Makhana Capital: आजकल हेल्दी स्नैक्स का नाम लेते ही सबसे पहले फूल मखाना याद आता है। हम सब इसे बड़े चाव से खाते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह कैसे बनता है? पूरी दुनिया में मशहूर इस स्नैक की राजधानी भारत में कहां है, आइए जानते हैं।
बच्चे हों या बड़े, स्नैक्स खाना किसे पसंद नहीं है? टीवी देखते हुए या लैपटॉप पर काम करते हुए, हम में से कई लोगों को कुछ न कुछ चबाने की आदत होती है। अगर आप हेल्दी स्नैक्स खाना चाहते हैं, तो सबसे पहला नाम 'फूल मखाना' का आता है। कमल के बीजों से हम इसे तैयार करते हैं। क्या आप जानते हैं कि पूरी दुनिया में पसंद किए जाने वाले इस स्नैक के लिए हमारा देश ही सबसे ज्यादा मशहूर है? हमारे देश का एक खास इलाका सबसे ज्यादा मखाना उगाता है। दुनिया का लगभग 80 प्रतिशत मखाना इसी जगह से सप्लाई होता है। आइए देखते हैं कि दुनिया की मखाना राजधानी बनने वाला यह 'गोल्डन स्टेट' कौन सा है...
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ग्लोबल मार्केट में हमारा दबदबा
पूरी दुनिया में मिलने वाले कुल मखाने का लगभग 80 से 85 प्रतिशत हिस्सा सिर्फ हमारे देश में पैदा होता है। सबसे खास बात यह है कि इसका उत्पादन अकेले बिहार राज्य करता है। 2025-26 के आंकड़ों के अनुसार, भारत में कुल 80,590 मीट्रिक टन मखाने का उत्पादन हुआ। इसमें से सबसे बड़ा हिस्सा, यानी लगभग 60,000 मीट्रिक टन मखाना सिर्फ बिहार ने उगाया। उत्तर बिहार के मिथिला, सीमांचल और कोसी नदी बेसिन के इलाके मखाने की खेती के लिए बहुत मशहूर हैं। दरभंगा, मधुबनी, पूर्णिया, कटिहार और सुपौल जैसे जिले मखाना हब के रूप में अपनी पहचान बना चुके हैं।
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मखाना को मिला GI टैग
बिहार के कई इलाकों में किसान मखाना उगाते हैं, लेकिन सिर्फ मिथिला क्षेत्र को ही जीआई (GI) टैग मिला है। यहां के मखाने की बेहतरीन क्वालिटी को देखते हुए, अगस्त 2022 में 'मिथिला मखाना' ने यह प्रतिष्ठित भौगोलिक संकेत (GI Tag) हासिल किया। इसके अलावा, 2002 में दरभंगा में 'ICAR - राष्ट्रीय मखाना अनुसंधान केंद्र' की स्थापना हुई थी। यह केंद्र मखाने की खेती और प्रोसेसिंग पर लगातार रिसर्च करता है। तालाबों और दलदली जमीनों में उगने वाले कमल के फूलों से किसान इन बीजों को इकट्ठा करते हैं और फिर उन्हें भूनकर मखाना बनाते हैं।
सरकारी मदद और अंतरराष्ट्रीय निर्यात
मखाना उद्योग को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय मखाना बोर्ड बनाया है। साथ ही, 2025-26 से 2030-31 तक के लिए ₹476.03 करोड़ के भारी बजट वाली एक विशेष योजना को भी मंजूरी दी है। इसका नतीजा यह है कि बिहार का मखाना अब देश ही नहीं, विदेशों में भी चमक रहा है। अगस्त 2026 में दरभंगा के किसानों से 18 मीट्रिक टन जीआई-टैग वाला मिथिला मखाना इकट्ठा करके पहली बार समुद्री रास्ते से ऑस्ट्रेलिया भेजा गया। यह हमारे लिए गर्व की बात है कि दुनिया में सबसे ज्यादा खाया जाने वाला मखाना हमारा ही है।
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