
Why Air Has No Color: हम हर पल हवा में सांस लेते हैं। हवा के बिना इंसान कुछ ही मिनटों तक जिंदा रह सकता है। तेज हवा चलती है तो पेड़ हिलने लगते हैं, पतंग उड़ने लगती है और ठंडक महसूस होती है। लेकिन क्या आप जानते हैं इतनी जरूरी चीज आखिर दिखाई क्यों नहीं देती? इसका जवाब साइंस में छिपा है। हवा मौजूद तो हर जगह होती है, लेकिन उसकी बनावट और गुण ऐसे हैं कि हमारी आंखें उसे डायरेक्ट नहीं देख पातीं।
हवा कोई एक गैस नहीं है, बल्कि कई गैसों का मिश्रण (मिक्चर) है। इसमें मुख्य रूप से-
किसी भी चीज को देखने के लिए जरूरी है वह प्रकाश (Light) को परावर्तित (Reflect) या बिखेरे (Scatter)। हवा के अणु इतने छोटे और इतने दूर-दूर होते हैं कि वे नॉर्मल कंडीशन में हमारी आंखों तक पर्याप्त प्रकाश वापस नहीं भेजते। इसलिए हवा पारदर्शी या ट्रांसपरेंट दिखाई देती है। यानी हवा मौजूद होती है, लेकिन उसकी वजह से हमारी आंखों तक ऐसा प्रकाश या उजाला नहीं पहुंचता जिससे वह अलग से दिखाई दे।
भले ही हवा दिखाई नहीं देती, लेकिन उसका असर आसानी से महसूस किया जा सकता है। जैसे -
असल में हमें हवा नहीं, बल्कि हवा में मौजूद दूसरी चीजें दिखाई देती हैं। जैसे-
जब हवा इन कणों को अपने साथ उड़ाती है, तब ऐसा लगता है हवा दिखाई दे रही है। जबकि असलियत में दिखाई धूल या पानी की छोटी-छोटी बूंदें देती हैं। जैसे- धूप में खिड़की से आती रोशनी में उड़ती धूल साफ दिखाई देती है। वहां हमें हवा नहीं, बल्कि हवा में तैरते धूल के कण दिख रहे होते हैं।
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नॉर्मल कंडीशन में हवा का कोई रंग नहीं होता। इसी वजह से वह पारदर्शी दिखाई देती है। हालांकि, अगर हवा में धूल, धुआं या प्रदूषण बहुत ज्यादा हो, तो वह धुंधली या हल्की भूरी दिखाई दे सकती है। यह हवा का रंग नहीं, बल्कि उसमें मिले कणों का इंपैक्ट होता है।
नहीं। पृथ्वी के वातावरण में हवा होती है, लेकिन अंतरिक्ष लगभग निर्वात (Vacuum) होता है। निर्वात वह स्थान होता है, जहां पर कोई गैस या हवा नहीं होती है। वहां सांस लेने के लिए जरूरी ऑक्सीजन और हवा मौजूद नहीं होती। इसी वजह से अंतरिक्ष यात्रियों को स्पेस सूट पहनना पड़ता है, जिसमें ऑक्सीजन की व्यवस्था होती है।
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कॉन्टेन्ट सोर्सः NASA, National Oceanic and Atmospheric Administration (NOAA), Encyclopaedia Britannica, U.S. Environmental Protection Agency (EPA), Khan Academy.