
Hindu Idol Worship: घर के मंदिर में रखी भगवान की मूर्ति अगर गलती से टूट जाए या उसमें दरार आ जाए, तो मन में डर और भ्रम पैदा हो जाता है। कुछ लोग इसे अशुभ मानते हैं, कुछ घबरा जाते हैं। धर्मशास्त्रों और परंपराओं के अनुसार, ऐसी स्थिति में घबराने की नहीं, बल्कि सम्मान के साथ और सही नियम से मूर्ति का विसर्जन करना चाहिए। आइए जानते हैं- टूटी मूर्ति का क्या करना चाहिए?
धार्मिक परंपराओं के अनुसार, खंडित (टूटी या क्षतिग्रस्त) मूर्ति की पूजा नहीं करना चाहिए। पूजा के लिए मूर्ति का पूर्ण और सही अवस्था में होना जरूरी है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि टूटी मूर्ति अशुभ है या उससे कोई अनिष्ट होता है। धार्मिक विद्वानों का कहना है ऐसी मूर्ति का सम्मानपूर्वक विसर्जन या उचित स्थान पर स्थापित करना सही तरीका है।
1. सम्मान के साथ हटाएं
अगर मूर्ति टूट गई है, तो उसे सामान्य वस्तु की तरह कूड़ेदान में ना फेंकें। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, उसे साफ कपड़े में लपेटकर सम्मानपूर्वक रखना चाहिए।
2. विसर्जन करें या पवित्र स्थान पर रखें
कई परंपराओं में खंडित मूर्ति का पवित्र नदी, तलाब या जलाशय में विसर्जन करना चाहिए। जहां यह संभव न हो, वहां मंदिर से जुड़े पुजारी या धार्मिक जानकारों से सलाह लें।
3. नई मूर्ति रखें
अगर घर के मंदिर में हर दिन पूजा होती है, तो विधि-विधान से नई मूर्ति की स्थापना करना चाहिए।
क्या टूटी मूर्ति अशुभ होती है?
यह एक आम धारणा है, लेकिन धर्मग्रंथों में इसका अर्थ डर या अनिष्ट से नहीं जोड़ा गया है। धार्मिक विद्वानों के अनुसार, मूर्ति आस्था और उपासना का माध्यम है। अगर वह क्षतिग्रस्त हो जाए, तो उसका सम्मान करना चाहिए। डर या अंधविश्वास नहीं फैलाना चाहिए।
अगर भगवान की तस्वीर फट जाए या खराब हो जाए, तो उसे भी सम्मानपूर्वक हटाकर सुरक्षित तरीके से विसर्जित करना चाहिए। उसे कचरे में नहीं फेंकना चाहिए। एक उदाहरण से समझिए - मान लीजिए घर में रखी संगमरमर की गणेश जी की मूर्ति सफाई के दौरान गिरकर टूट गई। ऐसी स्थिति में घबराने या इसे अपशकुन मानने की बजाय, मूर्ति को साफ कपड़े में रखकर सम्मानपूर्वक उसका विसर्जन करें। इसके बाद चाहें तो नई मूर्ति स्थापित करके रोजना पूजा कर सकते हैं।
कॉन्टेन्ट सोर्स : अग्नि पुराण, स्कंद पुराण, धर्मसिंधु (धार्मिक आचार संबंधी ग्रंथ), कांची कामकोटि पीठ एवं अन्य पारंपरिक वैदिक व्याख्याएं.