World Lung Cancer Day 2026: क्या 3 हफ्तों से ज्यादा खांसी, सांस फूलना या वजन घटना लंग कैंसर का संकेत हो सकता है? जानें लंग कैंसर के शुरुआती लक्षण, जांच, इलाज, बचाव और किन लोगों को सबसे ज्यादा खतरा है।
Lung Cancer Symptoms: हर साल 1 अगस्त को World Lung Cancer Day मनाया जाता है। इसका मकसद लोगों को फेफड़ों के कैंसर (Lung Cancer) के प्रति जागरूक करना, समय पर जांच कराने के लिए प्रेरित करना और यह बताना है- अगर बीमारी शुरुआती पेज में पकड़ में आ जाए तो ट्रीटमेंट से इसे ठीक किया जा सकता है। अक्सर लोग मानते हैं फेफड़ों का कैंसर सिर्फ स्मोकिंग करने वालों को होता है, लेकिन सिर्फ यह एक वजह नहीं है। प्रदूषण, पैसिव स्मोकिंग, रेडॉन गैस, एस्बेस्टस जैसे केमिकल और कुछ पारिवारिक बैकग्राउंड भी इसके लिए जिम्मेदार हो सकते हैं।
भारत में कितनी गंभीर है यह बीमारी?
भारत में फेफड़ों का कैंसर तेजी से बढ़ने वाले कैंसरों में शामिल है। पुरुषों में यह सबसे आम कैंसरों में से एक है, जबकि महिलाओं में भी इसके मामले लगातार बढ़ रहे हैं। देर से पहचान होने की वजह से कई मरीज एडवांस स्टेज में अस्पताल पहुंचते हैं, जिससे ट्रीटमेंट मुश्किल होता है।
लंग कैंसर क्यों होता है?
फेफड़ों के सेल्स जब अनकंट्रोल तरीके से बढ़ने लगती हैं तो कैंसर बन जाता है। इसके मुख्य कारण हैं...
सिगरेट, बीड़ी, हुक्का या सिगार पीना
पैसिव स्मोकिंग (दूसरों के धुएं में रहना)
एयर पॉल्यूशन
रेडॉन गैस
एस्बेस्टस, सिलिका, डीजल धुआं जैसे इंडस्ट्रियल केमिकल
अगर लक्षण दिखाई दें तो डॉक्टर नीचे दी गई जांचे करवाते हैं...
1. Chest X-Ray - सबसे शुरुआती जांच।
2. Low-Dose CT (LDCT) - लंग कैंसर की स्क्रीनिंग के लिए सबसे प्रभावी जांच मानी जाती है।
3. CT Scan - ट्यूमर का साइज और कहां पर है वो जगह पता चलता है।
4. PET-CT Scan - कैंसर बॉडी में फैला है या नहीं, इसकी जानकारी देता है।
5. Bronchoscopy - कैमरे की हेल्प से फेफड़ों के अंदर की जांच।
6. Biopsy - कैंसर की पुष्टि के लिए सबसे जरूरी जांच।
7. Molecular Testing - EGFR, ALK, ROS1 जैसे जीन बदलाव की जांच, जिससे टार्गेटेड थेरेपी तय की जाती है।
किस उम्र में स्क्रीनिंग करवानी चाहिए?
हर इंसान को रेगुलर लंग कैंसर स्क्रीनिंग की जरूरत नहीं होती। लेकिन डॉक्टर सलाह देते हैं कि-
50–80 साल के वे लोग जिन्होंने लंबे समय तक स्मोकिंग किया हो (जैसे लगभग 20 पैक-ईयर या ज्यादा) और अभी भी धूम्रपान करते हों या हाल के वर्षों में छोड़ा हो, वे डॉक्टर की सलाह पर हर साल Low-Dose CT (LDCT) स्क्रीनिंग कराएं।
जिन लोगों में लगातार लक्षण हों, उन्हें उम्र की परवाह किए बिना तुरंत जांच करानी चाहिए।
बिना जोखिम वाले स्वस्थ लोगों के लिए रेगुलर CT स्क्रीनिंग की सलाह सामान्य रूप से नहीं दी जाती।
लंग कैंसर का इलाज कैसे होता है?
