मात्रा में खाद। किसान दशकों से यूरिया का इस्तेमाल करते आ रहे हैं, क्योंकि इसमें नाइट्रोजन (Nitrogen) की मात्रा ज्यादा होती है। लेकिन ज्यादा यूरिया के इस्तेमाल से मिट्टी, पानी और पर्यावरण पर भी असर पड़ता है। इसी प्रॉब्लम को सही करने के लिए नैनो यूरिया (Nano Urea) डेवलप हुआ। आज सरकार और एग्रीकल्चर एक्सपर्ट नैनो यूरिया को मॉडर्न खेती की दिशा में एक बड़ा अचीवमेंट मान रहे हैं। सवाल यह है कि नैनो यूरिया क्या है? यह कैसे काम करता है? क्या यह नॉर्मल यूरिया की जगह पूरी तरह ले सकता है? आइए जानते हैं...
नैनो यूरिया एक लिक्विड नाइट्रोजन खाद है, जिसे नैनो टेक्नोलॉजी की हेल्प से बनाया जाता है। इसमें नाइट्रोजन के बहुत छोटे-छोटे कण (Nano Particles) होते हैं। ये इतने छोटे होते हैं कि पौधों की पत्तियों के जरिए आसानी से अंदर चले जाते हैं। नॉर्मल यूरिया को मिट्टी में डाला जाता है, जबकि नैनो यूरिया का छिड़काव पौधों की पत्तियों पर किया जाता है।
'नैनो' का मतलब है बहुत छोटा साइज। एक नैनोमीटर (Nanometer) एक मीटर का एक अरबवां (1/1,000,000,000) हिस्सा होता है। जब किसी पदार्थ को इतने छोटे स्तर पर तैयार किया जाता है, तो उसकी क्वालिटी चेंज हो सकती है। नैनो यूरिया भी इसी नियम पर वर्क करता है।
| साधारण यूरिया | नैनो यूरिया |
| 1- मिट्टी में डाला जाता है | पत्तियों पर स्प्रे किया जाता है |
| 2- पौधा पूरी मात्रा का उपयोग नहीं कर पाता | पौधे द्वारा ज्यादा अच्छे से इसे ग्रहण (खाया) किया जाता है |
| 3- ज्यादा मात्रा की जरूरत पड़ती है | कम मात्रा में यूज होता है |
| 4- पर्यावरण में नाइट्रोजन का नुकसान ज्यादा होता है | नाइट्रोजन का नुकसान कम होता है। |
नैनो यूरिया हर कंडीशन में नॉर्मल यूरिया का कंप्लीट ऑप्शन नहीं है। इसका यूज एग्रीकल्चर एक्सपर्ट की सलाह और फसल की जरूरत के अनुसार किया जाना चाहिए।
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जब किसान नैनो यूरिया का छिड़काव पत्तियों पर करते हैं, तो उसके छोटे कण पत्तियों के छोटे-छोटे छिद्रों (Stomata) और सतह के माध्यम से पौधे में चले जाते हैं। इसके बाद पौधा जरूरत के अनुसार नाइट्रोजन का उपयोग करता है, जिससे-
1. कम मात्रा में इस्तेमाल: नैनो यूरिया की थोड़ी मात्रा से ही स्प्रे किया जा सकता है।
2. ले जाना आसान: 50 किलो की बोरी की तुलना में 500 ml की बोतल को ले जाना और संभालना ज्यादा आसान होता है।
3. पर्यावरण पर कम प्रेशर: अगर नाइट्रोजन का यूज ज्यादा हो, तो मिट्टी, भूजल और वातावरण में हो रहे नाइट्रोजन के नुकसान को कम किया जा सकता है।
4. लागत और लॉजिस्टिक्स में सुविधा: कम वजन होने से स्टोरेज और ट्रांसपोर्ट भी आसान हो सकता है।
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नैनो यूरिया का यूज कई फसलों में किया जा रहा है, जैसे-
नैनो यूरिया फैक्टः IFFCO ने वर्ल्ड का पहला कमर्शियल Nano Urea Liquid 2021 में लॉन्च किया।