
Raja Bali Rakhi Story: रक्षा बंधन के दिन जब बहन भाई की कलाई पर राखी बांधती है, तो कई घरों में एक मंत्र बोला जाता है- “येन बद्धो बलि राजा दानवेन्द्रो महाबलः…”। आमतौर पर लोग इसे सिर्फ राखी बांधने की रस्म का पार्ट मानते हैं। लेकिन इस छोटे से मंत्र के पीछे रक्षा, शुभकामना और कथा जुड़ी है। इस मंत्र में राजा बलि का जिक्र है और उनके शक्तिशाली होने की बात कही गई है। मंत्र का मतलब यह है- जिस रक्षा सूत्र से महान शक्तिशाली दानवराज बलि को बांधा गया था, उसी रक्षा सूत्र से तुम्हारी (भाई) भी रक्षा हो।
“येन बद्धो बलि राजा दानवेन्द्रो महाबलः।
तेन त्वामनुबध्नामि रक्षे मा चल मा चल॥”
इसका अर्थ है- “जिस रक्षा सूत्र से दानवराज बलि को बांधा गया था, उसी रक्षा सूत्र से मैं तुम्हें बांधता/बांधती हूं। हे रक्षा सूत्र! तुम अपने स्थान से विचलित ना होना और इसकी (भाई) रक्षा करना।” यानी यह मंत्र सिर्फ धागा बांधने की बात नहीं करता। इसमें रक्षा सूत्र को सुरक्षा और शुभता का प्रतीक माना गया है।
मंत्र में राजा बलि का नाम इसलिए आता है क्योंकि राजा बलि को बहुत शक्तिशाली और दानी राजा माना गया है। भगवान विष्णु ने वामन अवतार लेकर राजा बलि से 3 पग भूमि मांगी थी। वामन भगवान ने तीन पग में तीनों लोक नाप लिए। इसके बाद राजा बलि को पाताल लोक जाने का वर मिला। राजा बलि से जुड़ी यही परंपरा बाद में रक्षा सूत्र के मंत्र से भी जोड़ी जाती है।
अंतर समझिए। “येन बद्धो बलि राजा…” मंत्र में राजा बलि का जिक्र जरूर है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि आज की तरह रक्षा बंधन पर किसी ने उन्हें राखी बांधी थी। राजा बलि और माता लक्ष्मी की कथा रक्षा बंधन से जोड़ी जाती है। लेकिन अलग-अलग ग्रंथों और परंपराओं में इस कथा के अलग रूप हैं।
राखी का अर्थ ही रक्षा से जुड़ा है। जब बहन भाई की कलाई पर राखी बांधती है, तो उसके साथ भाई के अच्छे स्वास्थ्य, लंबी उम्र, सुख और सुरक्षा की कामना भी की जाती है। इसमें रक्षा सूत्र से कहा जाता है कि वह स्थिर रहे और जिसकी कलाई पर बांधा गया है, उसकी रक्षा करे। इसलिए मंत्र बोलने का उद्देश्य सिर्फ धार्मिक परंपरा निभाना नहीं, बल्कि राखी के पीछे छिपी सुरक्षा और मंगलकामना की भावना को व्यक्त करना भी है।
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मंत्र का आखिरी हिस्सा है- “रक्षे मा चल मा चल।”
यहां “रक्षे” का अर्थ रक्षा करने वाले सूत्र से है और “मा चल” का भाव है- विचलित मत होना या अपने स्थान से मत हटना।
सरल भाषा में इसे ऐसे समझ सकते हैं-
“हे रक्षा सूत्र, अपनी शक्ति और सुरक्षा के भाव में स्थिर रहो।” यही वजह है कि मंत्र का आखिरी हिस्सा राखी के उद्देश्य से सीधे कनेक्ट हो जाता है।
रक्षा सूत्र की परंपरा सिर्फ भाई-बहन तक सीमित नहीं है। धार्मिक अनुष्ठानों में मौली या कलावा भी कलाई पर बांधा जाता है। पूजा, यज्ञ और अन्य धार्मिक मौकों पर रक्षा सूत्र बांधा जाता है। इसका संबंध शुभ संकल्प, मंगलकामना और रक्षा से है।
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राखी भाई-बहन के प्यार का त्योहार है। बहन राखी बांधती है, भाई गिफ्ट देता है और दोनों एक-दूसरे के सुख की कामना करते हैं। “येन बद्धो बलि राजा…” मंत्र इस पूरे भाव में एक मैसेज जोड़ता है- रिश्ता मजबूत रहे, जीवन में मंगल हो और एक-दूसरे की रक्षा और सुख की कामना बनी रहे।