बता दें, लंग कैंसर का ट्रीटमेंट बीमारी की स्टेज पर डिपेंड करता है। ट्रीटमेंट के कुछ ऑप्शन इस प्रकार हैं...
सर्जरी
कीमोथेरेपी
रेडियोथेरेपी
इम्यूनोथेरेपी
टार्गेटेड थेरेपी
पेलिएटिव केयर
मौजूदा टाइम में कई मरीज लेटेस्ट मेडिसिन और इम्यूनोथेरेपी की मदद से पहले की तुलना में लंबा और बेहतर जीवन जी रहे हैं।
भारत में कहां होता है लंग कैंसर का इलाज?
देश के कई बड़े सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों में लंग कैंसर का ट्रीटमेंट होता है। जैसे -
All India Institute of Medical Sciences (AIIMS)
Tata Memorial Centre
Kidwai Memorial Institute of Oncology
Postgraduate Institute of Medical Education and Research (PGIMER)
Rajiv Gandhi Cancer Institute and Research Centre
Cancer Institute (WIA)
HCG Cancer Centre
Apollo Cancer Centres
लंग कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से बचने के लिए लाइफस्टाइल में क्या चेंज करें?
स्मोकिंग तत्काल बंद करें।
पैसिव स्मोकिंग से बचें।
घर और ऑफिस में अच्छी वेंटिलेशन रखें।
प्रदूषण वाले दिनों में N95 मास्क पहनें।
रेगुलर एक्सरसाइज करें।
फल और हरी सब्जियां ज्यादा खाएं।
शराब लिमिट में लें।
वजन कंट्रोल करें।
इंडस्ट्रियल केमिकल के संपर्क में PPE का यूज करें।
लगातार खांसी आने पर डॉक्टर के पास जाएं।
लंग कैंसर को मात देने वाले कुछ लोग
1. संजय दत्त (Sanjay Dutt)
कैंसर: स्टेज-4 लंग कैंसर
कब पता चला: 2020
इलाज: मुंबई में कीमोथेरेपी और अन्य ट्रीटमेंट
क्या खास है? इलाज के कुछ महीनों बाद उन्होंने खुद को कैंसर-फ्री बताया और फिल्मों में वापसी की। आज भी वे अपनी फिटनेस और कैंसर जागरूकता के लिए चर्चा में रहते हैं।
2. रसिका बोम्बटकर
पेशा: फिजियोथेरेपिस्ट और Lung Connect India Foundation की वॉलंटियर
कैंसर: स्टेज-3B लंग कैंसर
कब पता चला: महज 26 साल की उम्र में
क्या खास है? इलाज के बाद उन्होंने ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से पढ़ाई पूरी की और अब लंग कैंसर जागरूकता अभियान चला रही हैं।
3. विनोद खन्ना (प्रारंभिक लंग कैंसर से उबरे)
विनोद खन्ना की पत्नी के अनुसार, 2001 में उन्हें शुरुआती लंग कैंसर का पता चला था। ट्रीटटमेंट के बाद फेफड़ों का कैंसर कंट्रोल हो गया। बाद में उन्हें अलग प्रकार का ब्लैडर कैंसर हुआ, जिससे 2017 में उनका निधन हुआ। इसलिए उन्हें 'लंग कैंसर से उबरने' के एग्जांपल के रूप में देखा जाता है।
लंग कैंसर को लेकर WHO द्वारा जारी कुछ आंकड़े
भारत में हर साल लगभग 80,000 से ज्यादा नए लंग कैंसर के केस आते हैं।
दुनियाभर में हर साल 22 लाख से ज्यादा नए मरीज मिलते हैं।
यह दुनिया में कैंसर से होने वाली मौतों का सबसे बड़ा कारण है।
लगभग 85% मामलों का संबंध तंबाकू खाने से होता है।
शुरुआती स्टेज में अगर यह बीमारी पकड़ में आ जाए तो इंसान 5 साल तक और जिंदा रह सकता है।
कॉन्टेन्ट सोर्सः WHO, International Agency for Research on Cancer (IARC/GLOBOCAN), American Cancer Society (ACS), National Cancer Institute (USA), Indian Council of Medical Research (ICMR), National Comprehensive Cancer Network (NCCN) Guidelines.
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