राखी बांधते समय क्यों बोलते हैं 'येन बद्धो बलि राजा'? जानें इस मंत्र का असली अर्थ

Published : Aug 19, 2026, 10:30 AM ISTUpdated : Aug 19, 2026, 12:07 PM IST
Raksha Bandhan Mantra Meaning

सार

Raksha Bandhan Mantra Meaning: रक्षा बंधन पर बोले जाने वाले ‘येन बद्धो बलि राजा…’ मंत्र में छिपी है राजा बलि की रोचक कथा। जानिए राखी और इस प्राचीन कहानी का गहरा संबंध।

Raja Bali Rakhi Story: रक्षा बंधन के दिन जब बहन भाई की कलाई पर राखी बांधती है, तो कई घरों में एक मंत्र बोला जाता है- “येन बद्धो बलि राजा दानवेन्द्रो महाबलः…”। आमतौर पर लोग इसे सिर्फ राखी बांधने की रस्म का पार्ट मानते हैं। लेकिन इस छोटे से मंत्र के पीछे रक्षा, शुभकामना और कथा जुड़ी है। इस मंत्र में राजा बलि का जिक्र है और उनके शक्तिशाली होने की बात कही गई है। मंत्र का मतलब यह है- जिस रक्षा सूत्र से महान शक्तिशाली दानवराज बलि को बांधा गया था, उसी रक्षा सूत्र से तुम्हारी (भाई) भी रक्षा हो।

क्या है 'येन बद्धो बलि राजा' मंत्र?

“येन बद्धो बलि राजा दानवेन्द्रो महाबलः।

तेन त्वामनुबध्नामि रक्षे मा चल मा चल॥”

इसका अर्थ है- “जिस रक्षा सूत्र से दानवराज बलि को बांधा गया था, उसी रक्षा सूत्र से मैं तुम्हें बांधता/बांधती हूं। हे रक्षा सूत्र! तुम अपने स्थान से विचलित ना होना और इसकी (भाई) रक्षा करना।” यानी यह मंत्र सिर्फ धागा बांधने की बात नहीं करता। इसमें रक्षा सूत्र को सुरक्षा और शुभता का प्रतीक माना गया है।

मंत्र में राजा बलि का जिक्र क्यों?

मंत्र में राजा बलि का नाम इसलिए आता है क्योंकि राजा बलि को बहुत शक्तिशाली और दानी राजा माना गया है। भगवान विष्णु ने वामन अवतार लेकर राजा बलि से 3 पग भूमि मांगी थी। वामन भगवान ने तीन पग में तीनों लोक नाप लिए। इसके बाद राजा बलि को पाताल लोक जाने का वर मिला। राजा बलि से जुड़ी यही परंपरा बाद में रक्षा सूत्र के मंत्र से भी जोड़ी जाती है।

क्या राजा बलि को सच में राखी बांधी गई थी?

अंतर समझिए। “येन बद्धो बलि राजा…” मंत्र में राजा बलि का जिक्र जरूर है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि आज की तरह रक्षा बंधन पर किसी ने उन्हें राखी बांधी थी। राजा बलि और माता लक्ष्मी की कथा रक्षा बंधन से जोड़ी जाती है। लेकिन अलग-अलग ग्रंथों और परंपराओं में इस कथा के अलग रूप हैं।

राखी बांधते समय यह मंत्र क्यों पढ़ते हैं?

राखी का अर्थ ही रक्षा से जुड़ा है। जब बहन भाई की कलाई पर राखी बांधती है, तो उसके साथ भाई के अच्छे स्वास्थ्य, लंबी उम्र, सुख और सुरक्षा की कामना भी की जाती है। इसमें रक्षा सूत्र से कहा जाता है कि वह स्थिर रहे और जिसकी कलाई पर बांधा गया है, उसकी रक्षा करे। इसलिए मंत्र बोलने का उद्देश्य सिर्फ धार्मिक परंपरा निभाना नहीं, बल्कि राखी के पीछे छिपी सुरक्षा और मंगलकामना की भावना को व्यक्त करना भी है।

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'मा चल मा चल' का क्या अर्थ है?

मंत्र का आखिरी हिस्सा है- “रक्षे मा चल मा चल।”

यहां “रक्षे” का अर्थ रक्षा करने वाले सूत्र से है और “मा चल” का भाव है- विचलित मत होना या अपने स्थान से मत हटना।

सरल भाषा में इसे ऐसे समझ सकते हैं-

“हे रक्षा सूत्र, अपनी शक्ति और सुरक्षा के भाव में स्थिर रहो।” यही वजह है कि मंत्र का आखिरी हिस्सा राखी के उद्देश्य से सीधे कनेक्ट हो जाता है।

क्या यह सिर्फ भाई की रक्षा के लिए है?

रक्षा सूत्र की परंपरा सिर्फ भाई-बहन तक सीमित नहीं है। धार्मिक अनुष्ठानों में मौली या कलावा भी कलाई पर बांधा जाता है। पूजा, यज्ञ और अन्य धार्मिक मौकों पर रक्षा सूत्र बांधा जाता है। इसका संबंध शुभ संकल्प, मंगलकामना और रक्षा से है।

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राखी और मंत्र का असली संदेश

राखी भाई-बहन के प्यार का त्योहार है। बहन राखी बांधती है, भाई गिफ्ट देता है और दोनों एक-दूसरे के सुख की कामना करते हैं। “येन बद्धो बलि राजा…” मंत्र इस पूरे भाव में एक मैसेज जोड़ता है- रिश्ता मजबूत रहे, जीवन में मंगल हो और एक-दूसरे की रक्षा और सुख की कामना बनी रहे।

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Anita Tanvi

अनीता तन्वी। मीडिया जगत में 15 साल से ज्यादा का अनुभव। मौजूदा समय में ये एशियानेट न्यूज हिंदी के साथ जुड़कर एजुकेशन सेगमेंट संभाल रही हैं। इन्होंने जुलाई 2010 में मीडिया इंडस्ट्री में कदम रखा और अपने करियर की शुरुआत प्रभात खबर से की। पहले 6 सालों में, प्रभात खबर, न्यूज विंग और दैनिक भास्कर जैसे प्रमुख प्रिंट मीडिया संस्थानों में राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय, ह्यूमन एंगल और फीचर रिपोर्टिंग पर काम किया। इसके बाद, डिजिटल मीडिया की दिशा में कदम बढ़ाया। इन्हें प्रभात खबर.कॉम में एजुकेशन-जॉब/करियर सेक्शन के साथ-साथ, लाइफस्टाइल, हेल्थ और रीलिजन सेक्शन को भी लीड करने का अनुभव है। इसके अलावा, फोकस और हमारा टीवी चैनलों में इंटरव्यू और न्यूज एंकर के तौर पर भी काम किया है।Read More...
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