पृथ्वी गोल क्यों है? पृथ्वी अगर चौकोर होती तो क्या होता? इसके पीछे है हैरान करने वाला साइंस

Published : Jul 13, 2026, 05:59 PM IST
Why Is Earth Round

सार

Prithvi Goal Kyu Hai: जानें पृथ्वी गोल क्यों है, ध्रुवों पर चपटी और भूमध्य रेखा पर उभरी क्यों होती है। ग्रैविटी, रोटेशन और जानिए इस बारे में साइंस क्या कहता है।

Why Is Earth Round: अक्सर हमें बताया-पढ़ाया जाता है कि पृथ्वी गोल है। साइंस के अनुसार, पृथ्वी पूरी तरह परफेक्ट गोल नहीं है। यह ध्रुवों (North और South Pole) पर थोड़ी चपटी और बीच यानी भूमध्य रेखा (Equator) के पास थोड़ी उभरी है। इस आकार को Oblate Spheroid (चपटा गोलाकार) कहते हैं। अब सवाल उठता है पृथ्वी का आकार ऐसा क्यों है? इसका जवाब गुरुत्वाकर्षण (Gravity) और पृथ्वी के घूमने (Rotation) में छिपा है।

पृथ्वी गोल क्यों बनी?

1. गुरुत्वाकर्षण हर चीज को सेंटर की ओर खींचता है

अरबों साल पहले जब पृथ्वी बनी, तब वह गर्म गैस, धूल और पिघली हुई चट्टानों का विशाल गोला थी। उस समय गुरुत्वाकर्षण ने हर दिशा से पदार्थ को उसके सेंटर की ओर खींचना स्टार्ट किया। जब किसी बहुत बड़े पिंड पर हर तरफ से बराबर गुरुत्वाकर्षण या दबाव (अदृश्य बल) लगता है, तो वह धीरे-धीरे गोलाकार जैसा होने लगता है। यही वजह है पृथ्वी, सूर्य और अधिकांश बड़े ग्रह लगभग गोल दिखते हैं। जैसे- अगर हम गीली मिट्टी का एक ढेर हाथों से सभी दिशाओं से दबाते हैं, तो वह धीरे-धीरे गोल आकार लेने लगता है। ठीक इसी तरह गुरुत्वाकर्षण ने पृथ्वी को बनाया।

2. फिर पृथ्वी पूरी तरह गोल क्यों नहीं है?

पृथ्वी अपने अक्ष (Axis) पर लगभग 24 घंटे में एक चक्कर लगाती है। इस घूमने के कारण भूमध्य रेखा के पास हल्का-सा बाहरी बल (Centrifugal Effect) पैदा होता है। इसी वजह से पृथ्वी बीच में थोड़ी उभरी हुई और ध्रुवों पर थोड़ी चपटी हो गई। यानी पृथ्वी का आकार गोल जरूर है, लेकिन पूरी तरह परफेक्ट गोल नहीं।

3. अगर पृथ्वी चौकोर होती तो क्या होता?

अगर पृथ्वी का आकार चौकोर या किसी अनियमित आकृति (ऊटपटांग सेप) का होता, तो गुरुत्वाकर्षण हर जगह बराबर नहीं होता। इससे समुद्र, नदियां और वातावरण स्थिर नहीं रह पाते। कई जगहों पर जीवन के लिए अनुकूल परिस्थितियां बनाना भी मुश्किल हो जाता। यही कारण है बड़े ग्रहों का नेचुरल सेप लगभग गोल होता है।

4. हमें पृथ्वी सपाट क्यों दिखाई देती है?

पृथ्वी का आकार बहुत विशाल है। इसका व्यास लगभग 12,742 किलोमीटर है। इसलिए जब हम जमीन पर खड़े होते हैं, तो उसका घुमाव (Curvature) हमारी आंखों को दिखाई नहीं देता। जैसे- अगर आप किसी बड़े स्टेडियम के बीच खड़े हों, तो उसकी पूरी गोलाई एक नजर में नहीं दिखती। उसी तरह पृथ्वी इतनी बड़ी है कि उसका घुमाव हमें महसूस नहीं होता।

5. वैज्ञानिकों को कैसे पता चला कि पृथ्वी गोल है?

उपग्रह (Satellites), अंतरिक्ष यान और अंतरिक्ष यात्रियों की तस्वीरों से यह साफ क्लियर हो चुका है कि पृथ्वी गोल है। इसके अलावा, हजारों साल पहले भी लोगों ने कई सिग्नल्स से इसका अनुमान लगाया था, जैसे-

  • समुद्र में जहाज का धीरे-धीरे नीचे से गायब होना।
  • चंद्र ग्रहण के समय चंद्रमा पर पृथ्वी की गोल छाया दिखाई देना।
  • अलग-अलग स्थानों पर सूर्य की छाया में अंतर।

पृश्वी से जुड़े कुछ रोचक फैक्ट

  • पृथ्वी का व्यास लगभग 12,742 किलोमीटर है।
  • भूमध्य रेखा पर पृथ्वी का घेरा लगभग 40,075 किलोमीटर है। इस वजह से पृथ्वी का आकार विशाल है।
  • ध्रुवों और भूमध्य रेखा के बीच लगभग 43 किलोमीटर का अंतर है। भूमध्य रेखा का व्यास ध्रुवों की तुलना में लगभग 43 किमी अधिक है, इसलिए पृथ्वी पूरी तरह गोल नहीं है।
  • पृथ्वी की पहली पूरी तस्वीर 1972 में ली गई थी। NASA के Apollo 17 मिशन के दौरान ली गई Blue Marble तस्वीर ने पूरी दुनिया को पृथ्वी का असली रूप दिखाया।
  • सौर मंडल के सभी बड़े ग्रह लगभग गोल हैं।

Content Sources: NASA, European Space Agency, National Geographic Society, Encyclopaedia Britannica, United States Geological Survey.

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Anita Tanvi

अनीता तन्वी। मीडिया जगत में 15 साल से ज्यादा का अनुभव। मौजूदा समय में ये एशियानेट न्यूज हिंदी के साथ जुड़कर एजुकेशन सेगमेंट संभाल रही हैं। इन्होंने जुलाई 2010 में मीडिया इंडस्ट्री में कदम रखा और अपने करियर की शुरुआत प्रभात खबर से की। पहले 6 सालों में, प्रभात खबर, न्यूज विंग और दैनिक भास्कर जैसे प्रमुख प्रिंट मीडिया संस्थानों में राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय, ह्यूमन एंगल और फीचर रिपोर्टिंग पर काम किया। इसके बाद, डिजिटल मीडिया की दिशा में कदम बढ़ाया। इन्हें प्रभात खबर.कॉम में एजुकेशन-जॉब/करियर सेक्शन के साथ-साथ, लाइफस्टाइल, हेल्थ और रीलिजन सेक्शन को भी लीड करने का अनुभव है। इसके अलावा, फोकस और हमारा टीवी चैनलों में इंटरव्यू और न्यूज एंकर के तौर पर भी काम किया है।Read More...
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