
हेल्थ डेस्क। हाल ही में हुई एक रिसर्च स्टडी से पता चला है कि अगर डायबिटीज के मरीज सुबह ज्यादा स्टार्च वाला ब्रेकफास्ट करें तो उन्हें इंसुलिन का इंजेक्शन लेने की समस्या से निजात मिल सकती है। ऐसे मरीजों को डिनर में हल्का भोजन करना चाहिए। तब ज्यादा फायदा होता है। इस स्टडी में टाइप 2 डायबिटीक पेशेंट्स के भोजन के पैटर्न की स्टडी की गई। टाइप 2 डायबिटीज के मरीजों को दिन भर में करीब 4 बार खाना खाने के पहले इंसुलिन का इंजेक्शन लेना पड़ता है। इससे मिलने वाला हार्मोन लिवर, मसल्स और फैट सेल्स में शुगर के मूवमेंट और लेवल को नियंत्रित रखता है। यह रिसर्च स्टडी 'जर्नल ऑफ डायबिटीक केयर' में पब्लिश हुई है।
इंसुलिन इंजेक्शन के होते हैं कई गलत प्रभाव
इंसुलिन इंजेक्शन लेने वाले मरीजों पर इसका बुरा असर पड़ता है। इससे उनका वजन तो बढ़ता ही है, ब्लड शुगर का लेवल भी पूरी तरह नियंत्रित नहीं होता है। इसके बाद मरीज को इंसुलिन का ज्यादा डोज लेना पड़ता है। इससे मरीज का वजन और भी बढ़ता है। यह एक दुष्चक्र का रूप ले लेता है। ज्यादा इंसुलिन लेने से कॉर्डियोवैस्कुलर डिजीज होने की भी संभावना रहती है। इसके अलावा स्वास्थ्य संबंधी दूसरी समस्याएं भी होने लगती हैं। रिसर्च से पता चला है कि इंसान का मेटाबॉलिज्म और बायोलॉजिकल क्लॉक सुबह और दिन में खाना खाने और रात में कुछ भी नहीं खाने के अनुरूप ही अपना काम करता है। इसका एक पैटर्न बन जाता है।
डायबिटीज पेशेंट्स के लिए डाइट
वॉल्फसन मेडिकल सेंटर के डायबिटीज यूनिट के फैकल्टी ऑफ मेडिसिन के प्रोफेसर डेनेलिया जाकुबोविच ने बताया कि टाइप 2 डायबिटीज के मरीजों को दिन में कई बार खाना खाने को कहा जाता है। इसमें तीन बार भरपूर भोजन और तीन बार स्नैक्स शामिल हैं। उन्होंने कहा कि टाइप 2 मरीजों को रात में सोने से पहले हल्का स्नैक लेने से ब्लड शुगर के लेवल में कमी आती है। प्रोफेसर डेनेलिया जाकुबोविच का कहना था कि यह टाइप 2 डायबिटीज मरीजों के लिए पहले से चला आ रहा डाइट प्लान है, लेकिन अपनी रिसर्च में उन्होंने पाया कि दिन की शुरुआत में ही अगर ऐसे मरीजों को ज्यादा स्टार्च वाला ब्रेकफास्ट दिया जाए तो इससे उनमें ग्लूकोज बैलेंस्ड रहता है और दूसरे फायदे भी होते हैं।
29 मरीजों पर की गई स्टडी
यह स्टडी टाइप 2 डायबिटीज से पीड़ित 29 मरीजों पर की गई। इसमें इन मरीजों को दिन में 6 बार भोजन देने की जगह 3 बार ही भोजन देकर इसके असर को देखा गया। उन्हें सुबह में ब्रेड, फ्रूट्स और स्वीट्स दी गई। इसके बाद उन्हें लंच दिया गया और रात के खाने में स्टार्च, स्वीट्स और फ्रूट नहीं दिए गए। इसका बेहतर असर देखा गया। इससे वजन में कमी आने के साथ ही मरीजों में शुगर लेवल भी सही हुआ और इंसुलिन के डोज में भी कमी आई। साथ ही, दूसरी दवाओं को भी कम किया गया। कुल मिला कर पाया गया कि टाइप 2 डायबिटीज मरीजों को 6 बार भोजन देने की जगह तीन बार भोजन देने से उन्हें ज्यादा फायदा हुआ है। उनके लिए खासकर स्टार्च युक्त ब्रेकफास्ट ज्यादा असरदार साबित हुआ है। इससे उनमें इंसुलिन का सीक्रेशन बढ़ा और शुगर का लेवल भी पहले की तुलना में नियंत्रित हुआ।
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